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सियासत

जस्टिस वर्मा के घर रुपयों का जखीरा मिलना और मीडिया में खबरें छपना क्या किसी बड़े प्रयोग का हिस्सा है?

संतोष सिंह-

दिल्ली हाईकोर्ट के जज के घर पैसा मिलना संयोग या फिर प्रयोग है क्यों कि कई ऐसे सवाल हैं जो कही ना कही उस ओर इशारा कर रहा है।

  • मीडिया की जो स्थिति है ऐसे में मैं एक चैनल के संपादक के रुप में मेरा जो अनुभव रहा है एक विधायक या फिर साधारण पार्टी कार्यकर्ता के बारे में खबर छापने के लिए सरकार से अनुमति लेन पड़ती है ऐसे में हाईकोर्ट जज को लेकर सूत्रों के हवाले से खबर किसी भी मीडिया हाउस के बूते की बात नहीं है बिना निर्देश के खबर छप ही नहीं सकता है।
  • जज के धर से पैसा बरामद हो और वो खबर मीडिया में लीक हो जाए बगैर निर्देश के सम्भव ही नहीं है दिल्ली पुलिस का खंडन और सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूरी रिपोर्ट को पब्लिक करना यह भी संयोग नहीं हो सकता ।
  • स्टाफ रूम के पास ऐसे कमरे से पांच सौ का नौट बरामद होना वो भी कबाड़ वाले रूम से ये भी संयोग नहीं हो सकता
  • सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी पक्षों की बात जनता के बीच रख संदेश दे दिया है की खेल के पीछे बड़ा खेल है
  • राज्यसभा के सभापति धनकड़ का बयान भी संकेत है जो दिख रहा है वो है ना।
  • जिस समय आग बुझाई जा रही थी उस समय हाईकोर्ट के अधिकारी भी मौजूद थे बरामदगी को लेकर उन लोगों से दस्तखत नहीं कराया गया है।
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट के बार की प्रतिक्रिया भी चौंकाने वाला था

इस तरह दर्जनों ऐसे तथ्य़ हैं जो चीख-चीख कर कह रहा है जज साहेब के घर पैसा का मिलना बड़े प्रयोग का हिस्सा है।

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