रांची से प्रकाशित ‘खबर मंत्र’ अख़बार इसी महीने एक साल का हुआ है. जिलों में कार्यरत अधिकतर पत्रकारों को वेतन मिले भी साल गुजर गया. प्रबंधन वेतन तो दे नहीं रहा, ऊपर से अधिक से अधिक विज्ञापन लाने के लिए रोज-रोज का दबाव अलग से. बोकारो ब्यूरो से खबर है कि अखबार के साथ शुरुआत से बतौर ब्यूरो हेड जुड़े बसंत मधुकर ने भी खबर मंत्र को इस हफ्ते अलविदा कह दिया. वेतन नहीं मिलने से परेशान मनीषा, शैलेश, राजकुमार और रंजीत पहले ही बोकारो ब्यूरो छोड़ चुके हैं. महेंद्र आजकल के मेहमान हैं. जो अन्य बचे हैं उनकी अपनी अपनी मजबूरियां या स्वार्थ हैं.
आपको भी कुछ कहना-बताना है? हां… तो [email protected] पर मेल करें.
In this article:
5 Comments
5 Comments
Leave a Reply
Cancel reply
Leave a Reply
भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team
भड़ास मेल: [email protected]
Latest 100 भड़ास
- भारत में ऑनलाइन सेंसरशिप तेज, RSF की रिपोर्ट में पत्रकारों के कंटेंट पर बढ़ती पाबंदियों का खुलासा
- एमपी के सीएम मोहन यादव का पीआर कर रही है डेढ़ साल पहले आई ये वेबसाइट!
- युवा खेल पत्रकार अश्विन मिश्रा की नई पारी, खेल मंत्रालय के तहत ‘भारतीय खेल प्राधिकरण’ (SAI) में संभाली कमान
- विभाजन के अनसुलझे जख्मों पर फिर चर्चा : विवेक शुक्ला की पुस्तक ‘1947 : विभाजन के शेष सवाल’ पर आईजीएनसीए में विचारोत्तेजक परिचर्चा
- इंडिया टुडे ग्रुप ने लॉन्च किया वर्टिकल माइक्रोड्रामा प्लेटफॉर्म ‘लाइफ तक’
- 15 साल की पत्रकारिता के बाद प्रिया चौहान की नई पारी, इस कंपनी में बनीं मैनेजर और प्रवक्ता!
- खोजी पत्रकारिता संस्था ‘द रिपोर्टर्स कलेक्टिव’ का खुलासा- यूपी में SIR में चुनाव आयोग के सॉफ़्टवेयर ने खुद बना डाले 85,854 वोटर-डिलीशन फ़ॉर्म!
- सैटेलाइट न्यूज़ चैनल ज़्यादा दिन के मेहमान नहीं हैं, सिर्फ़ सात महीने में विज्ञापन में 7% की गिरावट, पतंजलि ग्रुप दूसरा सबसे बड़ा विज्ञापनदाता!
- प्राइम फोकस के दफ्तरों में आयकर विभाग की तलाशी, शेयर 9.51% तक गिरा
- आदर्श प्रताप सिंह ने एबीपी नेटवर्क को कहा अलविदा, करीब चार साल बाद छोड़ी नौकरी
- ‘माध्यमम’ में आठ महीने से वेतन नहीं, 200 पुराने कर्मचारी सड़क पर, प्रबंधन बोला- कॉन्ट्रैक्ट पर लौटो
- यूट्यूब वालों ने पत्रकारिता का मान बचाया है, मेनस्ट्रीम मीडिया वाले तो इस चौथे स्तंभ को गिराने में ही लगे हैं…
- You are not welcome, Elon! : इस मामले में मैं भारत सरकार के साथ हूं, मस्क ने अपने स्टारलिंक के जरिए कई देशों में आग लगाई है!
- छत्तीसगढ़ के IPS संतोष सिंह ने संभाली दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा की कमान!
- अमेरिका ने भारतीय IT कंपनियों पर कसा शिकंजा, इधर मस्क-राहुल की जुगलबंदी
- भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने वाले एलन मस्क के स्वागत में राहुल गांधी ने इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई?
- लखीमपुर खीरी जिले के NEWS18 के रिपोर्टर मनोज शर्मा ने 18 वर्ष काम करने के बाद दिया इस्तीफा, यह है उनका इस्तीफानामा
- विशाल अमन ने लगाई लंबी छलांग, ‘सच बेधड़क’ ग्रुप में बने ‘बिजनेस हेड-गवर्नमेंट’
- प्रिय कमलेश सिंह, आपने आत्ममुग्धता में काफी झूठ बोला है, जो अक्सर आप करते रहते हैं!
- ख़ुद की लापरवाही के शिकार हो गए नाना पाटेकर!
- मोदी पर ट्वीट के कारण गौरव पांधी को उठा ले गई दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल!
- आज भी बड़ी गिरावट : ऐतिहासिक क्रैश के दौर में शेयर बाजार!
- आंदोलन में शामिल होने ध्रुव राठी भारत आए!
- आंदोलन कुचलने की पूरी तैयारी है, दस अक्टूबर को कहीं आर-पार न हो जाए!
- पत्रकार गजेंद्र सिंह का आरोप : पार्लियामेंट स्ट्रीट से डिटेन, FIR, तिहाड़ भेजा, इंस्टाग्राम बंद… अब बस मेरी जान रह गई है, वो भी ले लीजिए!
- NMC के नए नियम : डॉक्टर-अस्पताल सोशल मीडिया पर मरीज लाने का प्रचार नहीं कर सकेंगे, AI टेस्टिमोनियल और ‘गारंटीड इलाज’ पर रोक
- राजनीति करवट बदल रही है, लोकतंत्र हिल गया था, लोकतंत्र झूल गया है, संघर्ष पनपेगा, अब नहीं तो कब?
- 99.97% हेयरकट वाले विवाद के बीच नया मोड़ : एस्सेल कंपनियों ने LIC हाउसिंग को पूरा मूलधन चुकाने का प्रस्ताव दिया
- फिलहाल 919 निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों के साथ भारत दुनिया के सबसे बड़े टीवी बाजारों में से एक बना हुआ है!
- करीब एक साल बाद प्रेस काउंसिल को मिले 13 पत्रकार सदस्य, केंद्र ने छह संपादकों और सात कार्यरत पत्रकारों के नाम अधिसूचित किए
- प्रदर्शन कवर करने पहुंचे प्रेस फोटोग्राफर की जान पर बनी: पुलिस की बस की छत पर फंसे पत्रकार, तेज रफ्तार बस में पेड़ों की डालियों से बचते रहे
- दिल्ली पुलिस तो अब पार्टी बन गई, 10 अक्टूबर के CJP के आंदोलन में नागरिकों से शामिल न होने की अपील कर दी!
- बीबीसी के पत्रकार दिलनवाज पाशा के साथ दिल्ली पुलिस ने की बदतमीजी!
- एलन मस्क ने आरोप लगाया है कि कुछ प्रभावशाली भारतीय कारोबारी स्टारलिंक की भारत में एंट्री रोक रहे हैं!
- समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद धनराज नाथवानी का ‘मोदी भक्ति’ वाला ट्वीट और वीडियो चर्चा में!
- स्वरा भास्कर के आरोपों के बाद फिल्म क्रिटिक केआरके ने लिया अविनाश दास का नाम! देखें वीडियो
- हे दिल्ली पुलिस, आप सेंसर बोर्ड वाला काम क्यों नहीं संभाल लेते?
- सनसनीबाज डिजिटल पत्रकारिता : प्रेमानंद को लेकर शुभांकर मिश्रा के ‘आश्रम 2.0’ वाले बयान पर बवाल, पुतले फूंके गए
- एसपी डॉ इरज़ राजा से मिलकर उस महिला ने कहा- मुझे पति को छोड़कर पड़ोसी के साथ रहना है!
- उन 8 बच्चों में से 5 डॉक्टर बन गए… लेकिन अब जो हालत है उसमें कमजोर तबके का कोई बच्चा डॉक्टर बनने का सपना नहीं देख सकता!
- इंडिया टीवी से रिजाइन करने वाली पत्रकार इला काज़मी का खुलासा- एक चैनल मुसलमान रिपोर्टर्स को इसलिए हायर करता है ताकि सारे मुसलमानों को विलेन बनाया जा सके!
- आज के अखबार : एकनाथ शिन्दे के पूरे पन्ने के विज्ञापन पर महेश जेठमलानी बोलेंगे? गोदी वाले खबर करेंगे?
- राज्यसभा के लिये तीसरा प्रत्याशी न उतार अखिलेश ने दिया बड़ा सियासी संदेश
- दैनिक जागरण धनबाद में गुटबाजी के आरोप, अखबार की गुणवत्ता और प्रसार पर उठे सवाल
- अमर उजाला लखनऊ के अशोक मिश्रा ने ब्रेक की बड़ी खबर, अवैध खनन करने वाली उमाशंकर सिंह की कंपनियों को देना होगा 400 करोड़ का आयकर!
- रुबिका के पास नौकरी की कमी नहीं है, नेटवर्क18 ग्रुप ने फिर गले लगाया, मिली डबल जिम्मेदारी!
- “सम्भोग के वक्त मैं तुम्हारे नीचे नहीं रहूँगी क्योंकि परमेश्वर ने हम दोनों को बराबर बनाया है”
- नौकरी दिलाने के नाम पर 4.97 लाख रुपये लेने का आरोप, दैनिक भास्कर डिजिटल के रिपोर्टर के खिलाफ FIR
- यूपी ग्रामीण बैंक के कंप्यूटर खरीद टेंडर में भारी भ्रष्टाचार : भारतीय OEMs बाहर, विदेशी TCO सर्टिफिकेशन अनिवार्य!
- इंडिया टीवी की महिला रिपोर्टर का आरोप- गाइडेंस माँगने पर पीयूष पद्माकर ने की बेइज्जती, शिकायत के बाद कैमरा यूनिट बंद, फिर इस्तीफा
- भारत में एआई : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर में गौतम अडानी का डेटा सेंटर कारोबार दिलचस्प है, भारती एयरटेल समेत रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाटा ग्रुप भी मैदान में!
- वर्तमान युग के मनुष्य का कलुष नामजप से कट सकेगा, इसमें मुझको संशय है!
- मुरादाबाद में Public App पर दो रिपोर्टरों को अचानक हटाने का आरोप, वेतन रोकने की भी शिकायत
- टीवी9 के पत्रकार के आवास/कार्यालय को चोरों ने बनाया निशाना, नगदी व जेवरात ले उड़े!
- दिल्ली पुलिस की गाइडलाइन पर पत्रकारों की एक सुर में प्रतिक्रिया: “पहले अपना नेम टैग लगाओ”
- रवीश कुमार ने PIB कार्ड वाली बहस पर कहा- “बस एक कानून बाकी है कि भारत में आप पत्रकारिता नहीं कर सकते”
- अगर ‘राधा-राधा’ नाम जपने से अकाल मृत्यु नहीं होती, तो फिर प्रेमानंद के शिष्य रसिक दुलारी का इतना दुखद अंत कैसे हुआ?
- महिला पत्रकार से बदसलूकी के आरोपों के बीच विवेक भगत को एडिशनल DCP का चार्ज, विवाद बढ़ा तो सरकार ने आदेश बदला
- आशू मिश्रा ने जनसत्ता अख़बार के साथ शुरू की नई पारी!
- क्या दिल्ली पुलिस सिखाएगी कैसे पत्रकारिता करें? प्रोटेस्ट कवरेज पर जारी गाइडलाइन पर बवाल
- टीवी न्यूज़ की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल: एडिटर्स गिल्ड की स्टडी में प्रिंट और स्वतंत्र डिजिटल मीडिया ने छोड़ा पीछे
- द हिन्दू का हिंदी प्रयोग: भाषा बदली, पत्रकारिता का मिजाज नहीं, बिना शोर-शराबे के हिंदी दर्शकों तक यूट्यूब के ज़रिए पहुंच रहा अंग्रेजी अखबार!
- मीडिया में नौकरी की तलाश कर रहे हैं तो देखें ये मौके: News24 में आउटपुट प्रोड्यूसर से लेकर दूरदर्शन में 9 कैटेगरी के असाइनमेंट
- अमेज़ सॉल्यूशंस के 11 साल की कामयाबी का मना जश्न, चमके कंपनी के सितारे
- अमर भारती मीडिया ग्रुप में पत्रकारों समेत विभिन्न पदों पर नियुक्तियां, अनुभवी अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित
- इंटरनेट के बिना मोबाइल पर Live TV चलेगा, D2M की व्यावसायिक लॉन्चिंग की तैयारी, 19 से ज्यादा शहरों में हो चुके ट्रायल!
- तीन महिला पत्रकारों से छेड़छाड़ मामले में रात भर चले आंदोलन के बाद दिल्ली पुलिस को झुकना पड़ा, शिकायत दर्ज कर क्राइम ब्रांच को भेजा गया!
- कैंसर पीड़ित पत्रकार महेश शिवहरे नहीं रहे!
- नवभारत टाइम्स में काम कर चुके डॉ. अंकुश त्रिपाठी भी भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता बनाये गए!
- वरिष्ठ पत्रकार महेंद्र मिश्र भी दिल्ली पुलिस के दुर्व्यवहार के हुए शिकार!
- बीस हजार में 85 दिन, छह स्लॉट : उत्तराखंड में सरकार की पालिसी से पोर्टल वाले दुखी!
- जंतर-मंतर पर पत्रकारों से बदसलूकी पर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया सख्त, महिला पत्रकार से छेड़छाड़ की शिकायत पर कार्रवाई की मांग
- भयावह युद्ध की आशंका : अगर रूसी सैटेलाइट निशाना बनेंगे तो इलोन मस्क के सैटेलाइट थोक के भाव में टपकते नज़र आयेंगे!
- वरिष्ठ पत्रकार देवप्रिय अवस्थी को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड!
- ‘बस्तर उत्सव’ में बड़े घोटाले की खबर ‘दैनिक भास्कर’ ने ब्रेक की!
- पत्रकार रोज़ी का एसीपी विवेक भगत पर छाती दबाने और पत्रकार आफ़रीन खान का CRPF जवान पर हिप टच करने का आरोप!
- सत्ता के पक्ष में बैटिंग करने वाले पत्रकारों में उमेश चतुर्वेदी भी शामिल!
- दिल्ली पुलिस की रणनीति : महिला पत्रकारों को छेड़ो और सोशल मीडिया इंफ़्लुएंसर्स से पीआईबी कार्ड मांगो!
- कांग्रेस वाले सीजेपी आंदोलन को लेकर कंफ्यूज़ हैं कि हाथ लगाएं या रहने दें!
- हल्द्वानी के वरिष्ठ पत्रकार योगेश भट्ट ने Nation 27 में शुरू की नई पारी
- मीडिया कारोबार में बड़ा बदलाव: प्रिंट पर दबाव, डिजिटल का उभार, TV चैनलों के लाइसेंस सरेंडर
- मोदी-शाह का ‘आतंक’ खत्म करने के लिए याद किए जाएंगे ‘कॉकरोच’!
- प्रदर्शन की ख़बर को ‘इंडियन एक्सप्रेस’ द्वारा पहले पन्ने से लगभग विलुप्त कर देना उसके ‘साहसिक कौशल’ का प्रमाण है!
- ‘चाय बेची तो किसने कहा था?’ मोदी पर अभिजीत दिपके का सीधा वार, बोले- “हमारे पैसों से दुनिया घूम रहे हैं”
- वरिष्ठ पत्रकारों की आंखों देखी… कैसे लगा लंबे वीकेंड पर नैनीताल से मसूरी तक सैलानियों का सैलाब?
- Gyanesh Kumar: क्या पुलिस वाले महिला पत्रकारों की छाती पर हाथ मार रहे हैं? राहुल गांधी और नेहा वोरा फायर हैं!
- Pyre Movie: वरिष्ठ फिल्म क्रिटिक पंकज शुक्ल को भी पसंद आ गई विनोद कापड़ी की फिल्म ‘पायर’
- LIC के हजारों करोड़ के निवेश पर CBI की FIR, Reliance Capital और अनिल अंबानी जांच के घेरे में!
- स्वरा भास्कर को भांति-भांति तरीके से छेड़ने वाला वह फिल्म डायरेक्टर कौन था?
- टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज़ देखने कौन आता है? प्रसार भारती CEO गौरव द्विवेदी ने बदलते न्यूज़ कारोबार का खोल दिया राज
- अखबार छापो तो 5% टैक्स, खबर डिजिटल करो तो Google-Meta ले जाएं विज्ञापन का बड़ा हिस्सा!
- Hindustan Times में बड़ा संपादकीय बदलाव: Sukumar Ranganathan की विदाई, Kunal Pradhan ने संभाली कमान
- मीडिया कंपनियों के शेयरों में लगातार बिकवाली, Nifty Media 2.33% लुढ़का; ZEEL एक महीने में 23% नीचे, Network18 52% टूटा
- 18 साल बाद बिजनेस अखबारों की नई एंट्री, प्रिंट संकट के बीच दक्षिण भारत से तीन नए बिजनेस डेली की दस्तक
- वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज की सारी मार्केटिंग ध्वस्त!
- साबरमती का संत और किंग्सवे हॉल का डांस!
- कोरोनाकाल में दिवंगत पत्रकारों को नोएडा मीडिया क्लब ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि, स्मृतिवन में गूंजे स्मृतियों के स्वर
- कम्पिल में जुटे सैकड़ों पत्रकार, निष्पक्ष एवं जनहितकारी पत्रकारिता पर हुआ मंथन
- पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने ज्ञानेश कुमार के अपराध का किया खुलासा, रवीश कुमार बोले- ‘बापू के बड्डे के दिन डाकू की चर्चा’
- फिल्म ‘कवन कसूर’: बिना शोर-शराबे के गाजीपुर की मिट्टी में एक बार फिर भोजपुरी सिनेमा को मिला नया ताना-बाना


Kumar Rishabh
August 6, 2014 at 3:56 am
गीतेष्वर के गीत गाते नहीं थक रहे बसंत मधुकर
………………………………………………………………………………..
बोकारो हिन्दुस्तान को जरूरत के वक्त छोड़ कर खबर मंत्र ज्वाइन करने वाले पत्रकार बसंत मधुकर को इन दिनों काम की तलाष है। हमेषा से लाॅवी में काम करने और अपने जरूरत के अनुरूप वरिय अधिकारियों के बीच गहरी पैठ की दुहाई देने वाले मधुकर फिलहाल हिन्दुस्तान धनबाद संस्करण के स्थानीय संपादक को फेसबुक फ्रैरेंड बताते नहीं थकते और गीतेष्वर के गीत गाते नजर आ रहे हैं। हिन्दुस्तान छोड़ कर जाने के बाद खबर मंत्र के वरिय पदाधिकारियों के साथ अभद्र व्यवहार के कारण उनकी सेवा समाप्त कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार बड़बोलापन के कारण हमेषा से चर्चा में रहने वाले बसंत गीतेष्वर और दिनेष को अपने घर की खेती बताते है और हिन्दुस्तान में वापसी की जुगत में रात दिन लगे हुए हैं।
काना फुसी…………….।
Siddarth Gautam
August 6, 2014 at 6:09 pm
[quote name=”Kumar Rishabh”]गीतेष्वर के गीत गाते नहीं थक रहे बसंत मधुकर
………………………………………………………………………………..
श्रीमान कुमार ऋषभ जी,
सबसे पहले तो आपके ज्ञान-चक्षु का धुंधलापन दूर करना चाहूंगा. कि, बसंत मधुकर किसी रेडियो प्रोग्राम में तो कभी गीतेश्वर के गीत गाये नहीं होंगे. और न ही आप की तरह बिना दीदा वाले व्यक्ति के आगे ही गिड़गिड़ाए होंगे. रही बात (आपको जिससे मिर्ची लगा सा प्रतीत होता है) उनके हिंदुस्तान की जरूरत के वक्त बोकारो ब्यूरो छोड़कर खबर मंत्र में जाने की, तो अपने करियर की बेहतरी के लिए हर कोई अपना भला-बुरा सोचता है. शायद आपकी तरह का कोई इम्मोशनल फूल ही ऐसा न करे! ज़ाहिर है, उन्होंने खबर मंत्र छोड़ दिया है तो उन्हें काम की तलाश होगी ही. इसमें आप नया क्या बता रहे हैं? अगर वे हिंदुस्तान में वापसी का प्रयास भी कर रहे होंगे, तो इसमें गलत या अस्वाभाविक क्या है? वैसे आपकी जानकारी का संवर्द्धन कर दूँ, हिंदुस्तान उन्होंने शौक से या किसी लालच में नहीं छोड़ा था. राम प्रवेश के बात-बात पर अड़ंगेबाजी करने की आदत से परेशान होकर मधुकर ने हिंदुस्तान छोड़ा था. लेकिन कहावत है ना- नेपाल जाओ, कपाल साथ जाता है! मधुकर के साथ भी वही हुआ. राम प्रवेश हिंदुस्तान से निकाल दिए गए और साल भर झक मारने के बाद हरि-पशुपति को तेल लगाकर खबर मंत्र से जुड़ गए. राम प्रवेश यहाँ भी अपनी आदत से बाज नहीं आये और चापलूसी-चुगलखोरी की अपनी नायाब काबिलियत से सबको सताने लगे. अगर सैलरी टाइम से मिल रही होती, तो कोई बर्दाश्त भी कर लेता. लेकिन यहाँ तो टका झां…. नहीं, कथा रात भर वाली कहानी है. कोई कब तक सहन कर पता? सो मधुकर ने खबर मंत्र को अलविदा कह दिया. मधुकर से पहले भी चार लोग बोकारो ब्यूरो छोड़कर जा चुके थे. उन चारों को आज तक उनकी बकाया सैलरी नहीं मिली है. रही बात हिंदुस्तान धनबाद के रेजिडेंट एडिटर या तथाकथित दिनेश के फेसबुक फ्रेंड होने की दुहाई देने की, तो पहली बात तो यही है कि उनके फेसबुक फ्रेंड्स लिस्ट में दोनों ही नहीं हैं. दूसरी बात, अगर उनके साथ मधुकर का कोई परिचय हो भी, तो इसमें आश्चर्यजनक या अस्वाभाविक बात क्या है? आपके चश्मे से अगर मधुकर को बड़बोला भी मान लें, तो बिना पूर्वाग्रह के आपको जलन क्यों हो रहा है? ना तो मुझे आपको सफाई देनी है और ना ही मैं बसंत मधुकर का वकील हूँ, लेकिन जिस प्रकार आपने उनपर खबर मंत्र के वरीय पदाधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार करने का आधारहीन आरोप लगाया है, उससे आपका पूर्वाग्रह और मानसिक दिवालियापन ही परिलक्षित होता है. किसी भी व्यक्ति पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से पहले अपने आरोपों पर ग़ौर करना तो बनता है…!
Kunal singh
August 6, 2014 at 6:37 pm
“झटका सिंह” टाइप पत्रकार ही रहेंगे खबर मंत्र में….!
खबर मंत्र में सिर्फ वैसे ही लोग बच गए हैं जो या तो पत्रकारिता के नाम पर नेतागिरी, नेताओं की चमचागिरी, थानों की दलाली, ठेका-दलाली, ट्रांसफर-पोस्टिंग दलाली, अवैध वसूली तथा एलआईसी पालिसी आदि बेचने का काम करते हैं या फिर अपने-अपने शहरों में बहिस्कृत पत्रकारों की श्रेणी में शामिल हैं. कहीं-कहीं अपवाद के रूप में एकाध अच्छे लोग निजी मजबूरी के चलते जरूर अभी तक जुड़े हुए हैं, लेकिन ये जुड़ाव नाम मात्र का है. किसी भी वक्त ये लोग खबर मंत्र के पिछवाड़े लात जमा सकते हैं. प्रबंधन भी इस बात को समझ रहा है, इसीलिए अख़बार के कार्यालय खोलने-बंद करने के लिए “पत्रकार” कहलाने के इच्छुक फ्रेशर लड़कों को अवैतनिक कॉन्ट्रैक्ट पर रखा जा रहा है. वो फोटोग्राफी भी सीख रहे हैं. मुख्यालय में भी ट्रेनिंग के नाम पर फ्रेशर्स से फ्री में डेस्क का काम कराये जाने की सूचना है.
बोकारो की पत्रकारिता में “झटका सिंह” के नाम से कुख्यात राम प्रवेश के खबर मंत्र से जुड़ने के बाद से ही दीपक ने कार्यालय आना छोड़ा हुआ है. राम प्रवेश का मुख्य पेशा अपनी पत्नी के नाम पर एलआईसी पालिसी बेचना है, जिसे पत्रकारिता में रह कर वे बेहतर ढंग से करते हैं. जिसने पालिसी दे दी उसकी पॉजिटिव ख़बर, यानी आगामी विधान सभा में टिकट/जीत पक्की, वरना संशय व्यक्त करने का विशेषाधिकार तो उनके पास है ही!
दरअसल, खबर मंत्र को ऐसे ही पत्रकार चाहिए जो वेतन न मांगें, दलाली करके ही अपना काम चला लें. यही कारण है कि अच्छे लोग एक-एक कर खबर मंत्र छोड़कर जाते रहे. आज स्थिति ये है कि यदि विश्वजीत झा अपना भला-बुरा सोचने में समर्थ हो जाएं, तो बोकारो ब्यूरो में ताला लग जायेगा. खबर मंत्र के स्टेट विज्ञापन प्रमुख पशुपति सिंह के खास सिपहसालार होने का मुगालता पाले रखने वाले बोकारो ब्यूरो के विज्ञापन प्रतिनिधि सुनील कुमार पांडे का भी मोहभंग हुआ है. सुनील अपनी बेटी के एडमिशन के लिए अपनी बकाया सैलरी में से ही बीस हज़ार रुपयों के लिए रिरिया रहे थे, लेकिन उन्हें भी टका सा जवाब मिल गया. अगर उनमें थोड़ा सा भी स्वाभिमान बचा होगा, तो बाहर का ही रास्ता देखेंगे. हाँ, बोकारो के सर्कुलेशन प्रतिनिधि रोशन जमील के दुसरे अख़बार में नौकरी मिलने तक खबर मंत्र से जुड़े रहने की सम्भावना है, लेकिन वे भी दिलो-जान से छुटकारा पाने के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं.
खबर मंत्र के आकाओं ने शुरू से ही ख़बरों पर विज्ञापन को तरजीह दी. उन्होंने कभी ये समझने की कोशिश नहीं की, कि अच्छे अख़बार का मतलब तथ्यपरक अच्छी ख़बरों वाला अख़बार होता है. अख़बार अच्छा होने तथा सर्कुलेशन भी ठीक-ठाक होने पर ही विज्ञापन की निरंतरता बनी रहती है. लेकिन लोगों ने ब्यूरो प्रमुखों या संवाददाताओं से ख़बरों पर कभी कोई बात नहीं की. अभी भी नहीं करते. बस सुबह-सुबह एक-एक स्टाफ को सीधे संपादक का फ़ोन– आज कितना भेज रहे हो? गोया पत्रकार से नहीं, वसूली एजेंट से बतिया रहे हों! अख़बार कायदे का हो तो विज्ञापन सहूलियत से मिल जाता है. लेकिन, भले ही इसके संपादक/मालिक-मुख्त्यार खबर मंत्र को झारखण्ड का जनसत्ता और हिंदुस्तान दोनों ही समझ रहे हों, हक़ीक़त में सौ-डेढ़ सौ सर्कुलेशन वाले कचरा अख़बार को रोज-रोज विज्ञापन कौन दे और क्यों दे? अब पत्रकारों ने शुरू-शुरू में तो अपने निजी संबंधों के आधार पर खूब विज्ञापन उठाये भी, लेकिन काठ की हांडी आखिर कब तक चढ़े? उस पर भी, पत्रकार भूखे-पेट कब तक खबर मंत्र नाम का जाप करते? नतीजतन राज्य के सभी जिलों के ब्यूरो एक-एक करके पत्रकारों के छोड़ कर जाने से लगभग खाली हो गए हैं. हालत ये है कि खबर मंत्र के साथ अब कोई भी पत्रकार जुड़ना नहीं चाह रहा.
निचोड़ ये है कि खबर मंत्र ने बहुतों की लुटिया डुबोई है, अब लुटिया डूबने की खुद खबर मंत्र की बारी है.
shahwaz ansari
September 3, 2014 at 11:49 am
वीणा के झंकार से डोल रहा है खबरमंत्र, बिल्डर का ता -ता -थैया
रांची के एक मीडिया हाउस से जो खबर आ रही है , वह हैरान करनेवाली है। सूचना है कि अख़बार खबरमंत्र इनदिनों वीणा के झंकार पर डोल रहा है। सूचना है कि अख़बार खबरमंत्र इनदिनों वीणा के झंकार पर डोल रहा है।आज खबर मन्त्र के सीनियर संपादक से लेकर पत्रकार तक वीणा सिंह के तानाशाही और उदंड व्यवहार से आहात महसूस कर रहे है जहा उनके आत्म-सम्मान और वौद्धिकता के वीणा सिंह अपनी जूती की नोक से तार -तार कर दिया है.मार्केटिंग हेड और सर्कुलेशन हेड को तो चपरासी की तरह ट्रीट करती है. अख़बार के प्रिंटर-पब्लिशर ही जब ता -ता -थैया करने लगे तो बेचारे संपादक, उपसम्पादक और अन्य की मजबूरी समझी जा सकती है।
लेकिन ऐसी परिस्थिति भी आयेगी यह किसी ने सोचा था। यह अख़बार शुरू होने के बाद से ही झटके पर झटके इसे मिल रहें हैं। खबरमंत्र के मालिक बिल्डर डॉ अभय सिंह ने बोकारो की बीना सिंह को फिलहाल इस अख़बार का एक तरह से मालकिन बना दिया है। उस बीणा सिंह को , जो बोकारो में सुर -संगम इवेंट चलाया करती थी। दूर -दूर तक न पत्रकारिता का अनुभव और ना समाचार की परख पर बिल्डर ने कहने के लिये तो उन्हें डायरेक्टर बनाया है पर रूतबा उससे ऊपर का दे रखा है।
वें समाचार और विज्ञापन के साथ -साथ कंपनी का हित भी देखेंगी। इसी में अख़बार से अखिलेश सिंह को बाहर का रास्ता दिखाकर उनके दफ़्तर में मैडमजी को शिफ्ट कर दिया गया। यहीं तक बात रुकती तो ठीक थी पर नहीं पुराने सैंट्रो के बदले नया स्विफ्ट डिजायर भी उन्हें दे दिया गया है । अब रहने का भी प्रबंध मैनेजमेंट कर रहा है। ऐसी किस्मत पत्रकारों की कहां। जिंदगी भर कलम घिसते रहेंगें , पर कलम की पूछ नहीं होगी। आज खबर मन्त्र बीच मझदार में हिचकोले खा रही है क्या मैनेजमेंट ने अभी तक इस की कोई दिशा और दशा तय नहीं कर पाया है.इसी बीच इस की बागडोर एक नौसिखए और अनुभवहीन,आयोग्य और कुंठित महिला वीणा सिंह के हाथ में दे दिया गया है जैसे की बन्दर के हाथ में उस्तुरा.विश्वस्त सूत्रों से पता चला है की जब यह वीणा सिंह बोकारो स्टील सिटी में थी तो वहा से भी इस ने दसो लाख रूपया कई लोगो का लेकर चम्पत हो गयी.इस की संगीत विशारद की डिग्री भी फ़र्ज़ी है.एक कहावत है की “दिल लगी दिवार से तो पारी क्या चीज़ है “.ऐसे दो बच्चो की आम्मा वीणा सिंह अपने मोह जल में डॉ. अभय सिंह मालिक को इस प्रकार फंसा रखा है की डॉ.अभय सिंह का दिमाग काम करना बंद करदिया है.आज वीणा सिंह के उदंड और रूखे व्यवहार से खबर मन्त्र के सभी स्टाफ नाखुश और उदासीन है और अब उन्हों ने भी “लगी से घोड़े को घास खिला रहे है “.क्या बात है की आज वीणा सिंह को डॉ अभय सिंह ने अपना एक फ्लैट दे दिया है और उस के साजो -सजावट पर लाखो रुपये खर्च हो रहे है और इधर पत्रकारों और स्टाफ को दो महीना से वेतन नहीं मिला है ?इतिहास गवाह है की सूरा और सुंदरी के चक्कर में बड़े -बड़े सल्तनत और राजा डूब गए डॉ.अभय सिंह किस खेत की मूली है?
————————————————————————————————–
😆 😡 😳
shahwaz ansari
September 3, 2014 at 11:50 am
वीणा के झंकार से डोल रहा है खबरमंत्र, बिल्डर का ता -ता -थैया
रांची के एक मीडिया हाउस से जो खबर आ रही है , वह हैरान करनेवाली है। सूचना है कि अख़बार खबरमंत्र इनदिनों वीणा के झंकार पर डोल रहा है। सूचना है कि अख़बार खबरमंत्र इनदिनों वीणा के झंकार पर डोल रहा है।आज खबर मन्त्र के सीनियर संपादक से लेकर पत्रकार तक वीणा सिंह के तानाशाही और उदंड व्यवहार से आहात महसूस कर रहे है जहा उनके आत्म-सम्मान और वौद्धिकता के वीणा सिंह अपनी जूती की नोक से तार -तार कर दिया है.मार्केटिंग हेड और सर्कुलेशन हेड को तो चपरासी की तरह ट्रीट करती है. अख़बार के प्रिंटर-पब्लिशर ही जब ता -ता -थैया करने लगे तो बेचारे संपादक, उपसम्पादक और अन्य की मजबूरी समझी जा सकती है।
लेकिन ऐसी परिस्थिति भी आयेगी यह किसी ने सोचा था। यह अख़बार शुरू होने के बाद से ही झटके पर झटके इसे मिल रहें हैं। खबरमंत्र के मालिक बिल्डर डॉ अभय सिंह ने बोकारो की बीना सिंह को फिलहाल इस अख़बार का एक तरह से मालकिन बना दिया है। उस बीणा सिंह को , जो बोकारो में सुर -संगम इवेंट चलाया करती थी। दूर -दूर तक न पत्रकारिता का अनुभव और ना समाचार की परख पर बिल्डर ने कहने के लिये तो उन्हें डायरेक्टर बनाया है पर रूतबा उससे ऊपर का दे रखा है।
वें समाचार और विज्ञापन के साथ -साथ कंपनी का हित भी देखेंगी। इसी में अख़बार से अखिलेश सिंह को बाहर का रास्ता दिखाकर उनके दफ़्तर में मैडमजी को शिफ्ट कर दिया गया। यहीं तक बात रुकती तो ठीक थी पर नहीं पुराने सैंट्रो के बदले नया स्विफ्ट डिजायर भी उन्हें दे दिया गया है । अब रहने का भी प्रबंध मैनेजमेंट कर रहा है। ऐसी किस्मत पत्रकारों की कहां। जिंदगी भर कलम घिसते रहेंगें , पर कलम की पूछ नहीं होगी। आज खबर मन्त्र बीच मझदार में हिचकोले खा रही है क्या मैनेजमेंट ने अभी तक इस की कोई दिशा और दशा तय नहीं कर पाया है.इसी बीच इस की बागडोर एक नौसिखए और अनुभवहीन,आयोग्य और कुंठित महिला वीणा सिंह के हाथ में दे दिया गया है जैसे की बन्दर के हाथ में उस्तुरा.विश्वस्त सूत्रों से पता चला है की जब यह वीणा सिंह बोकारो स्टील सिटी में थी तो वहा से भी इस ने दसो लाख रूपया कई लोगो का लेकर चम्पत हो गयी.इस की संगीत विशारद की डिग्री भी फ़र्ज़ी है.एक कहावत है की “दिल लगी दिवार से तो पारी क्या चीज़ है “.ऐसे दो बच्चो की आम्मा वीणा सिंह अपने मोह जल में डॉ. अभय सिंह मालिक को इस प्रकार फंसा रखा है की डॉ.अभय सिंह का दिमाग काम करना बंद करदिया है.आज वीणा सिंह के उदंड और रूखे व्यवहार से खबर मन्त्र के सभी स्टाफ नाखुश और उदासीन है और अब उन्हों ने भी “लगी से घोड़े को घास खिला रहे है “.क्या बात है की आज वीणा सिंह को डॉ अभय सिंह ने अपना एक फ्लैट दे दिया है और उस के साजो -सजावट पर लाखो रुपये खर्च हो रहे है और इधर पत्रकारों और स्टाफ को दो महीना से वेतन नहीं मिला है ?इतिहास गवाह है की सूरा और सुंदरी के चक्कर में बड़े -बड़े सल्तनत और राजा डूब गए डॉ.अभय सिंह किस खेत की मूली है?
————————————————————————————————–
😆 :zzz