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हे टीवी मीडिया के महंतों, अब बताओ साहित्य कौन देख रहा है जो प्राइम टाइम में ताने हुए हो

Vineet Kumar : मुझे फिलहाल मीडिया के उन सारे महंतों का चेहरा याद आ रहा है जो उपहास उड़ाते हुए पूछते थे- अब कौन पढ़ता है साहित्य, कौन देखेगा साहित्य की खबर? अभी कौन देख रहा है जनाब जो प्राइम टाइम में ताने हुए हो..सीधे पैनल डिस्कशन पर उतरने से पहले दो मिनट की पैकेज तो लगा दो..पता तो चले काशीनाथ सिंह कौन हैं, मुन्नवर राणा कौन है, उदय प्रकाश किस पेशे से आते हैं?

Vineet Kumar : मुझे फिलहाल मीडिया के उन सारे महंतों का चेहरा याद आ रहा है जो उपहास उड़ाते हुए पूछते थे- अब कौन पढ़ता है साहित्य, कौन देखेगा साहित्य की खबर? अभी कौन देख रहा है जनाब जो प्राइम टाइम में ताने हुए हो..सीधे पैनल डिस्कशन पर उतरने से पहले दो मिनट की पैकेज तो लगा दो..पता तो चले काशीनाथ सिंह कौन हैं, मुन्नवर राणा कौन है, उदय प्रकाश किस पेशे से आते हैं?

टीवी के दर्शक वेवकूफ नहीं थे..तुमने स्ट्रैटजी के तहत साहित्य से, कला से, देश की संस्कृति से काटकर उसे डफर बनाने की कोशिश की..तब भी नाकाम ही रहे. जो कभी न्यूजरूम में पूछा करते थे- अमृता प्रीतम गायिका है, वो साहित्यकारों पर तनातनी कर रहे हैं. साहित्य अकादमी में सरकार के दावे और छवि का तो जो हो रहा है, वो है ही..पोर-पोर कलई खुल रही है कि चैनलों के महंत कितने पढ़े-लिखे हैं?

युवा मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार के फेसबुक वॉल से.

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