नई दिल्ली | सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X Corp (पूर्व में ट्विटर) ने केंद्र सरकार के उस आदेश पर आपत्ति जताई है, जिसमें 12 अकाउंट्स को ब्लॉक करने का निर्देश दिया गया था। कंपनी ने इस कदम को “डिसप्रोपोर्शनट” (असंगत) बताते हुए इसके कानूनी आधार पर सवाल उठाए हैं।
31 मार्च को Delhi High Court में सुनवाई के दौरान X ने बताया कि उसने 18 मार्च के आदेश पर पुनर्विचार के लिए केंद्र को औपचारिक अनुरोध किया है। 19 मार्च को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को भेजे गए पत्र में कंपनी ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत जारी आदेश का विरोध किया।
X के तीन बड़े तर्क
कंपनी ने अपने पत्र में तीन मुख्य आपत्तियां दर्ज कीं—
कानूनी सीमा पूरी नहीं होती: X का कहना है कि ब्लॉक किए गए अधिकांश अकाउंट्स का कंटेंट धारा 69A के तहत तय मानकों को पूरा नहीं करता।
सुनवाई का मौका नहीं दिया गया: अकाउंट होल्डर्स को आदेश से पहले न तो नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर मिला।
पूरे अकाउंट को ब्लॉक करना असंगत: कंपनी ने कहा कि पूरे अकाउंट को ब्लॉक करना “अत्यधिक कदम” है, जबकि विवादित पोस्ट को हटाना एक कम कठोर विकल्प हो सकता था।
किन अकाउंट्स पर कार्रवाई?
सरकार ने जिन अकाउंट्स को ब्लॉक करने का आदेश दिया, उनमें @drnimoyadav, @bole_bharat, @indiaawakend_, @Nher_who, @Nehainghratho, @wankar_sun93339, @Brijesh77956738, @ITSCK47, @iPraveenK_, @ActivistSandeep, @mrjethwani_ और @Doc_RGM शामिल हैं।
इनमें से एक अकाउंट @drnimoyadav के मालिक डॉ. निमो यादव ने अदालत का रुख किया, जिसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा।
सरकार का पक्ष
केंद्र सरकार ने इन अकाउंट्स पर कार्रवाई के पीछे डीपफेक कंटेंट और “फॉल्स नैरेटिव” फैलाने की आशंका जताई है। सरकार के अनुसार, @DrNimoYadav अकाउंट पर प्रधानमंत्री Narendra Modi से जुड़े AI मैनिपुलेटेड फोटो/वीडियो और आपत्तिजनक पोस्ट शेयर किए गए, जो “पब्लिक ऑर्डर और आंतरिक सुरक्षा” को प्रभावित कर सकते हैं।
X का जवाब: ‘प्रोपोर्शनैलिटी’ का उल्लंघन
X ने अपने पत्र में “डॉक्ट्रिन ऑफ प्रोपोर्शनैलिटी” का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी सरकारी कार्रवाई को चार मानकों पर खरा उतरना चाहिए—
- वैध उद्देश्य होना चाहिए
- उस उद्देश्य से तार्किक संबंध होना चाहिए
- कम कठोर विकल्प उपलब्ध न हो
- अधिकारों पर अत्यधिक प्रभाव न पड़े
कंपनी का कहना है कि पूरे अकाउंट को ब्लॉक करना इन मानकों को पूरा नहीं करता, क्योंकि विशिष्ट पोस्ट हटाना एक कम प्रतिबंधात्मक विकल्प था।
कानूनी प्रक्रिया पर सवाल
X ने यह भी कहा कि सरकार ने IT नियम 2009 के तहत अकाउंट होल्डर्स की पहचान और उनसे संपर्क करने के “उचित प्रयास” नहीं किए।
फिलहाल क्या स्थिति है?
हालांकि X ने आदेश को चुनौती दी है, फिर भी उसने उसका पालन किया है और सभी 12 अकाउंट फिलहाल ब्लॉक हैं। यह मामला जस्टिस Purushaindra Kumar Kaurav के समक्ष आया, जहां 31 मार्च को सुनवाई हुई।
मामले का महत्व
यह विवाद डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सरकार के बीच अधिकारों के संतुलन को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है— क्या राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के नाम पर व्यापक ब्लॉकिंग उचित है, या फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर यह अत्यधिक नियंत्रण है?
On blocking 12 Indian accounts, X told the Union government that the order was disproportionate, unlawful, and lacking sufficient evidence to invoke Section 69A of IT Act. It also urged the Centre for orders to unblock the handles. मोहम्मद जुबेर, फैक्ट चेकर


