
नई दिल्ली/मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान की गई एक टिप्पणी को लेकर चर्चा में आए ऑस्ट्रेलियाई पत्रकार ब्लेक जॉनसन ने कहा है कि उनका बयान किसी व्यक्तिगत राय पर नहीं, बल्कि तथ्यों पर आधारित था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी नियमित रूप से बिना पूर्व निर्धारित (अनस्क्रिप्टेड) प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करते और यही बात उन्होंने अपने ऑन-कैमरा बयान में कही थी।
डॉ. विजेंद्र चौहान को दिए एक इंटरव्यू में जॉनसन ने कहा कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि उनका महज 10 सेकेंड का वीडियो भारत में इतनी बड़ी बहस का विषय बन जाएगा। उन्होंने कहा कि मोदी की दो दिवसीय ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान पत्रकारों को उनसे कोई सवाल पूछने का अवसर नहीं मिला, इसलिए उनकी टिप्पणी एक तथ्यात्मक अवलोकन थी।
‘यह राय नहीं, तथ्य है’
जॉनसन ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि यह मेरी राय थी। यह एक तथ्य है। श्री मोदी बहुत कम प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं।” उन्होंने कहा कि मोदी के मीडिया से संवाद को लेकर पहले भी नॉर्वे और हाल में न्यूजीलैंड की यात्राओं के दौरान सवाल उठ चुके हैं।
उन्होंने कहा, “आखिरकार हमारी बात सही साबित हुई। दो दिनों तक हमें प्रधानमंत्री से एक भी सवाल पूछने का मौका नहीं मिला।”
लोकतंत्र में जवाबदेही जरूरी
इंटरव्यू के दौरान जॉनसन ने कहा कि लोकतंत्र में निर्वाचित नेताओं तक पत्रकारों की पहुंच बेहद महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक पारदर्शिता, जवाबदेही और सरकारी फैसलों की सार्वजनिक व्याख्या लोकतंत्र की बुनियाद है।
उन्होंने कहा, “सिर्फ यह बताना काफी नहीं कि सरकार क्या कर रही है, यह भी समझाना चाहिए कि क्यों कर रही है।” उनका मानना है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस नेताओं को अपने सलाहकारों से अलग दृष्टिकोण सुनने का अवसर भी देती हैं।
जॉनसन ने कहा कि यदि ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ या कोई अन्य शीर्ष नेता लगातार मीडिया के सवालों से बचते, तो उन्हें कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ता। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में पत्रकार सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी नेताओं से सवाल पूछते हैं क्योंकि वे जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं।
सोशल मीडिया के जरिए संवाद पर उठाया सवाल
जॉनसन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी मुख्य रूप से सोशल मीडिया और अन्य एकतरफा माध्यमों से संवाद करते हैं, जबकि लोकतंत्र में पत्रकारों के सवालों का सामना करना भी जरूरी है। उनके अनुसार, कठिन सवालों से बचने के बजाय उनका जवाब देना लोकतंत्र को मजबूत बनाता है।
भारत विरोधी प्रदर्शनकारियों पर भी बोले
मोदी की मेलबर्न यात्रा के दौरान मार्वल स्टेडियम के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए जॉनसन ने कहा कि प्रदर्शनकारी ऑस्ट्रेलिया की मुख्यधारा की सोच का प्रतिनिधित्व नहीं करते थे। उन्होंने उन्हें “बहुत छोटे, अतिदक्षिणपंथी और नस्लवादी सोच वाले समूह” का हिस्सा बताया।
हालांकि उन्होंने माना कि ऑस्ट्रेलिया में आव्रजन, आवास और बुनियादी ढांचे को लेकर वास्तविक चिंताएं मौजूद हैं, लेकिन इन्हें भारत विरोधी नारों से अलग देखा जाना चाहिए।
भारत और भारतीयों की सराहना
इंटरव्यू के अंत में जब उनसे भारतीयों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “सबसे पहले तो भारतीय खाना पसंद है।” इसके बाद उन्होंने भारतीयों की मेहनत, सफलता पाने की इच्छा और विनम्र व्यवहार की भी सराहना की।
जॉनसन ने कहा कि भारत तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था और बड़ी आबादी के कारण वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच राजनीतिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंध और मजबूत होंगे।


