Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

वेब-सिनेमा

शब्दचर्चा 83 : ईरान के विदेश मंत्री का नाम अराघची, अरागची या अराक़ची?

नीरेंद्र नागर

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi का नाम इन दिनों काफ़ी चर्चा में है और हिंदी मीडिया वालों को समझ में नहीं आ रहा कि उनका नाम कैसे लिखें। कुछ, जिनमें नवभारत टाइम्स, जागरण, आजतक जैसी नामी वेबसाइटें शामिल हैं, अंग्रेज़ी स्पेलिंग के आधार पर उनका सरनेम अराघची लिख रही हैं तो कुछ अरागची या अराग़ची। कुछेक साइटें, ख़ासकर विदेशी साइटें उनका नाम अराक़ची लिख रही हैं।

आइए, आज शब्दचर्चा 83 में जानते हैं कि ईरानी विदेश मंत्री के नाम का असल उच्चारण
क्या है।

अगर ईरानी विदेश मंत्री के नाम की विकिपीडिया पर मौजूद फ़ारसी स्पेलिंग (عباس
عراقچی) से लिखा जाए तो उनका सरनेम होगा अराक़ची। यह शब्द अरक़ में ‘ची’ प्रत्यय लगाने से बना है। अरक़ का मतलब आप जानते ही होंगे – किसी चीज़ का निचोड़ा हुआ रस। अरक़ को हिंदी में अर्क भी कहा जाता है।

जो लोग अरक़ का धंधा करते हैं, उन्हें ईरान में अरक़ची या अराक़ची कहते हैं। आपको मालूम होगा कि व्यवसाय या पेशे के लिए फ़ारसी में ‘ची’ प्रत्यय का प्रयोग होता है जैसे तोपची, खज़ानची, मशालची, बावर्ची आदि। इसी तरह अरक़ से बना है अराक़ची। निश्चित रूप से ईरानी विदेश मंत्री के पूर्वज अरक़ का धंधा करते रहे होंगे।

अब प्रश्न यह कि यह अराक़ची अंग्रेज़ी में Araghchi कैसे हो गया।

इसका कारण यह है कि अरबी में दो ध्वनियाँ हैं ‘क़’ और ‘ग़’ जिनको क़ाफ़ और ग़ैन कहा जाता है। क़ाफ़ से ‘क़’ और ग़ैन से ‘ग़’ की ध्वनि निकलती है। हम भारतीय इन ध्वनियों से परिचित हैं – क़ुरआन में यही ‘क़’ वाली ध्वनि है, ग़ज़ल में यही ‘ग़’ वाली ध्वनि है।

अरब में इन दोनों ध्वनियों को अलग-अलग प्रकार से बोलते हैं लेकिन ईरान की कुछ बोलियों में ऐसा हुआ कि ये दो ध्वनियाँ एक-दूसरे से मिलजुल गईं कुछ इस तरह कि कहीं इनका उच्चारण ‘क़’ जैसा किया जाता है और कहीं ‘ग़’ जैसा। आम तौर पर शब्द के शुरू में तो ‘क़’ बोला जाता है लेकिन बीच में और अंत में ‘ग़’।

यही कारण है कि अरक़ का उच्चारण वहाँ अरग़ हो गया। स्पेलिंग में अरक़ (عرق) है लेकिन बोला जाता है अरग़। यही हाल अराक़ची का भी हुआ। लिखा जाता है अराक़ची (عراقچی), बोला जाता है अराग़ची/अराग़्ची।

परंतु समस्या यह है कि अंग्रेज़ी में ‘ग़’ नहीं है और बाहर से आए शब्दों में मौजूद इस ध्वनि को दर्शाने के लिए उसमें GH का प्रयोग किया जाता है। जैसे ग़ज़ल को लिखते हैं Ghazal। इस तरह अराक़ची (फ़ारसी उच्चारण – अराग़ची) का रोमन लिप्यंतर हो गया Araghchi।

इस स्पेलिंग को देखकर हिंदी मीडिया के एक हिस्से ने इसे अराघची समझ लिया यह सोचे- समझे बिना कि अरबी-फ़ारसी परिवार की भाषाओं में तो ‘घ’ की ध्वनि है ही नहीं। वैसे में किसी ईरानी व्यक्ति के नाम में ‘घ’ हो ही कैसे सकता है!

लेकिन BBC हिंदी, DW, News on Air, ETV Bharat और News18 जैसे संस्थानों के पत्रकारों/संपादकों को यह मालूम रहा होगा। इसीलिए इन साइटों पर अराघची नहीं, अरागची लिखा जा रहा है।

हिंदी की कुछ विदेशी साइटें जैसे Pars Today (ईरानी) या CRI Hindi (चीनी) में स्पेलिंग के आधार पर ईरानी विदेश मंत्री का सरनेम अराक़ची लिखा जा रहा है। स्पेलिंग के हिसाब से ये बिल्कुल सही लिख रही हैं।

तो निष्कर्ष यह कि ईरानी विदेश मंत्री का नाम स्पेलिंग के अनुसार अब्बास अराक़ची लिखा जा सकता है तो उच्चारण के हिसाब से अराग़ची (या अरागची यदि नुक़्ता न लगाना चाहें) लेकिन जिन वेबसाइटों में अराघची छप रहा है, वह वहाँ के पत्रकारों/संपादकों में बेसिक भाषाई जानकारियों के अभाव को ही दर्शाता है।

पिछली शब्दचर्चा…

शब्दचर्चा 82 : पाक सेनाध्यक्ष के नाम पर कन्फ़्यूज़ क्यों हैं मीडिया संस्थान?

Local News Community
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन