नई दिल्ली। देश के तीन राज्यों—उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा—में कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। तीनों मामलों में आरोप अलग-अलग हैं, लेकिन विपक्ष इन्हें संस्थागत भ्रष्टाचार के उदाहरण के रूप में पेश कर रहा है। यह हाल तब है जब तीनों ही राज्यों में “न खाऊंगा न खाने दूँगा” का दावा करने वाली भाजपा की सरकार है।
उत्तर प्रदेश: राम मंदिर निर्माण में अनियमितताओं का खुलासा
उत्तर प्रदेश में अयोध्या के राम मंदिर निर्माण से जुड़े कुछ भूमि सौदों और खर्च को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। इसके अलावा हाल ही में दान पात्र और चांदी की मूर्ति व ईंटें गायब होने की बात सामने आई। विपक्ष समय-समय पर आरोप लगाता रहा है कि मंदिर परियोजना से जुड़े कुछ लेनदेन में अनियमितताएं हुई हैं। हालांकि, संबंधित पक्ष इन आरोपों से इनकार करता रहा है।

मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार की जमीन खरीद पर विवाद
मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार की ओर से उज्जैन में खरीदी गई जमीन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। एक राष्ट्रीय अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री के परिवार और रिश्तेदारों ने बड़ी मात्रा में कृषि भूमि खरीदी है। इस खुलासे के बाद विपक्ष सरकार को घेर रहा है, जबकि मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है।

हरियाणा: सरकारी स्कूलों की खरीद में करोड़ों रुपये के नुकसान का दावा
हरियाणा में सरकारी स्कूलों के लिए खरीदे गए सामान को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। एक अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, बाजार में बेहद कम कीमत पर उपलब्ध वस्तुओं को कई गुना अधिक दाम पर खरीदा गया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 5 रुपये की कॉपिलरी ट्यूब 84 रुपये, 201 रुपये प्रति मीटर मिलने वाला बीडिंग 2,100 रुपये प्रति मीटर और अन्य सामान भी बाजार भाव से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदा गया। आरोप है कि कम बोली लगाने वाली कंपनियों को दरकिनार कर अधिक कीमत वाली फर्मों को ठेके दिए गए, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
इन तीनों मामलों ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। विपक्ष इन मुद्दों पर सरकारों से जवाब मांग रहा है, जबकि संबंधित पक्ष अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इन मामलों को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलचल तेज रहने की संभावना है।
तीन राज्यों में बड़े पैमाने पर संस्थागत भ्रष्टाचार के आरोप:
उत्तर प्रदेश: राम मंदिर में धन घोटाला
मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री के परिवार पर जमीन कब्जाने के आरोप
हरियाणा: स्कूलों की खरीद में लूट
उम्मीद है कि इस सप्ताहांत इन मुद्दों पर खबरों का फोकस बड़े पैमाने पर बदल जाएगा!
अब पत्ते फिर से फेंटिए!
-पंकज पचौरी, वरिष्ठ पत्रकार
रणदीप सिंह सुरजेवाला-
शिक्षा के नाम पर खुली लूट! हरियाणा के सरकारी स्कूलों में 17 गुना महंगे रेट पर खरीदे गए साइंस किट। प्रदेश के बच्चों के भविष्य को संवारने के नाम पर शिक्षा विभाग में करोड़ों का घोटाला सामने आया है।
घोटाले की खौफनाक सच्चाई:
- ₹5 की कैपिलरी ट्यूब ₹84 में (17 गुना महंगी) और ₹201 का मीटर ब्रिज ₹2100 में खरीदा गया!
- सबसे कम बोली लगाने वाली योग्य फर्म (L-1) को दरकिनार कर, ऊंची दर वाली कंपनी को करीब ₹21 करोड़ का भारी-भरकम ठेका सौंप दिया गया।
- सरकार के सख्त निर्देशों के बावजूद GeM पोर्टल, Indiamart और Amazon जैसी साइट्स पर उपलब्ध सस्ते दामों की जानबूझकर अनदेखी की गई।
- किसी खास वेंडर को फायदा पहुंचाने के लिए यह करोड़ों का टेंडर महज 15 दिन की जल्दबाजी में पास कर दिया गया।
- प्रदेश के 729 स्कूलों की लैब के लिए भेजी गई ये महंगी किट पिछले 2 साल से धूल फांक रही हैं।
बच्चों की शिक्षा के बजट पर सरेआम डाका डालने वाले इन अधिकारियों और ठेकेदारों के गठजोड़ पर विजिलेंस या CBI जांच कब बैठेगी?



