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छत्तीसगढ़

नईदुनिया के पत्रकार मृगेन्द्र सिंह और नवभारत के पत्रकार दानिश अनवर के खिलाफ एफआईआर दर्ज

रायपुर : पत्रकार विवाद मामले में राजधानी के खम्हारडीह थाना ने अंतत: पीड़ित पक्ष की ओर से एफआईआर दर्ज कर ली. मुख्य आरोपियों में नईदुनिया के पत्रकार मृगेन्द्र पाण्डेय तथा नवभारत के पत्रकार दानिश अनवर शामिल हैं. मृगेन्द्र के परिजनों को भी आरोपी बनाया गया है. इनके खिलाफ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 294, 323, 324,506,341 और 147 के तहत जुर्म पंजीबद्ध किया गाय है. पुलिस ने जांच शुरू कर दी है.

जानते चलें कि पखवाड़ा भर पहले ढेबर स्टील सिटी, गायत्रीनगर में निवासरत दैनिक आज की जनधारा के मार्केंटिंग मैनेजर मुकेश सिंह के साथ, पत्रकार मृगेन्द्र पाण्डेय तथा पत्रकार दानिश अनवर और उनके परिजनों ने वाद विवाद करते हुए मारपीट की थी जिससे मुकेश सिंह को गंभीर चोटें आई थीं. उनका एक पैर भी फ्रेक्चर हो गया था. इसके अलावा उनके भांजे को घेरकर मारा गया था जिससे उसका हाथ टूट गया था.

पीड़ित मुकेश सिंह द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के मुताबिक मुकेश सिंह विगत 29 जून की रात को जब अपनी कार लेकर कॉलोनी में घुसे तो गेट पर ढेर सारी गिटटी गिरी थी. वहीं पर एक स्कूटर भी खड़ा था जिससे मैं कार अंदर नही ले जा पा रहा था. मैंने कार में ही बैठे बैठे हार्न बजाया तो गुस्से में मृगेन्द्र और दानिश बाहर आए और उन्होंने गाली गलौच करते हुए कार से खींचकर मुझे मारा. मेरा चश्मा और घडी, मोबाइल भी तोड़ दिया. मैंने भी थोड़ा सा विरोध किया लेकिन चोटिल होकर घर पहुंचा तो मेरे चेहरे से खून निकल रहा था. यह देखकर पत्नी घबरा गई लेकिन पड़ोसियों से विवाद ठीक नही है, यह सोचकर मैं बातचीत के लिए मृगेन्द्र के घर गया लेकिन वे नही माने. इसके बाद मैंने सिविल लाइंस थाने में टीआई मिश्राजी को फोन किया जिन्होंने कुछ पुलिसकर्मी भेजे. जिनके साथ हम सिविल लाइंस थाने आ गए. यहां मैंने पुलिस को ब्यौरा जरूर दिया मगर एफआईआर लिखाने से इंकार कर दिया क्योंकि कॉलोनी का मामला था इसलिए विवाद आगे बढ़ाना उचित नही समझा. उसके बाद हम घर आ गए.

इसके बाद हम मृगेन्द्र के घर पुन: गए और उनकी माताजी से बात करने लगे. उन्होंने हमें धमकाया कि 10 मिनट रूको, फिर बताते हैं. तभी अचानक दानिश और मृगेन्द्र, अपने 30—40 साथियों के साथ कॉलोनी में घुसे तथा मुकेश सिंह और उनके परिजनों के साथ जमकर मारपीट की. एफआईआर के मुताबिक सभी हमलावर हथियारों से लैस थे जिसमें क्रिकेट बेट, साइकिल चेन, लकड़ी और पत्थर शामिल थे. इसके बाद सभी ने मुकेश सिंह, उनके भांजे, उनकी पत्नी, बहन और जीजा को घेरकर मारा. सभी को गहरी चोटें आईं. इसके सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस ने हासिल किए हैं. कॉलोनी के लोगों ने भी इस गुण्डागर्दी की लिखित शिकायत की थी साथ ही डॉक्टरी रिपोर्ट को आधार बनाते हुए पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है.

मुकेश सिंह ने आगे बताया कि मारपीट करने के बाद इन सभी ने मिलकर कॉलोनी के मेन गेट को बंद करके ताला लगा दिया और खुद ही रिपोर्ट दर्ज कराने खम्हारडीह थाना पहुंच गए. पुलिस ने राजनीतिक दबाव में आकर मुकेश सिंह और उनके परिजनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली. पीड़ित पक्षकार मुकेश ने बताया कि जब दूसरे दिन सुबह हमें थाना बुलाया गया तो मैंने पुलिस को सारी सच्चाई बताई तथा लिखित शिकायत भी दर्ज कराई मगर एफआईआर नही की गई. इस दौरान भी मैंने पुलिस से कहा कि मैं मामले को आगे नही बढ़ाना चाहता तथा यहीं पर समझौता कर लिया जाए मगर हमलावर पक्ष इसके लिए तैयार नही हुए बल्कि् वे मुझे और परिजनों को थाने में ही धमकाते रहे.

इसके बाद मुकेश सिंह और उनके तीन परिजनों को न्यायालय में पेश किया गया जहां से उन्हें जमानत मिल गई. लेकिन डॉक्टरी मुलाहजा में पता चला कि मुकेश को सांघातिक चोटें आई हैं. उनका पैर टूटा है साथ ही उनके भांजे का हाथ भी टूट गया था. इसलिए दोनों का मेकाहारा में इलाज भी चलता रहा.

दुर्भाग्य है कि मुख्य हमलावरों को सहानुभूति इसलिए मिल गई क्योंकि उन्होंने सोशल मीडिया में सक्रिय होने के कारण उन्होंने अपनी हलकी चोट वाली कुछ फोटो वायरल कर दी. इसके बाद इस मामले में राजनीतिक आरोप—प्रत्यारोप हुए, सत्ता पक्ष के कुछ नेता हमलावरों के पक्ष में थाने पहुंच गए जिससे उन्हें उच्छृंखल होने का बल मिला. और हमलावरों के पक्ष में सहानुभूति उमड़ी. पुलिस ने भी ऐसे ही दबाव में आकर एफआईआर दर्ज की.

पीड़ित मुकेश सिंह ने एसपी अजय यादव का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने इस पूरे मामले को सुना और न्याय करते हुए एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए. इसे कहते हैं भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं. मुकेश सिंह और उनके परिजनों को अब आरोपियों की तत्काल गिरफतारी की मांग की है.

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