
कन्हैया शुक्ला-
देशभर के पीड़ित-शोषित पत्रकारों की आवाज भड़ास4मीडिया पर खबर प्रकाशित होने के बाद छत्तीसगढ़ में बड़ा असर हुआ है. खबर, भ्रष्ट सिस्टम द्वारा चार निर्दोष टीवी पत्रकारों की गाड़ी में गाँजा रखकर उन्हें पकड़ाए जाने को लेकर थी. यह एक स्थानीय खनन माफिया और पुलिस की मिलीभगत का नतीजा था.
छत्तीसगढ़ के चार निर्दोष टीवी पत्रकारों के खिलाफ पुलिस और खनन माफिया ने ऐसी साजिश रची की पत्रकारों को गाँजा तस्कर ही बना दिया. बस्तर का शायद ही ऐसा कोई पत्रकार हो जो फंसाए गए चारों पत्रकारों को न जानता हो. भड़ास पर खबर चलने के बाद बस्तर के पत्रकारों ने सिस्टम का काला चेहरा न सिर्फ उजागर किया बल्कि तमाम व्हाट्सएप्प ग्रुपों पर आक्रोश और लामबंदी देखी गई.

आनन-फानन में पत्रकारों ने पुलिस के बड़े अधिकारियों से संपर्क किया. भड़ास की तरफ से इस मामले में देश भर के पत्रकारों समेत छत्तीसगढ़ सरकार के बड़े नेता और मंत्रियों के संज्ञान में लाया गया. यहां तक की गृह विभाग के जिम्मेदारों के पास भी खबर पहुंचाई गई.
नतीजतन, इन तमाम कोशिशों के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस ने कोंटा थाने के टीआई अजय सोनकर को थाने से हटाकर लाइन अटैच कर दिया है. सोनकर पर एसपी किरन चव्हाण द्वारा कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है.
इस मामले में हैरानी की बात तो यह है कि जिले में कुछ ऐसे पत्रकारों के कारनामे भी उजागर हुए जो पुलिस के साथ मिलकर पत्रकारों को फंसाने की बात कर रहे थे. व्हाट्सप ग्रुपों में कुछ पत्रकारों का नाम और फ़ोटो भी जारी किया गया है जिन्होंने इस प्रपंच में पत्रकारों को फंसाने के लिए भ्रष्ट सिस्टम के तलवे चाटे हैं.

बहरहाल, इस प्रकरण के बाद गांजा से लेकर खनन की हर अवैद्य ख़बर पत्रकारों को मुखरता से दिखानी चाहिए. अब सिस्टम की हर तस्वीर पत्रकारों को सामने लानी चाहिए. क्योंकि पत्रकारों की वैल्यू पत्रकारिता से होती है न कि चाटुकारिता से. इस मामले में पूरे देश से भड़ास4मीडिया के पास पत्रकारों के रिएक्शन आ रहे हैं.
इस बात को लेकर पत्रकारों से नाराज बताया जा रहा टीआई कोंटा
जिन पत्रकारों को गांजा तस्करी में पकड़ा गया है उसमें से जी के पत्रकार बप्पी ने कल व्हाट्सएप ग्रुप में बस्तर के अवैद्य खनन की खबरें और तस्वीर भी डाल दी थी. इस ग्रुप में पुलिस के आलाधिकारी भी मौजूद हैं. इसी ग्रुप में पत्रकार बप्पी ने कोंटा TI को अधिकारियों की तरफ़ से अवैद्य संरक्षण देने की बात भी की है और परमिट दिखाकर सवाल भी किया है. स्थानीय पत्रकार पूछ रहे हैं क्या यही वजह है कि पत्रकारों को पुलिस और खनन माफियाओं ने गांजा तस्करी के फ़र्जी मामले में लपेट दिया?

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