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सियासत

काश ये जाँचें भी करा लेते मोदीजी!

संजय कुमार सिंह-

अगर मनीष सिसोदिया ने गलती की भी है तो उसका नुकसान नोटबंदी से लेकर रफाल, पेगासस और तमाम अन्य के मुकाबले हुए नुकसान से बहुत कम है और शौंचालय बनवाने से बहुत ज्यादा व अच्छे काम का श्रेय उन्हें है। उन्हीं के काम का नतीजा है कि दिल्ली नगर निगम का चुनाव लगभग एक साल में प्रभावी नहीं दिया गया है फिर भी कमल नहीं खिल रहा है। बाकी फकीरी के अपने अंदाज हैं।

भ्रष्टाचार के खिलाफ जांच नियमानुसार चल रही है लेकिन

1) जज की मौत की जांच जरूरी नहीं है,
2) जनता की जासूसी हुई या नहीं
3) इजराइली सॉफ्टवेयर खरीदा गया या नहीं
4) रफाल सौदा क्यों बदला गया जानना जरूरी नहीं है।
5) 2002 में क्या हुआ था बताने वाली डॉक्यूमेंट्री नहीं देखने देंगे
6) जज साहिबानों को ईनाम किसलिए दिया गया नहीं बताएंगे
7) हिन्डनबर्ग के खिलाफ कार्रवाई नहीं
8) रिपोर्ट पर भी कार्रवाई नहीं (अगर हुई हो तो दिखी नहीं)
9) फिर भी काम करने वाले मंत्री का रिमांड जरूरी है।
10) जबकि भाजपा नेताओं पर लगने वाले आरोप जांच लायक भी नहीं होते।
11) दुलारे एंकर तो जमानत मिल गई आरोप ठंडे बस्ते में
12) ईमानदार जांचकर्ता सजा नहीं दिला पाए कोई बात नहीं
13) समर्थकों के खिलाफ जांच नहीं होगी चाहे मंदिर का पैसा खाया हो

क्योंकि मकसद सिर्फ डराना है। खिलाफ बोलने वालों का मुंह बद करना है। किसी तरह सत्ता हथियाना है।

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