गुवाहाटी। गुवाहाटी के लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास बसे गांवों में हड़कंप मच गया है। राज्य सरकार ने अडानी समूह के एयरोट्रॉपोलिस प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आज़ारा, गराल और मिर्ज़ापुर गांवों के 1,000 से ज्यादा परिवारों को नोटिस थमा दिए गए हैं।
410 बीघा जमीन पर दावा
कामरूप (मेट्रो) जिला प्रशासन ने अधिसूचना (पत्र संख्या 678988/2, दिनांक 19 जुलाई) जारी कर असम भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1964 की धारा 3(1) के तहत लगभग 410 बीघा जमीन को अधिग्रहण प्रक्रिया में बताया है। इसमें सिर्फ आज़ारा में 400 बीघा, गराल में 70 बीघा और मिर्ज़ापुर में 250 बीघा से अधिक जमीन शामिल है।
“यह सिर्फ जमीन नहीं, हमारी यादें हैं”
ग्रामीणों का आरोप है कि अधिग्रहण पूरी तरह जल्दबाज़ी और गोपनीयता में हो रहा है। वे पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA), पारदर्शिता और उचित पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।

गराल के एक बुजुर्ग बोले – “हम आज़ादी से पहले से यहां रह रहे हैं। यह सिर्फ जमीन नहीं, हमारी यादें हैं। सरकार अगर छीन रही है तो सम्मानजनक पुनर्वास भी करे।”
अडानी के लिए ज़मीन, किसानों के लिए संकट
गांव-गांव में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है – “विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन छुप-छुपाकर हमारी जमीन हड़पी जा रही है। मुआवजा और पुनर्वास दोनों स्पष्ट होना चाहिए।”
कांग्रेस का हमला
कांग्रेस नेता दिब्रतर सैकिया ने आरोप लगाया – “सरकार 1,000 से ज्यादा परिवारों को उजाड़ रही है और अडानी समूह को फायदा पहुंचाने के लिए ज़मीन को AIDC के नाम पर अधिग्रहित कर रही है।”
सरकार का दावा
वहीं जिला प्रशासन का कहना है कि “जिसकी भी जमीन जाएगी, उसे मुआवजा मिलेगा। बिना उचित मुआवजे के अधिग्रहण संभव नहीं।”
अडानी की योजना
गौरतलब है कि 2021 में अडानी समूह ने गुवाहाटी एयरपोर्ट को PPP मॉडल पर अपने हाथ में लिया था। अब यहां टर्मिनल विस्तार और कार्गो सुविधा जैसे बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किए जा रहे हैं। सीएम हिमंत बिस्वा सरमा इसे “देश का सबसे सुंदर एयरपोर्ट” बताते हैं और उद्घाटन नवंबर में प्रस्तावित है।
लेकिन ग्रामीणों का दर्द साफ है – “हम चाहते हैं सरकार हमारी सुने, हमें प्रक्रिया में शामिल करे। विकास का मतलब हमारी पुश्तैनी ज़िंदगी को उजाड़ना नहीं होना चाहिए।”
शीतल पी सिंह-
असम में अड़ानी ग्रुप के लिए वन भूमि और आदिवासियों के लिए बने क़ानूनों को धता बताकर जगह जगह सैकड़ों बीघा ज़मीन सौंपी जा रही हैं, अब यह दूसरा मामला सामने आया है।
असम के कोकराझार ज़िले में पगलाझोरा आरक्षित वन भूमि को अडानी समूह को थर्मल पावर प्लांट के लिए सौंप दिया गया है। इस भूमि पर अप्रैल 2025 में आदिवासी समुदायों के वन अधिकारों को आधिकारिक रूप से मान्यता दी गई थी, और यह क्षेत्र अब राजस्व गांव के रूप में दर्ज है।

लेकिन भूमि की कानूनी स्थिति अब भी “वन भूमि” ही है।ऐसे में बिना Forest (Conservation) Act, 1980 की धारा 2 और Environmental Clearance के कोई भी गैर-वन गतिविधि कानूनन अवैध है।
बिना जनसहमति और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किए यह ज़मीन पावर प्लांट को दी गई है, यह सीधे तौर पर Forest Rights Act, 2006 और F(C) Act का उल्लंघन है।
अडानी के लिए हो रहे ये खेल भी पढ़ें…
अडानी को 3000 बीघा जमीन देने का फैसला पहुंचा हाईकोर्ट, जज भी हैरान, देखें वीडियो
बिहार सरकार अडानी ग्रुप को 33 साल के लिए 1020 एकड़ जमीन 1 रु वार्षिक लीज पर देगी!


