Connect with us

Hi, what are you looking for?

उत्तर प्रदेश

अपनी सैलरी से मुआवजा नहीं कटवाएंगी नोएडा DM मेधा रूपम, हाईकोर्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं!

Woman in a light purple outfit wearing green police body armor, talking on a cellphone and holding a helmet, with uniformed officers and a dusty street in the background.

नई दिल्ली। गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी की NSA के तहत हिरासत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को आकृति की हिरासत को अवैध ठहराते हुए उसे रिहा करने का आदेश दिया था और 5 लाख रुपये का मुआवजा देने को कहा था।

हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक, मुआवजे की रकम डीएम मेधा रूपम की सैलरी से वसूल की जानी थी। अदालत ने जिम्मेदार अन्य अधिकारियों, यहां तक कि संबंधित थाना प्रभारी तक, की सैलरी से भी रकम वसूलने का निर्देश दिया था। अदालत ने हिरासत के आदेश को बिना पर्याप्त सामग्री और बिना उचित विचार के पारित माना था।

आकृति चौधरी को अप्रैल 2026 में नोएडा में मजदूरों के वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया था। बाद में 13 मई को उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया गया। वह करीब पांच महीने तक हिरासत में रहीं। हाईकोर्ट ने कहा कि उनकी लगातार हिरासत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन थी।

फैसले में हाईकोर्ट ने नोएडा प्रशासन की कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी की थी और कहा था कि अधिकारियों की निष्ठा संविधान के प्रति होनी चाहिए, न कि राजनीतिक कार्यपालिका के प्रति। अदालत ने डीएम और संबंधित पुलिस अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड में भी अपनी नाराजगी दर्ज करने का निर्देश दिया था।

अब मेधा रूपम ने हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इससे मामले में प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही और NSA के इस्तेमाल को लेकर कानूनी बहस एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के सामने पहुंच गई है


Newspaper front page with a large headline: 'Censured by HC, Noida DM moves SC against order quashing student NSA case'; small photo of DM Medha Roopam alongside column text.

नोयडा की डीएम मेधा रूपम इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई हैं जिसमें छात्रा आकृति चौधरी पर NSA लगाने पर उनपर 5 पांच लाख रु लगाया था.
जस्टिस सूर्यकांत की अदालत से दो कारणों से तुरंत राहत की संभावना है जिसके दो प्रमुख कारण हो सकते हैं.
एक- इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला जस्टिस अतुल श्रीधरन का है जिन्होंने कर्नल सोफ़िया कुरैशी को आतंकवादियों की बहन कहने पर स्वत: संज्ञान लेते हुये बीजेपी के मंत्री के खिलाफ FIR दर्ज कराने का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ उस फैसले पर रोक लगाई बल्कि जस्टिस श्रीधरन का ट्रांसफर भी कर दिया.
दो- मेधा रूपम ज्ञानेश कुमार की बेटी है. ज्ञानेश कुमार चुनाव आयोग में रहकर बीजेपी के लिए काम करते हैं.
जस्टिस सूर्यकांत कभी निराश नहीं करते हैं.
-प्रशांत टंडन, वरिष्ठ पत्रकार

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन