नई दिल्ली: रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) ने 2025 की ‘प्रेस फ़्रीडम प्रीडेटर्स’ सूची जारी की है, जिसमें दुनिया भर के 34 सरकारों, संगठनों और प्रभावशाली व्यक्तियों को पत्रकारों तथा स्वतंत्र सूचना के अधिकार पर व्यवस्थित हमले करने का आरोपी बताया गया है। इस सूची में दो भारतीय संस्थाओं—ओपइंडिया और अदाणी समूह—के नाम भी शामिल किए गए हैं।
यह सूची इंटरनेशनल डे टू एंड इम्प्यूनिटी फॉर क्राइम्स अगेंस्ट जर्नलिस्ट्स के मौके पर जारी की गई और इसे RSF के वर्ल्ड प्रेस फ़्रीडम इंडेक्स का पूरक माना जाता है। सूची में संस्थाओं को उनके दमन के तौर-तरीकों के आधार पर वर्गीकृत किया गया है—जैसे कानूनी उत्पीड़न, आर्थिक दबाव, ऑनलाइन हमले, दुष्प्रचार और हिंसा।
ओपइंडिया पर “स्मियर कैंपेन” और ऑनलाइन उत्पीड़न बढ़ाने का आरोप
RSF ने ओपइंडिया को “सोशल कैटेगरी” में रखा है। रिपोर्ट के अनुसार, यह हिंदू राष्ट्रवादी वेबसाइट पत्रकारों के खिलाफ स्मियर कैंपेन चलाने, झूठे आरोप फैलाने और मीडिया के प्रति जन अविश्वास बढ़ाने में शामिल रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ओपइंडिया ने 2025 में 96 लेख प्रकाशित किए, जिनमें सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को निशाना बनाया गया। RSF का कहना है कि इन लेखों के बाद संबंधित पत्रकारों को ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
23 अक्टूबर को RSF द्वारा द न्यूज़ मिनट की एडिटर धन्या राजेंद्रन को अपने प्राइज़ फॉर इम्पैक्ट के लिए नामित किए जाने के तुरंत बाद, ओपइंडिया ने उनके खिलाफ कथित रूप से मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित की।

रिपोर्ट के अनुसार, ओपइंडिया ने इस साल एक 200 पन्नों का दस्तावेज़ भी जारी किया, जिसे RSF ने “षड्यंत्र-आधारित” बताया। इस दस्तावेज़ में पत्रकारों पर यह आरोप लगाया गया कि वे सरकार के खिलाफ “नैरेटिव वॉर” चला रहे हैं। RSF का आरोप है कि ओपइंडिया आलोचक पत्रकारों को अक्सर “जॉर्ज सोरोस इकोसिस्टम” या “एंटी-इंडिया लॉबी” का हिस्सा बताकर उनकी विश्वसनीयता पर हमला करता है। RSF ने टिप्पणी की—“ओपइंडिया का मुख्य हथियार षड्यंत्र सिद्धांत हैं।”
अदाणी समूह पर ‘ज्यूडिशियल इंटिमिडेशन’ का आरोप
भारत के सबसे बड़े कॉर्पोरेट समूहों में से एक अदाणी समूह को RSF ने “लीगल कैटेगरी” में रखा है। आरोप है कि समूह ने 2025 में कानूनी प्रणाली का इस्तेमाल कर पत्रकारों को चुप कराने का प्रयास किया।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु—
- 2025 में समूह ने दो गैग लॉसूट दायर किए, जिनमें 8 पत्रकारों और 3 मीडिया संगठनों को निशाना बनाया गया।
- ये मुकदमे सिविल और क्रिमिनल दोनों तरह की मानहानि के आरोपों से जुड़े थे।
- अदालतों ने कई मामलों में एक्स-पार्टी इन्जंक्शन जारी किए—यानी दूसरी पार्टी को सुने बिना।
- इन आदेशों के तहत कंपनी खुद तय कर सकती थी कि कौन-सी रिपोर्ट “मानहानिकारक” है।
RSF का कहना है कि इन मुकदमों में “जॉन डो” क्लॉज शामिल थी, जिससे समूह भविष्य में और लोगों को भी आरोपी बना सकता था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अदाणी समूह ने इस दौरान कंटेंट टेकडाउन नोटिस भी भेजे।
इसके अलावा, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने भी स्वतंत्र पत्रकार रवीश कुमार, न्यूज़लॉन्ड्री, द वायर और HW न्यूज़ जैसे मीडिया संस्थानों पर कार्रवाई के आदेश जारी किए, जो RSF के अनुसार अदाणी समूह के प्रभाव में थे।
RSF ने अदाणी एंटरप्राइजेज की 7 सितंबर 2025 की एक याचिका को उद्धृत किया, जिसमें कहा गया था:
“कुछ रिपोर्टर्स, एक्टिविस्ट्स और संगठनों ने दुर्भावनापूर्ण इरादे से अदाणी समूह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है, जिससे निवेशकों को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ और भारत के ब्रांड इमेज को भी क्षति पहुंची।”
मुकदमे में यह भी दावा किया गया कि ये पत्रकार “एंटी-इंडिया इंटरेस्ट्स” के साथ मिलकर बुनियादी ढांचा और ऊर्जा परियोजनाओं को बाधित करने की साज़िश कर रहे हैं।
अन्य वैश्विक नाम भी सूची में शामिल
RSF की 2025 सूची में शामिल अन्य प्रमुख नाम—
- इज़राइल डिफेंस फोर्सेज़ (IDF) – पत्रकारों की मौतों (लगभग 220) के लिए जिम्मेदार ठहराया गया
- म्यांमार की स्टेट पीस एंड सिक्योरिटी कमीशन
- मेक्सिको का जलिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल – देश का सबसे हिंसक आपराधिक संगठन
सूची में वैश्विक नेताओं और प्रमुख हस्तियों के नाम भी हैं—
- शी जिनपिंग
- व्लादिमीर पुतिन
- मोहम्मद बिन सलमान
- एलन मस्क
RSF के अनुसार, ये सभी व्यक्ति या तो सेंसरशिप लागू करने, दुष्प्रचार फैलाने, मीडिया पर आर्थिक दबाव बनाने या पत्रकारों के खिलाफ ऑनलाइन हमले बढ़ाने में शामिल रहे हैं।
तकनीक के ज़रिए दमन का विस्तार
RSF का कहना है कि 2025 में तकनीक-आधारित दमन में तेज़ी आई—
- चीन में AI-संचालित सरकारी प्रचार
- IDF द्वारा समन्वित ऑनलाइन स्मियर कैंपेन
- सोशल मीडिया पर कंटेंट सप्रेशन
RSF ने कहा कि कुछ सत्ता केंद्र राज्य मशीनरी का इस्तेमाल कर मीडिया को दबाते हैं, कुछ भौतिक हिंसा और आर्थिक दबाव, जबकि कुछ अदालतों और जन-उकसावे के जरिये स्वतंत्र पत्रकारिता को कमजोर करते हैं।
वरिष्ठ पत्रकार डॉ मुकेश कुमार ट्वीट करते हैं-
रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने अडानी समूह और OPindia को भारत में प्रेस फ्रीडम के लिए सबसे बड़े ख़तरों में शुमार किया है। OPindia तो दक्षिणपंथी सोच वाला ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जो झूठ और नफ़रत फैलाने के लिए कुख्यात है।
अडानी समूह ने मीडिया को धमकाने के लिए कानूनों का बेजा इस्तेमाल करने के लिए कलंक का ये टीका लगाया गया है।
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