नई दिल्ली। देश में प्राइवेट एफएम रेडियो का नेटवर्क लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इस सेक्टर की कमाई पर दबाव साफ दिखाई देने लगा है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की जनवरी-मार्च 2026 तिमाही की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में प्राइवेट एफएम चैनलों की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन विज्ञापन से होने वाली आय घट गई है। वहीं, कई बड़े शहरों में आर्थिक कारणों से रेडियो स्टेशनों को बंद भी करना पड़ा है।
TRAI की रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2025 तक देश के 113 शहरों में 385 निजी एफएम चैनल संचालित हो रहे थे। मार्च 2026 के अंत तक यह संख्या बढ़कर 120 शहरों में 390 चैनलों तक पहुंच गई। वर्तमान में 31 निजी कंपनियां इन एफएम चैनलों का संचालन कर रही हैं।
इस दौरान डीबी कॉर्प ने अलवर, भुज, दमन, गांधीधाम, गंगानगर, पाली और रतलाम में सात नए एफएम स्टेशन शुरू किए। वहीं, जेसीएल इंफ्रा ने लेह और कारगिल के दो एफएम स्टेशनों का लाइसेंस वापस कर दिया। इसके बावजूद लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश में अब तीन निजी एफएम चैनल संचालित हो रहे हैं।
हालांकि, चैनलों की संख्या बढ़ने के बावजूद विज्ञापन से होने वाली आय में गिरावट दर्ज की गई। मार्च 2026 को समाप्त तिमाही में निजी एफएम रेडियो कंपनियों की कुल विज्ञापन आय 414.03 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछली तिमाही में यह 419.29 करोड़ रुपये थी। यानी नए स्टेशन शुरू होने के बावजूद प्रति चैनल औसत कमाई कम हुई है।
TRAI की यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब रेडियो उद्योग बड़े बदलावों से गुजर रहा है। हाल ही में एचटी मीडिया ने मुंबई का रेडियो नशा, दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु के रेडियो वन तथा चेन्नई के फीवर एफएम का प्रसारण बंद कर दिया। कंपनी ने इन स्टेशनों को आर्थिक और कारोबारी दृष्टि से लाभदायक न होने की वजह से बंद करने का फैसला लिया। खास बात यह है कि इन स्टेशनों के लाइसेंस 2030 और 2031 तक वैध थे, फिर भी कंपनी ने स्वेच्छा से इन्हें बंद कर दिया।
एफएम रेडियो उद्योग में पुनर्गठन का दौर भी जारी है। टीवी टुडे नेटवर्क ने मुंबई, दिल्ली और कोलकाता में इश्क 104.8 एफएम से बाहर निकलने का फैसला किया है। रिलायंस ब्रॉडकास्ट नेटवर्क का स्वामित्व बदल चुका है, जबकि रेड एफएम ने मुंबई का मैजिक एफएम बंद कर दिया है। इसके अलावा ईएनआईएल (रेडियो मिर्ची) ने कानपुर, लखनऊ और नागपुर के कुछ स्टेशन परिसंपत्तियों के हस्तांतरण को मंजूरी दी है।
स्वामित्व के लिहाज से रेडियो मिर्ची सबसे बड़ा निजी एफएम नेटवर्क बना हुआ है, जिसके पास 73 चैनल हैं। इसके बाद रिलायंस ब्रॉडकास्ट नेटवर्क के 58, साउथ एशिया एफएम के 40, म्यूजिक ब्रॉडकास्ट (रेड एफएम) के 39 और डीबी कॉर्प के 37 एफएम चैनल हैं। देश के कुल 390 निजी एफएम चैनलों में से 247 चैनल केवल इन पांच बड़े समूहों के पास हैं, जो कुल बाजार का लगभग 63 प्रतिशत हिस्सा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आज ऑडियो उपभोग तेजी से म्यूजिक स्ट्रीमिंग ऐप्स, पॉडकास्ट, यूट्यूब और कनेक्टेड कार जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में पारंपरिक एफएम रेडियो को अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
रेडियो उद्योग लंबे समय से सरकार से लाइसेंस शुल्क में राहत, रेडियो विज्ञापनों पर जीएसटी कम करने, स्मार्टफोन में एफएम रिसीवर सक्रिय करने तथा सीमित अवधि के लिए समाचार और समसामयिक कार्यक्रम प्रसारित करने की अनुमति देने की मांग कर रहा है। TRAI भी निजी एफएम स्टेशनों को प्रति घंटे 10 मिनट तक समाचार प्रसारित करने, एफएम चैनलों की ऑनलाइन स्ट्रीमिंग और लाइसेंस शुल्क व्यवस्था में बदलाव जैसी सिफारिशें कर चुका है।
वहीं, सामुदायिक रेडियो का विस्तार लगातार जारी है। मार्च 2026 तक देश में 564 कम्युनिटी रेडियो स्टेशन संचालित हो रहे थे, जबकि दिसंबर 2025 में इनकी संख्या 557 थी।
TRAI के ताजा आंकड़े बताते हैं कि भारत में एफएम रेडियो का भौगोलिक विस्तार तो जारी है, लेकिन केवल नए शहरों तक पहुंच बना लेना अब पर्याप्त नहीं है। डिजिटल ऑडियो प्लेटफॉर्म से बढ़ती प्रतिस्पर्धा, घटती विज्ञापन आय और बढ़ती परिचालन लागत के बीच निजी एफएम रेडियो उद्योग के सामने आर्थिक रूप से टिके रहने की चुनौती लगातार बढ़ती जा रही है।
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