छत्तीसगढ़ और बिहार के बाद अब मध्यप्रदेश के सिगरौली में अडानी कोल ब्लॉक प्रोजेक्ट के लिए लगभग 2000 हेक्टेयर जमीन पर 2500 पेड़ों की कटाई शुरू हो गई है। स्थानीय लोग पर्यावरण नुकसान और जंगल खत्म होने की आशंका पर विरोध जता रहे हैं, जबकि सरकार इसे विकास और ऊर्जा जरूरतों के लिए जरूरी कदम बता रही है। लेकिन इस मामले पर सियासत और विरोध भी तेज हो रहा है।
मध्य प्रदेश में अडानी के कोयला प्रोजेक्ट के लिए बड़ी संख्या में पेड़ काटे जा रहे. कुछ लोग इस बात से दुखी हैं. इन मूर्खों को पेड़ की चिंता है, पर्यावरण की चिंता है. अरे देशद्रोहियों.. देश के लिए पेड़ जरूरी है या अडानी? पेड़ तो फिर उग जाएंगे. अडानी जैसा राष्ट्रमित्र कहां मिलेगा. – रणविजय सिंह, पत्रकार
मनीष यादव-
अडानी के लिए फिर एक बार जंगल काटा जा रहा है। इस बार मध्यप्रदेश का घना जंगल बलिदान हो रहा है।
एक अडानी के लिए लाखो पक्षियों और हज़ारो जानवरों का हैबिटाट उजाड़ा जा रहा है।
यह कोई पहली घटना नहीं है। पहले छत्तीसगढ़ के हसदेव जंगल को कोयला खदानों के लिए उजाड़ा गया फिर बिहार में जंगल साफ किए गए और अब मध्यप्रदेश में वही कहानी दोहराई जा रही है।
प्रधानमंत्री विदेशों में COP मीटिंग में कलाइमेट चेंज और कार्बन एमिसन कम करने के बड़े-बड़े वादे करते हैं। भाषण देते हैं कि भारत 2070 तक नेट-जीरो का लक्ष्य हासिल करेगा, जंगल बढ़ाएगा, हरियाली बचाएगा। लेकिन जैसे ही फ्लाइट भारत की धरती पर उतरता है वैसे प्रधानमंत्री जंगल काटने के प्रोजेक्टों को मंजूरी दे देते हैं। एक तरफ ग्लोबल वार्मिंग से लड़ने की बात दूसरी तरफ कोयला खदानों और औद्योगिक प्रोजेक्ट्स के लिए जंगलों का सफाया।
यह दोहरा चरित्र नहीं तो और क्या है? प्रकृति को बचाने का दिखावा और पूंजीपतियों के हित में उसका विनाश। लाखों पक्षी, हिरण, तेंदुए, हाथी बेघर हो रहे हैं, लेकिन किसी को फर्क नहीं पड़ता। विकास के नाम पर विनाश चल रहा है, और हम चुप हैं।
कब तक चलता रहेगा यह ढोंग?
सेठजी को चाइना से सीख लेनी चाहिए…
ग्रीन एनर्जी के तहत चीन अपने देश में 40,000 एकड़ में सोलर पैनल लगा चुका है जबकि उसका टारगेट 1 लाख एकड़ में सोलर पैनल लगाने का है। चीन ने पैनल लगाने के लिए रेगिस्तान समुद्र और पहाड़ों को चुना खेती लायक उपजाऊ जमीनों को नहीं। तो वहीं भारत में अदानी जैसलमेर और बिहार में कृषि लायक भूमि को बंजर दिखाकर उसपर पैनल लगा रहे हैं।- डॉ शीतल यादव
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