जयपुर। हरियाणा में तैनात आईपीएस अधिकारी पूरन कुमार आत्महत्या प्रकरण में सूबे के तमाम वरिष्ठ अफसरों के खिलाफ दर्ज एफआईआर का मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब इसी तरह का एक मामला राजस्थान से सामने आया है। 2009 बैच के आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी ने एक बार फिर सुर्खियों में आने वाला बयान दिया है। चौधरी ने अपने खिलाफ चल रही कार्रवाई को ‘साजिश’ करार देते हुए राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े को 672 पेज का विस्तृत पत्र भेजा है।
इस पत्र में उन्होंने 15 आईएएस-आईपीएस अफसरों के साथ दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के नाम तक लिख दिए हैं। चौधरी का आरोप है कि पिछले सात साल से उनके प्रमोशन और करियर को रोकने की संगठित कोशिशें की जा रही हैं।
उन्होंने कहा, “मैं सिस्टम से लड़ रहा हूं लेकिन कोर्ट के आदेशों की भी अनदेखी की जा रही है।”
आईजी पंकज चौधरी के मुताबिक, उन्होंने यह मामला प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह मंत्रालय तक पहुंचाया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
कोर्ट से मिली राहत, सरकार ने नहीं मानी बात
1 मई 2018 को अदालत ने राज्य सरकार को चौधरी की एसीआर रिकॉर्ड दुरुस्त करने और प्रमोशन देने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद आदेशों का पालन नहीं हुआ। चौधरी का कहना है कि यह पूरे सिस्टम में व्याप्त पक्षपात और अफसरशाही के दुरुपयोग का उदाहरण है।
पहले सेवा से हटाया गया, फिर कोर्ट से जीती लड़ाई
पंकज चौधरी को एक समय सेवा से बाहर कर दिया गया था, लेकिन उन्होंने कानूनी लड़ाई लड़कर अपनी वापसी की। अब वह कह रहे हैं कि “सिस्टम के भीतर बैठे कुछ लोग फिर से मेरे करियर पर प्रहार करने में लगे हैं।”
पत्र में किन-किन पर आरोप?

अखबारों में छप रही खबरों के मुताबिक, चौधरी के पत्र में पूर्व मुख्यमंत्रियों अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे के अलावा कई वरिष्ठ अफसरों — कपिल गर्ग, भूपेंद्र यादव, उमेश मिश्रा — के नाम शामिल हैं। उन्होंने कहा है कि इन लोगों ने मिलकर उनके प्रमोशन और इमेज को नुकसान पहुंचाने की साजिश की।
मामला क्यों चर्चा में है?
- दो-दो पूर्व मुख्यमंत्रियों पर गंभीर आरोप
- कोर्ट आदेशों की अनुपालना नहीं
- सात साल से प्रमोशन रोके जाने का दावा
- राज्यपाल से लिखित शिकायत के बाद प्रशासनिक हलकों में मची हलचल
संबंधित खबर…
हरियाणा आईपीएस पूरन कुमार सुसाइड केस यहां पढ़ें…
IPS आत्महत्या केस: भास्कर ने उन 13 IAS-IPS के फोटो छापे हैं जिनपर FIR हुई है!


