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सुख-दुख

प्रेरित चौहान अब न कोई दूसरा यूट्यूब चैनल बना सकते हैं और न ऐसे किसी चैनल का इस्तेमाल कर सकते हैं जिस पर वे “बार-बार या प्रमुखता से” दिखते हों!

दस साल की पत्रकारिता, एक ईमेल और ताउम्र की पाबंदी : ‘द क्विक न्यूज़’ बंद होने के बाद प्रेरित चौहान यूट्यूब से क़ानूनी लड़ाई लड़ेंगे

पत्रकार प्रेरित चौहान का यूट्यूब चैनल ‘द क्विक न्यूज़’ बंद हो चुका है और यूट्यूब ने अपील का आख़िरी दरवाज़ा भी बंद कर दिया है। अब चौहान ने कंपनी के ख़िलाफ़ क़ानूनी रास्ता अपनाने का एलान किया है।

यूट्यूब ने 30 अक्टूबर को उनकी अपील ख़ारिज कर दी। ईमेल में कहा गया कि चैनल ने स्पैम, भ्रामक तरीक़ों और स्कैम से जुड़ी नीति तोड़ी है और उसे बहाल नहीं किया जाएगा।

बाद में पार्टनर सपोर्ट ने बताया कि एक मानव समीक्षक ने सामग्री को कम्युनिटी गाइडलाइंस के ख़िलाफ़ पाया, लेकिन किस वीडियो पर आपत्ति है, यह किसी ईमेल में नहीं लिखा। कंपनी ने यह भी कह दिया कि वह फ़ैसले की ख़ास वजहों पर बात नहीं कर सकती और चैनल अब दोबारा अपील के लायक़ नहीं है।

पाबंदी एक चैनल तक सीमित नहीं है। चौहान अब न कोई दूसरा यूट्यूब चैनल बना सकते हैं, न रख सकते हैं, और न ऐसे किसी चैनल का इस्तेमाल कर सकते हैं जिस पर वे “बार-बार या प्रमुखता से” दिखते हों। यूट्यूब की नीति में “प्रमुखता से दिखना” परिभाषित नहीं है, और यह भी साफ़ नहीं कि किसी न्यूज़ संस्थान के चैनल पर पत्रकार के तौर पर आना इसके दायरे में आएगा या नहीं।

यही बात चौहान को सबसे ज़्यादा चुभ रही है। उनका कहना है कि ये शर्तें उनके किसी न्यूज़ संगठन से जुड़ने, ख़बर करने या उसके चैनल पर आने तक को रोक सकती हैं। 2 नवंबर को X पर उन्होंने लिखा कि दस साल की पत्रकारिता के बाद उन्होंने यूट्यूब से क़ानूनी लड़ाई लड़ने का फ़ैसला किया है, और अगले दिन यूट्यूब के ईमेल सार्वजनिक कर दिए।

उनके मुताबिक़ उन्होंने विवादित वीडियो हटाने और असली उल्लंघन सुधारने की पेशकश की थी, पर कंपनी नहीं मानी; और यह ईमेल यूट्यूब की उनकी आलोचना वायरल होने के बाद आया। चौहान ने लिखा, “This is bigger than my channel.”

रास्ते सीमित हैं, पर बंद नहीं। IT नियम 2021 के तहत प्लेटफ़ॉर्म के शिकायत अधिकारी को 15 दिन में शिकायत निपटानी होती है और उसके फ़ैसले के ख़िलाफ़ 30 दिन के भीतर ग्रीवांस अपीलेट कमेटी में जाया जा सकता है। चौहान सीधे अदालत जाने की बात कह रहे हैं।

यह पहला मामला भी नहीं है। अगस्त 2025 में एडिटर्स गिल्ड के महासचिव रूबेन बनर्जी का ओड़िया चैनल हटाया गया था, और नवंबर 2023 में एमए काज़मी का ‘मीडिया स्टार वर्ल्ड’ दिल्ली यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट्स की अपील के बाद बहाल हुआ था।

सवाल बड़ा है, जब किसी पत्रकार की रोज़ी-रोटी एक कंपनी के ऐसे ईमेल पर टिकी हो जो वजह तक न बताए, तो जवाबदेही कौन तय करेगा?

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