Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सुख-दुख

अखबार की कतरनों वाला इंटरव्यू देख सब असहज थे लेकिन अजय जी नहीं

जून 2000 की बात है। मैं दैनिक जागरण अख़बार में रिपोर्टर था। छह महीने पहले ही शादी हुई थी और वेतन साढ़े छह हज़ार के आसपास था। कुछ महीने पहले ही अजय उपाध्याय जी हिंदुस्तान अख़बार के ग्रुप एडिटर बने थे। बड़े भाई बृजेश शुक्ल जी लखनऊ हिंदुस्तान के ब्यूरोचीफ हो चुके थे।

एक दिन उनका फ़ोन आया कि हिंदुस्तान आना हो तो बताओ। अजय जी आ रहे हैं तुम्हारा इंटरव्यू कराते हैं। मैंने हाँ बोला तो होटल क्लार्क्स में इंटरव्यू तय हो गया। डेस्क के मेरे एक बहुत अच्छे साथी का मुझसे एक दिन पहले इंटरव्यू था। जैसे ही वह इंटरव्यू देकर आया, हमारे संपादक स्व. विनोद शुक्ला ने उन्हें भरे न्यूज़ रूम में थप्पड़ मारकर निकाल दिया। शुक्ला जी मैनेजर अच्छे थे लेकिन अपनी टीम के बढ़िया लोगों के लिए हद से ज़्यादा पजेसिव। बहुत दबंग भी। तब वहाँ आज जैसा प्रोफ़ेशनलिज़्म नहीं था।

मैं यह देखकर अवाक था। फिर भी तय किया कि इंटरव्यू देने तो जाऊँगा। किसी को पता न चले इसलिए उस दिन एकदम सामान्य कपड़े पहने। फिर ऑफिस की मीटिंग अटेंड की और उसके बाद बाहर निकला। अपनी कुछ अच्छी बाइलाइन खबरों की कटिंग मैंने शर्ट की ऊपर वाली जेब और जीन्स की जेब में रखीं और पहुँच गया क्लार्क्स। वहाँ उपाध्याय जी के साथ स्व. सुनील दुबे, नवीन जोशी जी और बृजेश जी भी थे उन्होंने खबरों की फाइल माँगी तो मैंने कतरनों की पुड़िया उनके सामने रख दीं।

यह देखकर बाक़ी लोग बहुत असहज हुए लेकिन अजय जी नहीं। मैंने उन्हें अपने साथी का क़िस्सा बताया और कहा कि हम सब पर नज़र रखी जा रही है, इसलिए फाइल नहीं लाया। अजय जी ने एक एक ख़बर बहुत ध्यान से पढ़ी और कुछ सवाल पूछे और फिर मैं विदा हो गया।

जिस हाल में और जिस बेतरतीब ढंग से इंटरव्यू दिया था, उससे उम्मीद कम ही थी। इधर इतनी सावधानी के बावजूद शुक्ला जी को खबर मिल गयी और मुझे भी निकाल दिया गया। इंटरव्यू देने के आरोप में। क़रीब एक महीने तक यातना भरे दिन थे। फिर एक दिन नवीन जी का फ़ोन आया और बताया कि तुम्हारा सीनियर कॉरेस्पोंडेंट के तौर पर लखनऊ संस्करण में हो गया है। वेतन भी क़रीब दोगुना था।

आज याद करता हूँ तो समझ आता है कि अजय जी की दृष्टि कैसी थी। उन्हें काम और काम के लोगों की समझ थी। वह ख़ुद भी बहुत सहज सरल थे। कल जब उनके निधन की ख़बर मिली तो सब याद आने लगा। ईश्वर उन्हें स्वर्ग में स्थान दें। सहज सरल बुद्धिमत्ता की पत्रकारिता और प्रशासनिक योग्यता की उनकी परंपरा भी आगे बढ़े।

ये भी पढ़ें…

हृदयाघात के कारण चला गया एक शानदार संपादक, वे चलती-फिरती लाइब्रेरी से कम न थे!

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन