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आज के अखबार : खबर तो इंडियन एक्सप्रेस में है, देश के छह शहरों में ट्रम्प का साम्राज्य, तीन गुना बढ़ा

संजय कुमार सिंह

वैसे तो आज की सबसे बड़ी खबर धराली में बादल फटने की है। इससे पूरा खीर गंगा गांव बह गया है। धराली बाजार तबाह हो गया है कम से कम चार मरे, 60 लापता (अमर उजाला), इनमें नौ सैनिक हैं (टाइम्स ऑफ इंडिया)। शुरू के तीन घंटे में 20 लोग बचाये गये हैं (द हिन्दू), 20 सेकेंड में तीन दर्जन से ज्यादा इमारतें बहीं, 25 से 30 होटल और दुकानों का बुरा हाल हो गया है। इसलिये पीड़ितों और प्रभावितों में पर्यटक भी होंगे। सैकड़ों घर-होटल मलबे में बदल गये हैं और काफी लोग इनमें दबे हो सकते हैं। आज यह खबर देशबन्धु, अमर उजाला और नवोदय टाइम्स के साथ द हिन्दू में लीड है। दि एशियन एज की लीड सबसे अलग है – दिल्ली, मनीला ने संबंधों का विस्तार किया; वार्ता के बाद 13 करार किये। इंडियन एक्सप्रेस, हिन्दुस्तान टाइम्स और टाइम्स ऑफ इंडिया में भारत पर लगाउंगा भारी टैरिफ, लीड है जबकि द टेलीग्राफ की भी लीड अलग है, नरेन्द्र मोदी ने अमित शाह की प्रशंसा की इससे उत्तराधिकार की अटकलें शुरू हो गई हैं और अभी यह एक चर्चा की शुरुआत भर है। आज जिन खबरों को कम महत्व मिला है उनमें राज्यसभा में सीआईएसएफ के प्रवेश पर हंगामा और विवाद शामिल है।

दूसरी महत्वपूर्ण खबर जो कम छपी है वह, राम रहीम 14वीं बार जेल से बाहर। सिर्फ तीन महीने पहले पैरोल मिली थी और इस बार यह 40 दिन की है। तीसरी खबर है, एसआईआर पर चर्चा की विपक्ष की मांग पर संसद बाधित। लेकिन अमर उजाला की खबर का शीर्षक है, एसआईआर पर चर्चा की मांग नाजायज, गुमराह कर रहा है विपक्ष। श्रीनगर से एक महत्वपूर्ण खबर यह है कि कल 5 अगस्त को 370 खत्म किये जाने के खिलाफ प्रदर्शन हुआ और इसमें राज्य का विशेष दर्जा फिर से बहाल करने की मांग की गई (द हिन्दू)। आपको बताया गया है कि 370 हटाने का कोई विरोध नहीं हुआ और वहां सब चंगा सी। आप उसी को सही मानेंगे क्योंकि खबर छपेगी नहीं, टीवी वाले चर्चा भी नहीं करेंगे। ऑपरेशन सिन्दूर और पाकिस्तान से युद्ध तथा उसे अचानक समाप्त किये जाने से संबंधित तमाम सवालों के जवाब नहीं देने, युद्ध में कितने विमान गिरे का विवरण नहीं देने और जम्मू में हुए जान-माल के नुकसान की चर्चा किये बगैर ऑपरेशन सिन्दूर की सफलता के लिए नरेन्द्र मोदी का सम्मान किये जाने की खबर भी है (अमर उजाला)। इस मौके पर उन्होंने यह कहा बताते हैं कि विपक्ष अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने में माहिर है (देशबन्धु)हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार, मोदी ने एनडीए की बैठक में कहा कि ऑपरेशन सिन्दूर पर विपक्ष ने सेल्फ गोल कर लिया है।

यहां यह दिलचस्प है कि कल राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे पर इस बात को लेकर विवाद था कि उन्होंने संसद की बात बाहर क्यों की। बेशक, इसमें मुद्दा यह भी था कि संसद में जिस सुरक्षा बल के प्रवेश पर एतराज था उसे सभापति संसद की सुरक्षा का भाग बता रहे थे और विपक्ष के नेता का कहना था कि सरकारी सुरक्षा बलों के संसद में प्रवेश का मतलब है कि संसद की सुरक्षा गृहमंत्रालय के अधीन हो गई है। उनका कहना था कि संसद में सिर्फ संसद की सुरक्षा के लिए नियु्क्त मार्शल ही प्रवेश करने चाहिये। जो भी हो, विवाद इस पर भी था कि इस संबंध में विपक्ष के नेता ने उपसभापति को जो पत्र लिखा वह सार्वजनिक हो गया। ऐसे में संसद में अगर एसआईआर पर चर्चा की मांग की जा रही है उसे नहीं माना जा रहा है और विरोध हो रहा है या संसद बाधित हो रही है तो उसकी चर्चा भी बाहर क्यों होनी चाहिये और क्यों कहा जाना चाहिये कि मांग नाजायज है और विपक्ष गुमराह कर रहा है। यह तो मांग नहीं मानने का पक्ष और आधार हो सकता है और लोकसभा अध्यक्ष ही इसे बतायेंगे और सदस्यों को समझायेंगे। यह भी अखबार में छपने वाली बात नहीं है और संसद में क्यों हो या नहीं हो उसके लिए बाहर खबर छपवाकार सत्तारूढ़ दल को अपने पक्ष का प्रचार नहीं करना चाहिये ना ही विपक्ष पर गुमराह करने का आरोप लगाना सही है। संसद में जो होता है उसका सीधा प्रसारण देश देखता है और अगर संसद के मामले को विपक्ष सार्वजनिक नहीं कर सकता है तो सत्तारूढ़ दल को भी नहीं करना चाहिये और सत्तारूढ़ दल अपनी बात करे भी तो मीडिया को क्या रिपोर्ट करना है और क्या नहीं यह पत्रकारिता के नियमों से तय होगा और एकतरफा खबर तो नहीं ही होनी चाहिये। कमजोर विपक्ष की एकतरफा बात की जाये – वह तो फिर भी चलेगा लेकिन विज्ञापन बजट से लैस सत्तारूढ़ दल का पक्ष बताना, उसके आरोप, राहुल गांधी पर भी साधा निशाना – प्रकाशित और प्रचारित करना पूर्णतः अनैतिक है।

सरकार के इस अनैतिक कार्य, उसके प्रचार के साथ अमर उजाला में आज सरकार के कर्तव्य का भी प्रचार है। पहले पन्ने की एक खबर का शीर्षक है, पीएम मोदी आज करेंगे कर्तव्य भवन का उद्घाटन। खबर के अनुसार, यह कर्तव्य पथ पर बना है और इसमें गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय व प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय होंगे। इस तरह, भिन्न दफ्तरों के सामान्य कार्य अब कर्तव्य पथ पर स्थित कर्तव्य भवन में किये जायेंगे। बाकी जगह नौकरी करने वाले भी अपना कर्तव्य करेंगे या उसे कुछ और कहा जायेगा – यह सब खबर में नहीं है। पता नहीं बाद में बताया जायेगा या यूं ही चलता रहेगा। जो भी हो, इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री का कर्तव्य होगा इसलिए किया जायेगा लेकिन एसआईआर पर चर्चा की मांग न तो कर्तव्य है और न अधिकार है। खबर के अनुसार, ऐसा करना गुमराह करना है। और बात इतनी ही नहीं है। पहले वाली खबर में कहा गया है, पीएम मोदी ने टिप्पणी ऐसे समय में की है जब विपक्ष एसआईआर पर अड़ा हुआ है और संसदीय कार्यवाही चलने नहीं दे रहा है। सरकार पहले ही साफ कर चुकी है…. एसआईआर पर चर्चा नहीं कराई जा सकती है। (क्योंकि) चुनाव आयोग संवैधानिक संस्था है जिसके काम-काज पर विधायिका में चर्चा नहीं हो सकती है। आप जानते हैं चुनाव आयोग के मुखिया का चुनाव प्रधानमंत्री ने जबरन अपनी इच्छा से किया है और इसी चुनाव आयोग (या उसके मुखिया) को अब संवैधानिक संस्था कह रहे हैं। इसके खिलाफ मुकदमा एक दूसरी संवैधानिक संस्था, सुप्रीम कोर्ट  में लंबित है। और यही नहीं, मामला तो एसआईआर के खिलाफ भी लंबित है। यहां इसपर जो हो रहा है और एसआईआर के नाम पर चुनाव आयोग ने जो किया है वह अलग खबर है, भले सरकार के प्रभाव से अखबारों में नहीं छप रहा है और जो सार्वजनिक कर रहा है उसके खिलाफ एफआईआर करके उस (और दूसरे लोगों को भी) डराने की कोशिश की जा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट जैसी संवैधानिक संस्था, उसमें नियुक्तियों को सरकार के नियंत्रण में लेने या होने या उसकी कोशिशों के मामलों पर चर्चा अभी मुद्दा नहीं है।

ऐसे में आज की सबसे जरूरी खबर इंडियन एक्सप्रेस में छपी है जो हर किसी को मालूम होनी चाहिये। खासकर तब जब ट्रम्प टैरिफ लगाने और बढ़ाने की मनमानी कर रहे हैं और अबकी बार ट्रम्प सरकार का प्रचार करने वाले अपने मित्र को मुश्किल में डाले हुए हैं। भारी दबाव में भारत सरकार ने ट्रम्प से कहा है कि जब अमेरिका से लेकर ईयू तक रूस से कारोबार करते हैं तो हम भी कर रहे हैं। रकार समर्थकों ने इसका खूब प्रचार किया है। यह जानते हुए कि विपक्ष की भारी चुनौती के बावजूद भारत ने यह नहीं कहा कि हम चाहे जिससे तेल खरीदें, जिससे संबंध रखें – आपको क्या परेशानी। और इसीलिए (या इसी क्रम में) ट्रम्प ने फिर भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी है जो आज खबर है। पर किसी ने यह नहीं बताया है कि भारत में ट्रम्प का साम्राज्य छह शहरों में फैला हुआ है और पहले कार्यकाल के बाद से ट्रम्प का साम्राज्य तीन गुना फैल गया है और रीयल इस्टेट में यह विस्तार 11 मिलियन (एक करोड़ 10 लाख) वर्ग फीट तक पहुंच गया है। ट्रम्प का यह साम्राज्य भारत के छह शहरों – गुरुग्राम, पुणे, हैदराबाद, मुंबई, नोएडा और बेंगलुरु में है। इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भले ही भारत को एक ‘मृत’ अर्थव्यवस्था कहा हो लेकिन उनके परिवार नियंत्रित द ट्रम्प ऑर्गनाइजेशन के लिए भारत पिछले 10 वर्षों से अमेरिका के बाहर सबसे बड़ा बाजार है। खबर के अनुसार गये साल तक ट्रम्प की दुकान, द ट्रम्प ऑर्गनाइजेशन ने भिन्न परियोजनाओं से कम से कम 175 करोड़ रुपये कमाये हैं। 2024 से ब्रांड ट्रम्प जोरजार विस्तार अभियान पर है।

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