नरेंद्र नाथ मिश्रा-
गाजियाबाद में सलीम का केस अद्भुत है! एक ओटीटी स्क्रिप्ट से कम नहीं है! ३१ साल पहले दिल्ली में वह एक बड़े बिजनेसमैन के बेटे का किडनैप करता है! फिरौती नहीं मिली तो उसने १३ साल के लड़के का मर्डर कर दिया!
पुलिस उसे पकड़ती है! दो साल बाद उसे कोर्ट में उम्र कैद मिलती है! तीन साल बाद उसे पैरोल पर कुछ दिनों के लिए बाहर आने का मौका मिलता है और इसमें वह फरार हो जाता है!
फिर सलीम अपना नाम-हुलिया सब बदल देता है! गाज़ियाबाद में बस जाता है! यहाँ पहले कंस्ट्रक्शन का काम करता है फिर मौलवी बन जाता है! फिर वह बहती धारा को पकड़ता है! पहले इस्लाम धर्म का त्याग करता है और अपने नाम में “वास्तिक” शब्द को जोड़ता है! इसी नाम से यूट्यूब चैनल बनाता है जिसमे मुस्लिमों के खिलाफ बोलना शुरू करता है! मकसद हिन्दू के बीच लोकप्रिय बने और उसे ढाल मिले! उसका अंदाजा सही निकलता है ! उसे हिन्दू संगठनो का समर्थन मिलने लगा! बीते दिनों उसपर हमला हुआ तो उसे बड़ा समर्थन भी मिला! लेकिन यहाँ उससे मिस्टेक भी हो गया! दिल्ली पुलिस को उसपर शक हो गया!
दिल्ली पुलिस ने जल्द जाँच कर पता लगा लिया की वह वही सलीम है जो सालों पहले उनकी गिरफ्त से भागा था! उसपर नजर रखनी शुरू हो गयी! हमले में घायल होने के बाद पुलिस ही उसका इलाज करवा रही थी! जैसे ही वह ठीक हुआ दिल्ली पुलिस उसे अपने साथ ले गयी!
इसके ऊपर हमला करने वाले दो लोगों को पुलिस ने इनकाउंटर में मार गिराया,
जबकि ये खुद “एक मर्डरर” है…. ऐसा पुलिस ने बताया है.
तमाम कट्टर धार्मिक बाबाओं वगैरह के सम्पर्क में था ये.
ये तो नाम बदल कर रह रहा था, सिस्टम का सपोर्ट भी पा ही गया था, पुलिस ने कैसे पकड़ लिया काफी सर्प्राइज होता है। -दीपांकर

मानवेंद्र सिंह-
दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई में 25 साल से फरार चल रहे सजायाफ्ता अपराधी सलीम वास्तिक को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने उसे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से दबोचा।
जानकारी के मुताबिक, सलीम वास्तिक को दिल्ली में एक व्यापारी के अपहरण और हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। हालांकि साल 2000 में वह जमानत पर जेल से बाहर आया और इसके बाद फरार हो गया।
फरारी के दौरान सलीम ने अपनी पहचान पूरी तरह बदल ली और करीब 25 वर्षों तक गुमनामी की जिंदगी जीता रहा। पुलिस से बचने के लिए उसने नाम और ठिकाना दोनों बदल लिए थे, जिससे उसे पकड़ पाना बेहद मुश्किल हो गया था।
बताया जा रहा है कि हाल ही में गाजियाबाद में उस पर जानलेवा हमला हुआ था। इसी घटना के बाद उसकी गतिविधियां पुलिस की नजर में आईं और जांच के दौरान उसकी असली पहचान सामने आ गई। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने जाल बिछाकर उसे गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ जारी है और यह भी जांच की जा रही है कि फरारी के दौरान उसने किन-किन लोगों की मदद ली और कहां-कहां ठिकाने बदले।
इस गिरफ्तारी को दिल्ली पुलिस की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है, क्योंकि एक लंबे समय से फरार अपराधी को पकड़ने में सफलता मिली है।
तनसीम हैदर-
सलीम वास्तिक के अपराध की पूरी कहानी।

फेमस सोशल एक्टिविस्ट, इस्लाम पर अपने आलोचनात्मक विचारों के लिए जाने जाने वाले और मशहूर यूट्यूबर एक्स-मुस्लिम सलीम वास्तिक को ARSC, क्राइम ब्रांच ने 31 साल पुराने अपहरण और हत्या के मामले में गिरफ्तार किया है।
सलीम वास्तिक 1995 के अपहरण और हत्या के मामले में वांछित था। सलीम वास्तिक ने अपने सहयोगी अनिल के साथ मिलकर एक व्यापारी से उसके 13 साल के बेटे की सुरक्षित रिहाई के बदले 30,000 रुपये की फिरौती मांगी थी।
कानून प्रवर्तन एजेंसियों को धोखा देने और गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने खुद को इस मामले में मृत घोषित करवा लिया और अपनी पहचान बदलकर सलीम वास्तिक उर्फ सलीम अहमद रख ली।
पिछले 26 वर्षों में वह हरियाणा और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में घूमता रहा और अंततः उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के लोनी में बस गया।
उसे 1997 में दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। वर्ष 2000 में उसे दिल्ली हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिली, लेकिन बाद में 2011 में हाईकोर्ट ने उसकी अपील खारिज कर दी।
हाल ही में एक मशहूर बॉलीवुड फिल्म निर्माता ने उसकी जिंदगी पर बायोपिक बनाने के लिए उसे साइन किया था और 15 लाख रुपये का चेक भी दिया था।
ARSC, क्राइम ब्रांच की टीम, इंस्पेक्टर रॉबिन त्यागी के नेतृत्व में और एसीपी संजय कुमार नागपाल की निगरानी में, इस 54 वर्षीय आरोपी को गाजियाबाद के लोनी से गिरफ्तार किया। इसने 30,000 रुपये की फिरौती के लिए एक व्यापारी के 13 वर्षीय बेटे का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी थी। इस संबंध में थाना गोकुलपुरी, उत्तर-पूर्व जिला, दिल्ली में FIR नंबर 36/1995 दिनांक 21.01.1995, धारा 302/363/364A/34 IPC के तहत मामला दर्ज किया गया था।
मामले के अनुसार, 20.01.1995 को मृतक संदीप बंसल, जो 13 साल का था और उत्तर-पूर्व दिल्ली के एक सीमेंट व्यापारी का बेटा था, सुबह 11:30 बजे अपने घर से रामजस स्कूल, दरियागंज की दूसरी पाली में जाने के लिए निकला था। उसकी स्कूल टाइमिंग दोपहर 12:30 से शाम 6:30 बजे तक थी, लेकिन वह शाम 7:30 बजे तक घर नहीं लौटा।
अगले दिन यानी 21.01.1995 को दोपहर करीब 12:10 बजे उसके पिता को उनकी दुकान पर फोन आया, जिसमें बताया गया कि संदीप उनके कब्जे में है और एक घंटे बाद फिर कॉल किया जाएगा।
मामले की सूचना पुलिस को दी गई और थाना गोकुलपुरी में धारा 363 IPC के तहत मामला दर्ज किया गया। उसी दिन करीब 3 बजे एक और कॉल आई, जिसमें 30,000 रुपये की फिरौती मांगी गई और निर्देश दिया गया कि शाम 4:30 बजे लोनी फ्लाईओवर के पास बस स्टैंड पर यह रकम बस में रख दी जाए। साथ ही पुलिस को सूचना देने पर बच्चे को मारने की धमकी दी गई।
जांच के दौरान शक रामजस स्कूल के मार्शल आर्ट्स इंस्ट्रक्टर सलीम खान पर गया। पूछताछ में उसने अपराध कबूल किया और पुलिस को मुस्तफाबाद के एक नाले तक ले गया, जहां से बच्चे का शव बरामद हुआ।
आगे की जांच में सह-आरोपी अनिल की पहचान हुई, जिसने 04.02.1995 को कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। उसके पास से बच्चे की घड़ी, टिफिन बॉक्स और स्कूल बैग बरामद किया गया।
जांच में सामने आया कि अनिल ने ही फिरौती कॉल की थी और उसने ही सलीम को अमीर परिवार के बच्चे का अपहरण करने का सुझाव दिया था।
जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल की गई और 05.08.1997 को कड़कड़डूमा कोर्ट ने दोनों आरोपियों को उम्रकैद और 10,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
अपील के दौरान सलीम खान को 24.11.2000 को अंतरिम जमानत मिली, लेकिन वह फरार हो गया। बाद में 19.07.2011 को दिल्ली हाईकोर्ट ने उसकी सजा बरकरार रखी।
क्राइम ब्रांच की टीम को गुप्त सूचना मिली कि सलीम वास्तिक ही इस मामले का आरोपी है। जांच में फिंगरप्रिंट और पुराने रिकॉर्ड से इसकी पुष्टि हुई। इसके बाद टीम ने छापा मारकर उसे लोनी, गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया।
फरारी के दौरान वह करनाल और अंबाला में अलमारी बनाने का काम करता रहा और 2010 में लोनी में बस गया, जहां उसने महिलाओं के कपड़ों की दुकान खोली।
पूछताछ में उसने बताया कि हाल ही में एक बॉलीवुड प्रोड्यूसर ने उसकी जिंदगी पर फिल्म बनाने के लिए उसे 15 लाख रुपये एडवांस दिए थे।
आरोपी का प्रोफाइल:
आरोपी का जन्म 1972 में शामली, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उसने अफसाना से शादी की और उसके एक बेटा और एक बेटी हैं।
उसने शामली में शाओलिन कुंग-फू सीखा और बाद में दिल्ली आकर रामजस स्कूल में मार्शल आर्ट्स इंस्ट्रक्टर के रूप में काम किया।
वह मुस्तफाबाद से जैकेट सप्लाई का काम भी करता था और इसी दौरान उसकी मुलाकात सह-आरोपी अनिल से हुई।
सलीम वास्तिक पहलगाम आतंकी हमले के बाद अपने बयानों के कारण चर्चा में आया था, जहां उसने आतंकवाद के खिलाफ खुलकर बयान दिए और पाकिस्तान पर आरोप लगाए।
27.02.2026 को लोनी में उस पर हमला हुआ, जिसमें जीशान और गुलफाम नाम के दो लोगों ने उस पर चाकू से वार किया। इस मामले में थाना लोनी में FIR नंबर 50/2026 दर्ज हुआ और उसे पुलिस सुरक्षा भी दी गई।
इलाज के बाद 25.03.2026 को उसे अस्पताल से छुट्टी मिली। हमले के आरोपियों पर 1-1 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
01.03.2026 को जीशान पुलिस मुठभेड़ में मारा गया और 03.03.2026 को गुलफाम भी मुठभेड़ में ढेर कर दिया गया। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपी को तिहाड़ जेल, दिल्ली भेज दिया गया।


