Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सियासत

अडानी ने अबतक इन मीडिया समूहों और पत्रकारों को निशाना बनाया!

प्रेस स्वतंत्रता पर दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित निगरानी संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) ने अपनी 2025 प्रेस फ्रीडम प्रीडेटर्स लिस्ट जारी की है—और इसमें पहली बार अडानी समूह को शामिल किया गया है। यह वही RSF है जो हर साल Press Freedom Index जारी करता है, जिसमें भारत अभी 180 देशों में 151वें स्थान पर है।

अडानी समूह पर क्या आरोप?

RSF का कहना है कि गौतम अडानी के नेतृत्व वाला समूह पिछले कई वर्षों से पत्रकारों और स्वतंत्र मीडिया के खिलाफ “गैग सूट्स” यानी डराने–धमकाने वाली कानूनी कार्रवाई का हथियार इस्तेमाल कर रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार:

2017 से अब तक अडानी समूह और उसकी सहायक कंपनियों ने 15 से अधिक पत्रकारों और कई मीडिया संस्थानों पर लगभग 10 मुकदमे ठोके हैं। इनमें सिविल और क्रिमिनल दोनों तरह के मानहानि मामले शामिल हैं।

कई मामलों में अदालतों से एक्स-पार्टी आदेश लेकर अडानी समूह को यह अधिकार मिल गया कि कौन-सी खबर “मानहानिकारक” है—यह वही तय करे, बिना अगली सुनवाई के। इसका नतीजा यह हुआ कि तृतीय पक्षों पर भी वही आदेश लागू हो गए, जिससे RSF के अनुसार “असीमित सेंसरशिप” का रास्ता खुल गया।

2025 की “हिट लिस्ट”: किसको निशाना बनाया?

RSF के अनुसार अडानी समूह ने 2025 में जिन पत्रकारों और संस्थानों पर कार्रवाई की, उनमें शामिल हैं—

  • The Wire
  • Newslaundry
  • HW News
  • स्वतंत्र पत्रकार रवीश कुमार
  • परॉन्जय गुहा ठाकुरता व अन्य

इनके खिलाफ सामग्री हटाने के आदेश तुरंत जारी किए गए। RSF लिखता है कि अडानी समूह का “डेडली वेपन (घातक हथियार)” है— गैग सूट्स और कानूनी रूप से डराना।

दुनिया के किन ‘प्रिडेटर्स’ के साथ रखे गए अडानी?

इस सूची में अडानी समूह को जिन वैश्विक ताकतों के साथ रखा गया है, उनमें शामिल हैं—

  • चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (शी जिनपिंग)
  • सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान
  • रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन
  • बेलारूस के राष्ट्रपति लुकाशेंको
  • इज़राइल डिफेंस फोर्सेज (IDF)
  • एलन मस्क

यानी RSF ने अडानी समूह को उन देशों और नेताओं की श्रेणी में रखा है जो प्रेस को नियंत्रित या धमकाते हैं।

RSF का कहना है कि भारत के दूसरे सबसे अमीर उद्योगपति होने के साथ-साथ अडानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेहद करीबी माने जाते हैं, और समूह की कानूनी रणनीति का मकसद— “स्वतंत्र प्रेस को चुप कराना, आलोचनात्मक पत्रकारिता को नियंत्रित करना और मीडिया को डराकर जानकारी पर पकड़ बनाना” है।

Related News…

Local News Community
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन