डीडी के डिकोड वाले सुधीर चौधरी ने एक वीडियो पोस्ट कर एक्स पर कुछ पूर्व पत्रकारों, जो अब यूट्यूबर्स बन चुके हैं, के लिए बिना नाम लिखे ट्वीट किया है। जिसके जवाब में अजीत अंजुम ने चौधरी को तिहाड़ी, ब्लैकमेलर और न जाने क्या क्या अनाप शनाप सुनाया है, नीचे पढ़ें…
अजीत अंजुम-
सुना है जेल रिटर्न तिहाड़ी चौधरी मेरे और रवीश जैसे पत्रकारों के लिए कुछ बोल रहा है.
- जो आदमी सीधे- सीधे सौ करोड़ की ब्लैकमेलिंग करने के मामले में जेल जा चुका है.
- जो आदमी स्टिंग कैमरे में अपनी करतूतों के साथ क़ैद है.
- जो आदमी सरकार के तलवे चाटने की प्रतियोगिता में पहले पायदान पर बने रहने के लिए हर रोज़ जतन कर रहा है.
- जो आदमी सत्ता की सरपरस्ती में अपनी ज़ुबान और ज़ेहन को गिरवी रखकर काम कर रहा है.
- जो आदमी पत्रकारिता के चोले में रहकर हर दौर में सरकारों से सेटिंग करके अपना धंधा कर रहा हो.
- जो आदमी मोदी की चाटूकारिता करके करोड़ों के सरकारी अुनदान पर बीजेपी का भोंपू बना हो.
- जो आदमी विपक्ष और विरोध की आवाजों के ख़िलाफ़ सुपारी लेकर दिन रात काम कर रहा हो.
- जो आदमी पत्रकारिता के सबसे कलंकित चेहरों में से एक हो.
वो आदमी बोल रहा है. छोड़ो यार…
सुधीर चौधरी के ट्वीट का सार यह है:
चौधरी का आरोप है कि कुछ पूर्व पत्रकार, जो अब यूट्यूबर हैं, उन्होंने मुख्यधारा की मीडिया (Mainstream Media) के खिलाफ लंबे समय तक प्रदर्शनकारियों को भड़काया।
ऐसा उन्होंने अपनी प्रासंगिकता (relevance) बनाए रखने और विवाद के जरिए चर्चा में रहने के लिए किया।
सुधीर चौधरी का कहना है कि जब भीड़ द्वारा डराने-धमकाने (intimidation) और भीड़तंत्र (mob behaviour) को सामान्य और महिमामंडित किया जाता है, तो वही भीड़ बाद में अपने समर्थकों या उकसाने वालों के खिलाफ भी हो सकती है।
अंत में चौधरी ने एक रूपक (metaphor) का इस्तेमाल करते हुए लिखा कि “जो लोग ज़हर पालते हैं, उन्हें अंततः पता चलता है कि सांप वफादारी नहीं पहचानते, वे सभी को डसते हैं।”
यानी, उनका संदेश यह है कि मुख्यधारा के मीडिया के खिलाफ माहौल बनाने वाले कुछ पूर्व पत्रकारों और यूट्यूबरों की रणनीति अंततः उन्हीं पर भारी पड़ी, क्योंकि प्रदर्शन के दौरान कुछ पत्रकारों को भी निशाना बनाया गया। यह उनका राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रम पर व्यक्त किया गया दृष्टिकोण है।


