नई दिल्ली। ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड और जियोस्टार इंडिया (पूर्व में स्टार इंडिया) के बीच ICC पुरुष और अंडर-19 क्रिकेट टूर्नामेंट के sublicence अधिकारों को लेकर चल रहे अंतरराष्ट्रीय विवाद में अगला बड़ा मोड़ 8 अगस्त 2025 को आ सकता है। इस दिन ज़ी अपनी ओर से औपचारिक जवाब (Rejoinder) लंदन कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन (LCIA) में दाखिल करने जा रहा है।
1 अरब डॉलर का दावा, ज़ी पर वित्तीय दबाव की आशंका
इस विवाद में जियोस्टार (Star) ने ज़ी के खिलाफ अब तक 1.003 अरब डॉलर (करीब ₹8,300 करोड़) का दावा ठोका है। अगर यह दावा आर्बिट्रेशन में मंजूर होता है, तो यह ज़ी के बैलेंस शीट और निवेशकों के भरोसे पर बड़ा असर डाल सकता है।
क्या है मामला?
यह विवाद 26 अगस्त 2022 को हुए एक एलायंस एग्रीमेंट से जुड़ा है, जिसके तहत जियोस्टार ने ज़ी को 2024 से 2027 के बीच ICC वैश्विक टूर्नामेंटों के लिए एक्सक्लूसिव sublicence अधिकार देने पर सहमति जताई थी। हालांकि, यह सशर्त था कि ज़ी समय पर भुगतान और गारंटी संबंधित शर्तें पूरी करे।
Star का आरोप है कि Zee ने पहली किश्त – 203.56 मिलियन डॉलर और उससे जुड़ी गारंटी फीस और ब्याज का भुगतान नहीं किया। दूसरी तरफ, ज़ी का कहना है कि Star की खुद की गतिविधियाँ समझौते का गंभीर उल्लंघन हैं, और इसी आधार पर जनवरी 2024 में Zee ने पलटवार करते हुए Star पर repudiatory breach का आरोप लगाया।
कानूनी प्रक्रिया और दावों की बढ़ती राशि
- मार्च 2024 में Star ने LCIA में मुकदमा दर्ज किया।
- सितंबर 2024 तक Star ने नुकसान की भरपाई के रूप में 940 मिलियन डॉलर की मांग की।
- 13 जून 2025 को यह दावा बढ़ाकर 1.003 अरब डॉलर कर दिया गया।
इसके जवाब में दिसंबर 2024 में ज़ी ने डिफेंस स्टेटमेंट के साथ 8.06 मिलियन डॉलर की काउंटर-क्लेम भी दायर की, और कहा कि Star के दावे पूरी तरह निराधार हैं।
ज़ी प्रबंधन का कहना है कि बाहरी कानूनी सलाह और कंपनी के आंतरिक आकलन के आधार पर इस विवाद को लेकर वित्तीय खातों में किसी बड़े बदलाव की आवश्यकता नहीं है। कंपनी को उम्मीद है कि इसका दीर्घकालिक वित्तीय प्रभाव नहीं पड़ेगा।
आगे की प्रक्रिया
नवंबर 2025 में गवाही और सबूतों की सुनवाई (Evidentiary Hearings) शुरू होगी। इससे पहले ज़ी को 8 अगस्त तक अपना rejoinder दाखिल करना है, जो उसकी रणनीति की अगली महत्वपूर्ण कड़ी होगी।



