विमल दीक्षित-
वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम वाकई में बधाई के पात्र हैं जिन्होंने गढ़वाल के प्रवेश द्वार कोटद्वार की बहु चर्चित घटना मोहम्मद दीपक कुमार के विषय में सभी पक्षों से बातचीत कर एक अच्छी रिपोर्ट अपने चैनल में डाली। रिपोर्ट में साफ दिख रहा है कि जिस मोहम्मद दीपक कुमार ने इंसानियत के नाते बुजुर्ग मुस्लिम को बचाया और खुद कथित भगवाधारियों के शिकार होते बचे, उसके ही खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर दी।
अजीत अंजुम ने जब एडिशनल एसपी के समक्ष सवाल खड़े किए तो साहब बहादुर नाराज हो गए। लेकिन अंजुम डरे नहीं। वह लगातार सवाल पूछते रहे और एडिशनल एसपी सवालों से भागते रहे। वे यहां तक बोल गए कि आप दिल्ली से कोटद्वार दंगा कराने आए हैं।
अजीत अंजुम मीडिया जगत में जाना पहचाना नाम है। जब एक पुलिस अफसर उनसे इस तरह से बात कर सकता है तो समझ लीजिए कि क्या कोई स्थानीय पत्रकार उस पुलिस अफसर से कोई सवाल कर सकता होगा। जी कतई नहीं। सबसे शर्मानाक स्थिति उत्तराखंड के अखबारों की रही। उनके लिए तो पुलिस का वर्जन छाप देना ही पत्रकारिता हो गई है।
सीनियर पत्रकार प्रभात डबराल, सुचरिता कुकरेती ने जरूर दुर्भाग्यपूर्ण घटना और मोहम्मद दीपक कुमार के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर जरूर सवाल उठाए। कोटद्वार ऐसी धरती है जहां से बड़े-बड़े पत्रकार निकले और नाम कमाया। उमाकांत लखेड़ा ने भी इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
आज जो कोटद्वार दिख रहा है ऐसा कभी नहीं रहा। कुछ वर्ष हमने भी कोटद्वार में गुजारे। हिंदू मुसलमान में बेहतरीन तालमेल और भाईचारा देखा था। कोई भेदभाव नहीं दिखता था। मिली जुली संस्कृति वाला शहर था। ताजा मसला छोटा-मोटा नहीं है। मामले की गूंज विदेशी मीडिया तक में है। हो सकता है देर समीर यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचे जिसकी संभावना बहुत अधिक है। सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने भी मोहम्मद दीपक कुमार के मामले पर चिंता जाहिर की है।
कोटद्वार के स्थानीय कुछ दोस्तों ने बातचीत में बताया की कुछ समय से कोटद्वार में अशांति फैलाने की लगातार कोशिशें की जा रही है। मगर सजग लोगों नेहमेशा इन साजिशों को नाकाम किया। यह मामला भी शांत हो जाता है अगर देहरादून ऋषिकेश पौड़ी और श्रीनगर से असामाजिक तत्वों की भीड़ मोहम्मद दीपक कुमार पर हमला करने के लिए कोटद्वार नहीं पहुंचती। स्थानीय लोगों ने सोशल मीडिया में अनगिनत वीडियो अपलोड किए जिससे देश कोटद्वार की दुर्भाग्यपूर्ण घटना को जान सका। चौतरफा इस घटना की निंदा की गई।
वीडियो में साफ दिख रहा है घटना के समय पुलिस ने आवश्यक कदम नहीं उठाये। अगर उसने जरूरी कदम उठाए होते तो यह भीड़ तुरत-फुरत भाग लेती।
उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित और ईमानदार पूर्व पुलिस महानिदेशक विक्रम सिंह का भी इस मामले में बयान आया है। उन्होंने कहा की पुलिस ने अपने दायित्वों का निर्वाह नहीं किया। कोटद्वार में कई दशकों से पत्रकारिता कर रहे साथी शराफत ने बताया कि कोटद्वार में इस तरह की घटना पहले कभी नहीं देखी। कुछ समय से इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने की कोशिश की जा रही है। गिनती के चंद लोग हैं जो कोटद्वार की फिजा में जहर घोलने का काम कर रहे हैं। इनकी पहचान की जानी चाहिए।
एक और हैरत की बात है इतनी बड़ी घटना होती रही और विपक्ष के नेता कोटद्वार में अपने घरों में छिपे रहे। वह घर से बाहर नहीं निकले। कांग्रेस के दिग्गज नेता और दो बार के कैबिनेट मिनिस्टर सुरेंद्र सिंह नेगी भी कोटद्वार में थे। उन्होंने शांतिपूर्ण समाधान के लिए कोई रुचि नहीं दिखाई। हरक सिंह रावत केवल एक बयान देकर खामोश हो गये।
बरहाल यहां वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम की बात हो रही है उन्होंने मोहम्मद दीपक कुमार के मसले पर बहुत अच्छी रिपोर्टिंग की और और दूध का दूध पानी का पानी किया। वे बधाई के पात्र हैं।
उत्तराखण्ड का असल सवाल इस समय यह नहीं है कि किसी मुस्लिम दुकानदार ने अपनी दुकान का नाम ‘बाबा’ क्यों रखा, असल सवाल वो है जो Ajit Anjum सर की इस फोटो में पीछे दीवार पर किसी इबारत की तरह चस्पा है. ग़ौर से देखिएगा.-मनु पंवार, वरिष्ठ पत्रकार

मूल खबर…
उत्तराखंड में कोटद्वार का ये ASP अजीत अंजुम पर भड़क क्यों रहा है? देखें वीडियो


