जम्मू-कश्मीर के पुंछ में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तानी गोलीबारी में मारे गए स्थानीय शिक्षक कारी मोहम्मद इकबाल को आतंकवादी बताना ज़ी न्यूज़ और न्यूज़ 18 इंडिया को भारी पड़ गया है। पुंछ की एक स्थानीय अदालत ने दोनों चैनलों पर 5-5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने के साथ-साथ उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।

वहीं, कुछ अन्य सूत्रों का कहना है कि क़ारी मोहम्मद इक़बाल के मामले में पुंछ कोर्ट ने पुंछ पुलिस को ज़ी न्यूज़ और न्यूज़ 18 के अलावा अज्ञात संपादकीय प्रभारियों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज़ करने और एक हफ्ते में कम्पलायंस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है! क़ारी के घरवालों ने दोनों चैनल्स को क़ानूनी नोटिस भेज 5-5 करोड़ हर्ज़ाना देने की मांग की है!
यह आदेश 28 जून को मृतक शिक्षक के परिजनों की ओर से अधिवक्ता शेख मोहम्मद सलीम द्वारा दायर शिकायत पर दिया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि दोनों चैनलों ने बिना किसी जांच-पड़ताल के कारी इकबाल को “कुख्यात आतंकवादी” करार दे दिया, जिससे उनकी छवि और परिवार की प्रतिष्ठा को गंभीर क्षति हुई। अदालत ने इसे “गंभीर पत्रकारिता कदाचार” करार दिया है।
पुलिस की आपत्ति खारिज
अदालत में पुलिस ने तर्क दिया था कि चैनलों का प्रसारण दिल्ली से हुआ था, इसलिए मामला पुंछ अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। लेकिन अदालत ने यह आपत्ति खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि फर्जी खबर का प्रभाव स्थानीय स्तर पर पड़ा है, जिससे जनता को गुमराह किया गया और सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा।
IPC और IT एक्ट के तहत दंडनीय अपराध
अदालत ने इस रिपोर्टिंग को भारतीय दंड संहिता (IPC) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 66 के तहत मानहानि, सार्वजनिक उपद्रव और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य माना है।
अदालत की सख्त टिप्पणी

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “बिना किसी सत्यापन के एक मृतक शिक्षक को पाकिस्तानी आतंकवादी के रूप में पेश करना सिर्फ पत्रकारिता की चूक नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाली शरारत है। यह न केवल मृतक की प्रतिष्ठा को धूमिल करता है, बल्कि समाज में आक्रोश पैदा करने की क्षमता भी रखता है।”
पुलिस और चैनलों की भूमिका
गौरतलब है कि 7 मई को पाकिस्तानी गोलीबारी में पुंछ निवासी 37 वर्षीय शिक्षक कारी मोहम्मद इकबाल की जान गई थी। इसके बाद न्यूज़18 इंडिया और ज़ी न्यूज़ ने उन्हें एक वांछित आतंकवादी बताकर तस्वीरें और नाम प्रसारित कर दिए। बाद में पुंछ पुलिस ने स्पष्ट किया कि इकबाल का किसी भी आतंकी संगठन से कोई संबंध नहीं था। पुलिस ने फर्जी खबर फैलाने वालों पर कार्रवाई की बात भी कही थी। दोनों चैनलों ने बाद में माफी भी मांगी, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था।
एंकरों और संपादकों पर भी कार्रवाई के आदेश
The Wire की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने न केवल चैनलों के खिलाफ, बल्कि इस फर्जी खबर में शामिल कुछ एंकरों और संपादकीय कर्मियों के खिलाफ भी FIR दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
पत्रकारों की प्रतिक्रिया
वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार ने इस फैसले का स्वागत करते हुए लिखा, “अगर देश की सभी अदालतें ऐसी ही सख्ती दिखाएं तो मीडिया की आधी बुराइयां खुद खत्म हो जाएं। पुंछ की अदालत का यह कदम साहसिक और समय की मांग है।”
पत्रकार सौरभ ने भी टिप्पणी की, “ज़ी न्यूज़ और न्यूज़18 को सबक सिखाने वाला फैसला। अगर देश की बाकी अदालतें भी ऐसा ही करें, तो ‘गोदी मीडिया’ अपनी हद में आ जाएगा।”


