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दागी कोचर के पक्ष में जेटली की बैटिंग!

जेपीसिंह

अभी तक तो विपक्ष के लोग सीबीआई के राजनितिक दुरुपयोग के आरोप लगाते थे लेकिन अब मोदी सरकार में शामिल और अमेरिका में इलाज करा रहे बिना विभाग के मंत्री अरुण जेटली ने सार्वजनिक रूप से आईसीआईसीआई-वीडियोकॉन लोन फ्रॉड मामले में सीबीआई जांच पर सवाल उठाए हैं और आरोपियों का बचाव किया है। सीबीआई द्वारा आईसीआईसीआई-वीडियोकॉन लोन धोखाधड़ी मामले में चंदा कोचर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के सन्दर्भ में जेटली ने कहा है कि खोजी दुस्साहस की कीमत लोगों को अपने करियर की बर्बादी से चुकाना पड़ रहा है।

अरुण जेटली ने सीबीआई को दुस्साहस से बचने और सिर्फ दोषियों पर ध्यान देने की नसीहत दी। जेटली ने यह टिप्पणी ऐसे समय की है जब एक ही दिन पहले सीबीआई ने आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व प्रमुख चंदा कोचर, उनके पति दीपक कोचर, विडियोकॉन के एमडी वेणुगोपाल धूत के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है। इसके अलावा जांच एजेंसी ने धोखाधड़ी के मामले में बैंकिंग क्षेत्र के के.वी. कामत व अन्य को पूछताछ के लिए नामजद किया है। उन्होंने जांच एजेंसी को दुस्साहस से बचने की नसीहत दी है।

जेटली ने कहा कि आमतौर पर देश में जांच एजेंसियां दो तरह से काम करती है।एजेंसियों का पहला तरीका सुर्खी बटोरने वाला होता है और इसमें लोगों पर कीचड़ उछालने, बिना पर्याप्त साक्ष्य के आधार पर जांच के पैमाने को इतना बढ़ा दिया जाता है कि उससे कोई नतीजा न निकले। ऐसी प्रक्रिया में आमतौर पर गुनहगार बच निकलता है और बेगुनाह लोगों की छवि बुरी तरह प्रभावित हो जाती है।वहीं जांच करने का दूसरा तरीका पेशेवर है जहां सुबूतों को सहारे गुनहगार की दिशा में जांच की जाती है और जांच को अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचा गुनहगार को सजा दिलाने का काम किया जाता है।

अमेरिका में इलाज करा रहे जेटली ने ट्वीट किया है कि भारत में दोषियों को सजा मिलने की बेहद खराब दर का एक कारण जांच और पेशेवर रवैये पर दुस्साहस एवं प्रशंसा पाने की आदत का हावी हो जाना है। जेटली ने कहा है कि पेशेवर जांच और जांच के दुस्साहस में आधारभूत अंतर है। हजारों किलोमीटर दूर बैठा मैं जब आईसीआईसीआई मामले में संभावित लक्ष्यों की सूची पढ़ता हूं तो एक ही बात दिमाग में आती है कि लक्ष्य पर ध्यान देने के बजाय अंतहीन यात्रा का रास्ता क्यों चुना जा रहा है? यदि हम बैंकिंग उद्योग से हर किसी को बिना सबूत के जांच में शामिल करने लगेंगे तो हम इससे क्या हासिल करने वाले हैं या वास्तव में नुकसान उठा रहे हैं।

अरुण जेटली ने कहा है कि एजेंसियों को जांच करने में सिर्फ महाभारत के अर्जुन की तरह निशाना मछली की आंख का साधना चाहिए। स्वास्थ्य कारणों से अवकाश पर चल रहे नरेन्द्र मोदी सरकार के वित्त मंत्री जेटली ने अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि जांच एजेंसियों को अपने काम में अधिक पेशेवर होने की जरूरत है।जेटली ने कहा कि जांच एजेंसी को साक्ष्यों के आधार पर सिर्फ ऐसे लोगों शिकंजा कसने की जरूरत है, जो इस घोटाले के लिए जिम्मेदार हैं।

सीबीआई ने आईसीआईसीआई बैंक घोटाले मामले में पूर्व बैंक प्रमुख चंदा कोचर उनके पति दीपक कोचर वीडियोकॉन के एमडी वीएन धूत के के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और पद के दुरुफयोग करते हुए वीडियोकॉन समूह को कर्ज देने का मामला दर्ज किया है।एफआईआर के मुताबिक चंदा कोचर पर अपने पति दीपक कोचर के प्रभाव में आकर वीडियोकॉन के एमडी वीएन धूत की कंपनी वीडियोकॉन इंटरनैशनल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को 300 करोड़ रुपये कर्ज देने का मामला है। इस मामले के साथ जांच के दायरे में चंदा कोचर पर बैंक की उन तमाम समितियों को प्रभावित करने का आरोप भी है जो बैंक में कर्ज देने का फैसला लेने का काम करती हैं।सीबीआई ने धूत की कई और कंपनियों को बैंक से मिले कर्ज को भी जांच के दायरे में रखा है। इसके साथ ही बैंक के कई अधिकारियों को जांच के घेरे में लेते हुए उनकी भूमिका की परख भी सीबीआई कर रही है।

आईसीआईसीआई के कार्यकाल के दौरान चंदा कोचर को भारत और विदेशों में बैंक के कई तरह के संचालनों की ज़िम्मेदारी दी गई थी। लगातार नौ सालों तक सीईओ रहीं चंदा कोचर पर फिर 2018 की शुरुआत में वीडियोकॉन ग्रुप को लोन देने और फिर अनुचित तरीके से निजी लाभ लेने का आरोप लगा और मामला इतना बढ़ गया कि मार्च 2019 में होने वाले कार्यकाल की समाप्ति से कुछ ही महीने पहले 4 अक्टूबर 2018 को उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा।

फिलवक्त अरुण जेटली अस्वस्थ होने के कारण अवकाश पर हैं और अमेरिका में अपना इलाज करा रहे हैं। वहीं केन्द्र सरकार को एक फरवरी को अपना अंतरिम बजट पेश करना है और वित्त मंत्रालय का कार्यभार बुधवार को रेल मंत्री पीयूष गोयल को सौंप दिया गया है।

क्यों गंवानी पड़ी कुर्सी?
चंदा कोचर पर कथित रूप से इसी साल मार्च में अपने पति को आर्थिक फ़ायदा पहुंचाने के लिए अपने पद के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था।मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि आईसीआईसीआई बैंक ने वीडियोकोन समूह को 3,250 करोड़ रुपये का लोन मुहैया कराया था।ग्रुप ने इस लोन में से 86 फीसद यानी 2810 करोड़ रुपये नहीं चुकाए। 2017 में इस लोन को एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग असेट्स) में डाल दिया गया। वीडियोकॉन समूह के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत के कोचर के पति दीपक कोचर के साथ व्यापारिक संबंध थे।वीडियोकॉन ग्रुप की मदद से बनी एक कंपनी बाद में चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की अगुवाई वाली पिनैकल एनर्जी ट्रस्ट के नाम कर दी गई।यह आरोप लगाया गया कि धूत ने दीपक कोचर की सह स्वामित्व वाली इसी कंपनी के ज़रिए लोन का एक बड़ा हिस्सा स्थानांतरित किया था। आरोप है कि 94.99 फ़ीसद होल्डिंग वाले ये शेयर्स महज 9 लाख रुपये में ट्रांसफ़र कर दिए गए।

कैसे सामने आया मामला?
मीडिया ने इस मामले को एक अनाम व्हिसल ब्लोअर की शिकायत के बाद उजागर किया। व्हिसल ब्लोअर ने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को लिखे पत्र में कोचर के कथित अनुचित व्यवहार और हितों के टकराव के बारे में लिखा था। बैंक ने शुरुआत में कोचर के ख़िलाफ़ मामले को आनन-फानन में रफा-दफ़ा करने की कोशिश की, लेकिन बाद में लोगों और नियामक के लगातार दबाव के चलते पूरे मामले की जांच के आदेश देने पड़े। आईसीआईसीआई बैंक ने स्वतंत्र जांच कराने का फ़ैसला लिया। बैंक ने 30 मई को घोषणा की थी कि बोर्ड व्हिसल ब्लोअर के आरोपों की ‘विस्तृत जांच’ करेगा।फिर इस मामले की स्वतंत्र जांच की ज़िम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. एन. श्रीकृष्णा को सौंपी गई। सीबीआई, ईडी और एसएफ़आईओ भी इसकी जांच कर रही हैं।

लेखक जेपी सिंह इलाहाबाद के वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं.

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