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भड़ास4मीडिया: हिंदी पत्रकारिता की एंटी-एस्टेब्लिशमेंट आवाज!

रामकृष्ण पाण्डेय ‘संजय’-

श्री यशवंत सिंह : व्यक्तित्व एवं कृतित्व…

आज के दौर में वरिष्ठ व विश्वसनीय पत्रकार होना सहज नहीं है। विशेष कर उन परिस्थितियों में जब आपके नाम के साथ ही आपकी विश्वसनीयता भी सम्बद्ध हो सके। वरिष्ठ पत्रकार श्री यशवंत सिंह जी का नाम इस उक्ति का पर्याय है।

श्री सिंह द्वारा स्थापित ‘भड़ास 4 मीडिया” ने हिंदी पत्रकारिता के परिदृश्य में ऐसी सीमा रेखा खींची है जिसे अनदेखा करना वर्तमान समय में अत्यन्त दुरूह है। श्री यशवंत सिंह मात्र एक पत्रकार नहीं बल्कि वह मीडिया क्षेत्र की विसंगतियों के विरूद्ध एक ‘एंटी एस्टेब्लिशमेंट” स्वर के रूप में विख्यात हैं। कहना अतिश्योक्ति न होगा कि श्री सिंह का व्यक्तित्व अक्खड़पन और बेबाकी की शाश्वत त्रिवेणी है।

पारम्परिक पत्रकारों से एकदम भिन्न श्री यशवंत सिंह की प्रकृति में बनारसी अक्खड़पन, फकीराना अंदाज और व्यवस्था से टकराने का अदम्य साहस है। उन्होंने बड़े-बड़े मीडिया घरानों और उनके शक्तिशाली संपादकों की कमियों को सार्वजनिक करने का जोखिम उठाया जो उस समय अकल्पनीय था। अपने व्यक्तिगत जीवन का उथल-पुथल हो अथवा फिर कोई अन्य निजी विषय, वह हर अनुभव को उतनी ही ईमानदारी से साझा करते हैं जितनी निष्पक्षता से दूसरों की खबरों पर उनकी लेखनी चलती है।

श्री यशवंत सिंह के शरीर में ऐसा विद्रोही मन वास करता है जो कि सत्ता और रसूख के सामने झुकने की जगह वर्किंग जर्नलिस्ट्स के शोषण के विरूद्ध डट कर खड़ा होना अधिक श्रेयस्कर अनुभव करता है। उनका सबसे बड़ा योगदान भड़ास 4मीडिया पोर्टल की स्थापना है जिसने हिंदी पत्रकारिता में एक नई विधा को जन्म दिया। साथ ही ‘मीडिया की वॉचडॉग भूमिका” निभायी। प्राय: दूसरों की जवाबदेही निश्चित करने वाली मीडिया की स्वयं की जवाबदेही तय करने को उनके द्वारा सृजित किया गया मंच आज अपनी साफगोई से हर किसी का विश्वस्त प्लेटफार्म है।

न्यूज़ रूम के अंदर होने वाली पारस्परिक राजनीति, पत्रकारों के शोषण, छंटनी और बड़े संपादकों के भ्रष्टाचार सरीखे बिन्दुओं को उन्होंने मुख्यधारा का विमर्श बनाया। सोशल मीडिया और ब्लॉगिंग के शुरुआती दौर में ही श्री यशवंत सिंह ने बिना किसी बड़े निवेश के अपनी निष्पक्ष लेखनी के बूते पूरे तंत्र को हिला देने की कुव्वत प्रदर्शित की और ‘वैकल्पिक मीडिया” को ठोस पहचान देने का कार्य किया। वह छोटे व मंझोले पत्रकारों के शोषित वर्ग की आवाज बने।

बात चाहे मजीठिया वेज बोर्ड के संघर्ष की रही हो या फिर पत्रकारों की अवैध छंटनी की, श्री सिंह ने अपने पटल से सदैव निचले पायदान पर कार्यरत मीडियाकर्मियों का ही कंधे से कंधा मिला कर साथ दिया। उनकी सृजनशीलता में जीवन के विविध संघर्षों समेत समकालीन समाज का नग्न सत्य दिखता है। श्री सिंह की शैली सपाट, सीधी, सरल और दिल पर चोट करने वाली है।

‘भड़ास 4 मीडिया” प्लेटफार्म के जरिये उन्होंने हिंदी पत्रकारिता को ऐसी ‘तीसरी आंख” दी जो कि स्वयं दर्पण में अपनी कमियां देखने का साहस रखती है। निसंदेह उन्होंने मीडिया में व्याप्त “आन्तरिक सन्नाटे” को तोड़ने का कार्य किया। श्री सिंह वर्तमान दौर के ऐसे प्रतिनिधि हैं जो कि व्यवस्था की आंखों में आंखें डाल कर सच बोलते हैं। उनकी धारदार पत्रकारिता व बेबाक और पारदर्शी साहित्य ने मानवीय संवेदनाओं के साथ ही जीवन के कठोर संघर्षों को शब्दों में पिरोने का महनीय कार्य किया है।

सीतापुर निवासी लेखक कवि/साहित्यकार/पत्रकार हैं, उनसे संपर्क- 9838376333 पर किया जा सकता है।

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