बीजापुर (छत्तीसगढ़): नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। निर्भीक पत्रकार मुकेश चंद्राकर हत्याकांड में लोक निर्माण विभाग (PWD) से जुड़े पांच अधिकारियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। ये सभी अधिकारी गंगालूर-मिरतूर सड़क परियोजना में भारी भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं।
गिरफ्तार अफसरों में दो रिटायर्ड EE भी शामिल
बीजापुर के एएसपी चंद्रकांत गोवर्ना ने जानकारी दी कि गिरफ्तार किए गए अधिकारियों में दो सेवानिवृत्त कार्यपालन अभियंता (D.R. साहू और V.K. चौहान), एक वर्तमान EE (H.N. पात्र), एक SDO प्रमोद सिंह कंवर (बीजापुर) और एक उप अभियंता संतोष दास (जगदलपुर) शामिल हैं। सभी को दो दिन की रिमांड पर भेजा गया है और पूछताछ जारी है।
पहले भी हुई थी कार्रवाई
इससे पहले इसी प्रकरण में EE बी.एल. ध्रुव, SDO आर.के. सिन्हा और उप अभियंता जी.एस. कोडोपी पर भी FIR दर्ज की जा चुकी है।
करोड़ों की सड़क योजना में घोटाला
2010 में स्वीकृत गंगालूर-मिरतूर सड़क योजना की प्रारंभिक लागत ₹73.8 करोड़ थी, जो 2018 तक बढ़कर ₹188 करोड़ पहुंच गई। इसके बावजूद सड़कों का निर्माण अधूरा है। जांच में गंभीर तकनीकी खामियां, बिलिंग में गड़बड़ी और गुणवत्ता मानकों की अनदेखी सामने आई है।
पत्रकार की हत्या से जुड़ा है पूरा मामला
1 जनवरी 2025 को मुकेश चंद्राकर घर से निकलने के बाद लापता हो गए थे। 3 जनवरी को उनका शव एक सेप्टिक टैंक में मिला, जिससे पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई थी। मामले में मुख्य आरोपी ठेकेदार सुरेश चंद्राकर को पहले ही हैदराबाद से गिरफ्तार किया जा चुका है।
कौन थे मुकेश चंद्राकर?
मुकेश चंद्राकर एक जुझारू, निडर और ईमानदार पत्रकार थे, जो सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म्स के जरिए सड़क निर्माण में हो रहे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को उजागर करते थे। उन्होंने कई बार PWD के भ्रष्टाचार की परतें खोली थीं। उनकी आवाज दबाने के लिए उन्हें योजनाबद्ध तरीके से मौत के घाट उतार दिया गया।
यह मामला न सिर्फ पत्रकारिता पर हमला, बल्कि सत्ता और ठेकेदारों की साठगांठ का गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है। पुलिस की जांच आगे जारी है और अन्य नामों की गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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