शीतल पी सिंह-
3 नवंबर 2025 को जयपुर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जिसमें राजस्थान सरकार ने अडानी ग्रुप की सहायक कंपनी अडानी पावर पर बिजली विभाग से 1400 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ उठाने का आरोप लगाया। स्क्रॉल.इन की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला कोयला परिवहन शुल्क (कोल ट्रांसपोर्टेशन चार्जेस) से जुड़ा है। राज्य सरकार ने कोर्ट में दावा किया कि अडानी ने ‘आर्म-ट्विस्टिंग’ की रणनीति अपनाकर अतिरिक्त शुल्क वसूला, जो उपभोक्ताओं पर बोझ डालने वाला था। सरकार के वकील ने कहा, “कंपनी ने दबाव बनाकर बिलिंग सिस्टम में हेरफेर किया, जिससे राज्य को भारी नुकसान हुआ।”
यह घोटाला 2018-2023 के बीच का है, जब अडानी पावर ने राजस्थान के बिजली वितरण निगमों को कोयला-आधारित बिजली सप्लाई की। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह इस राशि की वसूली के लिए कदम उठाए। राजस्थान ऊर्जा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यह अतिरिक्त शुल्क कुल बिजली लागत का 10-15% हिस्सा था, जो उपभोक्ताओं के बिलों में जोड़ा गया। विपक्षी दलों ने इसे ‘क्रोनी कैपिटलिज्म’ का उदाहरण बताते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्वीट किया, “अडानी को फायदा पहुंचाने के लिए राजस्थान सरकार ने उपभोक्ताओं की जेब काटी।” अडानी ग्रुप ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि सभी लेन-देन पारदर्शी थे।
यह घटना अडानी के बिजली कारोबार में पारदर्शिता की कमी को उजागर करती है। राजस्थान में अडानी मुख्य रूप से जेनरेशन और सप्लाई पर फोकस करता है, लेकिन वितरण में अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा है। कुल मिलाकर, यह मामला राज्य की वित्तीय स्थिरता को प्रभावित करता है, क्योंकि बिजली सब्सिडी का बोझ बढ़ रहा है।
राजस्थान के साथ-साथ बिहार में भी अडानी ग्रुप पर एक बड़ा आरोप लगा है, जो पूर्व केंद्रीय ऊर्जा मंत्री और बीजेपी नेता आरके सिंह ने लगाया। 4 नवंबर 2025 को, बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक दो दिन पहले, सिंह ने एबीपी न्यूज को दिए इंटरव्यू में दावा किया कि बिहार सरकार और अडानी पावर के बीच हुए पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) में 62,000 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। सिंह, जो 2017-2024 तक मोदी सरकार में ऊर्जा मंत्री रहे, ने कहा, “यह एक बड़ा घोटाला है। अडानी को थर्मल प्लांट लगाने के लिए ऊंची कीमत पर अनुमति दी गई, जिससे राज्य को 25 साल में 62,000 करोड़ का नुकसान होगा।”
मामला भागलपुर जिले के पीरपैंती में 2,400 मेगावाट क्षमता वाले अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्रोजेक्ट से जुड़ा है। अगस्त 2025 में बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड (बीएसपीजीसीएल) ने अडानी पावर को लेटर ऑफ अवॉर्ड दिया, और सितंबर में 25 साल का पीपीए साइन हुआ। इसके तहत अडानी को 6.075 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली बेचनी है, जिसमें फिक्स्ड चार्ज 4.165 रुपये और फ्यूल चार्ज 1.91 रुपये शामिल हैं। सिंह ने आरोप लगाया कि यह दर बाजार मूल्य से 1.41 रुपये प्रति यूनिट ज्यादा है, जिससे सालाना 2,500 करोड़ का अतिरिक्त खर्च होगा। उन्होंने कहा, “यह प्रोजेक्ट एनटीपीसी जैसी सरकारी कंपनी के लिए था, जिसकी लागत 10 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट होती। अडानी को 24,000 करोड़ का निवेश दिखाकर ऊंची कीमत वसूली की जा रही है।”
सिंह ने बिहार के ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र यादव और वरिष्ठ अधिकारियों पर साठगांठ का आरोप लगाया। उन्होंने सीबीआई जांच की मांग की और कहा, “सभी दोषी जेल जाएं।” इंटरव्यू के बाद एबीपी न्यूज ने वीडियो डिलीट कर दिया, जिस पर सिंह के सहयोगी ने दबाव का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इसे दोहराते हुए कहा, “केंद्र सरकार ने कैबिनेट मीटिंग में नियम बदले ताकि अडानी को फायदा हो। बिहार को 7 रुपये प्रति यूनिट की बिजली मिलेगी, जबकि राज्य कुछ नहीं पाएगा।” अडानी पावर ने दावों को ‘बेबुनियाद’ बताया और कहा कि यह कम्पटीटिव बिडिंग से आया, लैंड लीज पर 1 रुपये सालाना किराया बिहार इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2025 के तहत वैध है।
इस विवाद ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया। बीजेपी ने सिंह को 15 नवंबर को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। विपक्ष ने इसे ‘डबल इंजन सरकार का डबल करप्शन’ कहा। प्रोजेक्ट 2012 से अटका था, लेकिन अडानी के आने से तेजी आई। सिंह का दावा है कि एनटीपीसी के काहलगांव प्लांट के पास होने से लागत और कम हो सकती थी। यह घोटाला बिहार के 12 करोड़ उपभोक्ताओं पर बोझ डालेगा, क्योंकि बिजली दरें बढ़ेंगी।
अडानी ग्रुप का बिजली क्षेत्र में विस्तार विशाल है, लेकिन ‘सप्लाई और वितरण’ (रिटेल लेवल पर उपभोक्ताओं तक पहुंच) मुख्य रूप से सीमित है। नवंबर 2025 तक, ग्रुप 2 राज्यों में सीधे वितरण कारोबार में सक्रिय है:
- महाराष्ट्र: अडानी इलेक्ट्रिसिटी मुंबई लिमिटेड (AEML) के जरिए मुंबई के ब्रायन ब्राई बेसिन में 1.2 करोड़ उपभोक्ताओं को बिजली वितरित करता है। यह ग्रुप का प्रमुख डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस है, जो 2023 में 3,360 मेगावाट की क्षमता संभालता है।
- गुजरात: मुंद्रा स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) में औद्योगिक क्षेत्र को वितरण। अडानी पावर यहां जेनरेशन और लोकल डिस्ट्रीब्यूशन दोनों करता है।
हालांकि, ग्रुप 8+ राज्यों (गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा) में पावर जेनरेशन और लॉन्ग-टर्म सप्लाई करता है। उदाहरणस्वरूप, बिहार में पीरपैंती प्रोजेक्ट से NBPDCL और SBPDCL को सप्लाई होगी, लेकिन वितरण राज्य निगमों का रहेगा। असम में 3,200 MW कोल प्रोजेक्ट (नवंबर 2025 में अवॉर्ड) APDCL को सप्लाई करेगा, लेकिन डिस्ट्रीब्यूशन लोकल है। यूपी में 1,500 MW प्रोजेक्ट पर रेगुलेटर ने लागत स्पष्टता के अभाव में मंजूरी टाली है।
ट्रांसमिशन में ग्रुप 16 राज्यों में फैला है, लेकिन वितरण में विस्तार धीमा है। अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (AESL) स्मार्ट मीटरिंग और डिस्ट्रीब्यूशन इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश कर रही है, जिससे भविष्य में और राज्य जुड़ सकते हैं। कुल मिलाकर, ग्रुप की 17.6 GW थर्मल क्षमता FY32 तक 41.9 GW हो जाएगी, लेकिन विवादों ने इस विस्तार को चुनौती दी है।
राजस्थान और बिहार के ये मामले अडानी ग्रुप के ‘ग्रोथ विद गुडनेस’ नारे पर सवाल उठाते हैं। जहां ग्रुप ऊर्जा सुरक्षा का दावा करता है, वहीं उपभोक्ता महंगे बिलों का शिकार हो रहे हैं। सरकारों को स्वतंत्र जांच करानी चाहिए, ताकि निजीकरण का फायदा जनता तक पहुंचे। अन्यथा, ये घोटाले ऊर्जा क्षेत्र की विश्वसनीयता को कमजोर करेंगे। अडानी का विस्तार जारी है, लेकिन जवाबदेही जरूरी है।
(स्रोत: स्क्रॉल.इन, फाइनेंशियल एक्सप्रेस, द वायर, रॉयटर्स, आदि।)



