लंदन/नई दिल्ली: लेखक और कवि कृष्ण कल्पित के खिलाफ कथित अपमानजनक बयान देने वालों को इंडिया अमेरिका सोसाइटी (सिविल राइट्स यूएसए एंड यूके) ने कड़ा संदेश देते हुए शो कॉज नोटिस जारी किया है। यह नोटिस निवेदिता झा, संजीव चंदन, आशुतोष कुमार, कात्यायन, ज्योति रीता, शालिनी श्रीनेत, अणु शक्ति सिंह समेत कई अन्य को भेजा गया है।
सोसाइटी की ओर से जारी इस नोटिस में कहा गया है कि इन व्यक्तियों ने सोशल मीडिया व अन्य सार्वजनिक मंचों पर कृष्ण कल्पित के खिलाफ झूठे व मानहानिकारक बयान दिए हैं। कृष्ण कल्पित को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिप्राप्त लेखक और सामाजिक व्यवस्था के सजग आलोचक के रूप में प्रस्तुत करते हुए सोसाइटी ने कहा कि वह उन लोगों की आवाज हैं, जो स्वयं नहीं बोल सकते।
नोटिस में भारत के पूर्व न्यायाधीश वी.आर. कृष्ण अय्यर का उद्धरण देते हुए कहा गया है— “न्याय सबसे अंतिम, सबसे कमज़ोर और सबसे उपेक्षित व्यक्ति की सेवा के लिए होना चाहिए।” कृष्ण कल्पित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के समर्थक हैं, लेकिन उनके नाम पर झूठ फैलाना सहन नहीं किया जाएगा।
इंडिया अमेरिका सोसाइटी ने चेतावनी दी है कि अगर उक्त लोग 7 दिनों के भीतर बिना शर्त माफ़ी और सार्वजनिक खंडन जारी नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ भारत के साथ-साथ ब्रिटेन और अमेरिका में भी मानहानि की आपराधिक व दीवानी कार्यवाही की जाएगी।
नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यह अंतिम चेतावनी है और यदि अपमानजनक अभियान नहीं रोका गया तो बिना किसी और सूचना के कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
संजीव चंदन-
ये बच्चों जैसा लीगल नोटिस कौन भेजता है गुरु। वह भी इंटरनेशनल लेटर हेड बनाकर। अंतरराष्ट्रीय टाइप वकीलों की भी बेइज्जती!
किसी Mr कृष्ण कल्पित के लिए यह लीगल नोटिस कुछ लोगों को भेजा गया है, पटना से लेकर दिल्ली तक। लखनऊ में Katyayani Lko जी को भी भेजा गया है।
मेरा नाम मेंशन है। अभी मिला नहीं है। क्या ये वही कृष्ण कल्पित हैं जो पटना में अब नहीं रहे। जयपुर वाले हैं क्या, कवि लेखक टाइप?
भाई अब इतनी फुर्सत कहां कि किन्हीं Mr कल्पित के लिए समय निकालकर सारे पोस्ट हटाए जाएं। अब चले थोड़ा बिहार चुनाव पर बात करने।
राजीव नयन बहुगुणा-
दुत्कार… कल्पित को बुलाया किसने था, उसे झूला झुलाया किसने था, उसको हँसाया और रुलाया किसने था, उसको लोरी दे सुलाया किसने था, उसको खिलाया और पिलाया किसने था, लेखिका से मिलाया किसने था, झेला और झिलाया किसने था, उसका पकड़ कर हिलाया किसने था?
भारी तादाद में हिंदी जगत दो दिन से इन्हीं विषयों में उलझा पड़ा है. इससे हिंदी मंडल की विषय वस्तु दरिद्रता का पता लगता है. बरसात में हर जगह रोपनियाँ चल रही हैं.
उनमें भाग लो. खेतों की मेड़ बांधो और फिसलन भरे पेड़ पर चढ़ना सीखो, ताकि ख़ुद जामुन तोड़ सको. अपने तथा अपने परिचितों के सिवा अन्य को भी पढ़ो. हो सके तो लम्बे समय तक पढ़ना लिखना छोड़ कोई श्रम जन्य काम करो.
तब विषय वस्तु का संकट दूर होगा, तथा विषय विकार भी मिटेगा. अमीर ख़ुसरो सुलतानों के लिए युद्ध लड़ता था, तथा ज़मीनों की पैमाइश करता था. रैदास जूते गांठता था, तथा भुवनेश्वर ठगी और गिरह कटी करता था.
ये लोग लेखन कभी-कभी करते थे, शेष समय अपना धंधा करते थे. इसी लिए कथ्य का लोचा इन्हें कभी नहीं हुआ. तुम भी ऐसा ही कुछ करो. घर में पोछा लगाओ, और डंडे पर कपड़ा बांध छत के जाले साफ़ करो. तब कल्पित ग्रंथि से निकल कुछ रचनात्मक कर पाओगे.
मेरे जिन एक आध शब्दों को अश्लील ठहराने जा रहे हो, वह जान बूझ तुम्हें दुत्कारने वास्ते लिखे हैं. शब्द और कथ्य दरिद्री को गीली झाड़ू से मारने का प्रावधान है. यह भी पता है कि उन्हीं पर ठहर जाओगे.
लुच्चा गू में पड़ी अठन्नी भी टप से उठा लेता है, ब शर्ते कोई देख न रहा हो. पार्क में किसी लड़की को घूरते पकड़े और पीटे जाने वाले पर सबसे ज़्यादा लम्बा हाथ वे साफ़ करते हैं, जो ख़ुद घूर रहे थे, पर पकड़ में नहीं आये.
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