अभी कल ही भड़ास4मीडिया ने असम सरकार द्वारा अडानी समूह को 3000 बीघा जमीन दिए जाने की खबर प्रकाशित की थी। सीमेंट प्लांट लगाने के लिए। आपको बता दें कि डिजिटल मीडिया को छोड़ यह खबर किसी भी मेनस्ट्रीम मीडिया ने प्रकाशित नहीं की है। इस फैसले को लेकर जो वीडियो सामने आए थे, उसमें जज महोदय भी हैरान नजर आ रहे थे। असम के बाद बिहार सरकार का यह फैसला जोरदार है। छत्तीसगढ़ में अडानी का सिक्का चल ही रहा है। धीरे धीरे पूरा देश अडानी की झोली में चला जाए तो हैरान होने की जरूरत नहीं है।
आप फिलहाल बिहार से जुड़ी ये ख़बर पढ़िए….

शीतल पी सिंह-
अड़ानी ग्रुप और बिहार सरकार… और अब बिहार भी अड़ानी ग्रुप को थर्मल पावर प्लांट लगाने के लिए 1020 एकड़ जमीन कुल एक रुपये वार्षिक की लीज़ पर 33 साल के लिए दे रहा है। इस दौरान इस प्लांट से उत्पादित बिजली 6.08 रुपये की दर से बिहार सरकार अड़ानी के प्लांट से ख़रीदती रहेगी।
इस प्लांट में स्तेमाल होने के लिए जो कोयला चाहिए उसे झारखंड सरकार पहले ही बांग्लादेश के प्रोजेक्ट के लिए लगभग मुफ्त अड़ानी जी को तब ही दे चुकी थी जब वहाँ बीजेपी की राज्य सरकार थी । बांग्लादेश से रिश्ते बिगड़ने के साथ ही सौदा खटाई में पड़ गया था जिसे अब देश के सबसे गरीब राज्य ने 1020 एकड़ जमीन देकर संभाल दिया है।
सरकारी प्रेस नोट / गोदी मीडिया में यही सूचना कुछ इस तरह बयान होती है, बिहार सरकार ने अदाणी पावर लिमिटेड के साथ थर्मल पावर प्लांट के लिए समझौते की प्रक्रिया 7 अगस्त, 2025 को शुरू की, जब कंपनी को बिहार राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड (BSPGCL) से लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) प्राप्त हुआ।
यह LoI भागलपुर जिले के पीरपैंती में 2,400 मेगावाट के ग्रीनफील्ड अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट से 2,274 मेगावाट बिजली आपूर्ति के लिए था। हालांकि, औपचारिक बिजली आपूर्ति समझौता (Power Supply Agreement – PSA) अभी तक अंतिम रूप से पूरा नहीं हुआ है, क्योंकि कंपनी को लेटर ऑफ अवार्ड (LoA) और उसके बाद PSA पर हस्ताक्षर की प्रतीक्षा है।
इसलिए, 7 अगस्त, 2025 को LoI जारी होने के साथ समझौते की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन अंतिम समझौते की तारीख अभी तक स्पष्ट नहीं है।
ये भी पढ़ें…


