Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रिंट

आज के अखबार : दि एशियन एज में नीट रद्द किए जाने की खबर लीड नहीं है, पहले पन्ने की छोटी सी खबर  

संजय कुमार सिंह

आज मेरे सभी अखबारों में नीट रद्द किए जाने की खबर लीड है। अकेले दि एशियन एज में यह खबर पहले पन्ने पर सिंगल कॉलम में छोटी सी है। यह बताती है कि खबर अंदर है। यहां हिमंत बिस्व सरमा के तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने की खबर लीड है। कहने की जरूरत नहीं है कि नीट की खबर नहीं होती यानी परीक्षा रद्द नहीं हुई होती तो आज हिमंता के तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने की खबर ही लीड होनी थी। ऐसे में 2024 में प्रश्नपत्र लीक होने के बावजूद परीक्षा रद्द नहीं किया जाना और इस बार लीक की खबर के साथ ही नीट रद्द कर दिया जाना मायने रखता है। यह तय करना मुश्किल है कि नीट की परीक्षा अपने कारणों से रद्द की गई है या हेडलाइन मैनेजमेंट के लिए। टाइम्स ऑफ इंडिया ने 2024 की याद की है तो द टेलीग्राफ ने इस बार क्या होगा, विस्तार से बताया है। उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी ने नीट रद्द किए जाने की खबर के बाद कल सोशल मीडिया पर लिखा था, …. यह सिर्फ़ नाकामी नहीं, युवाओं के भविष्य के साथ अपराध है। हर बार पेपर माफिया बच निकलते हैं और ईमानदार छात्र सज़ा भुगतते हैं। अब लाखों छात्र फिर से वही मानसिक तनाव, आर्थिक बोझ और अनिश्चितता झेलेंगे। अगर अपनी तकदीर परिश्रम से नहीं, पैसे और पहुँच से तय होगा, तो फिर शिक्षा का मतलब क्या रह जाएगा? प्रधानमंत्री का तथाकथित अमृतकाल, देश के लिए विषकाल बन गया है।

इसके कुछ घंटे बाद राहुल गांधी ने फिर लिखा, देश के युवाओं के सामने एक गंभीर बात रखना चाहता हूँ। एक काम कीजिए – खुद Google कीजिए: “NEET 2024 की भयंकर चोरी के दौरान NTA का DG कौन था, और मोदी सरकार ने उसे आज कहां बैठाया है?” देखा? समझ आया? BJP इसी तरह आप जैसे लाखों मेहनती विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को इनाम देती है – उनकी रक्षा करती है, ऊपर से उन्हें तरक्की देती है। साफ़ है – मोदी जी और भाजपा आपके भविष्य की चोरी में ख़ुद साझेदार हैं। जिस बाज़ार में आपकी मेहनत, आपके सपने नीलाम हो रहे हैं, उसका एक ही उसूल है – जितनी बड़ी चोरी, उतना बड़ा इनाम। यह बात उन्होंने बंगाल में एसआईआर कराने वालों को इस सरकार में नौकरी असल में तैनाती मिलने पर भी लिखा है। जहां तक 2024 में एनटीए के डीजी रहे सुबोध कुमार सिंह की बात है, द हिन्दू की एक खबर के अनुसार, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के डायरेक्टर-जनरल पद से हटा दिये गये सुबोध कुमार सिंह को 26 अक्टूबर 2024 को इस्पात मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव नियुक्त किया गया है। मई में परीक्षा हुई, विवाद हुआ, परीक्षा रद्द नहीं हुई, छह महीने बाद पोस्टिंग हो गई। इस तरह, सब चंगा सी हो गया। अब खबर है कि वे छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव हैं। दिसंबर 2024 में उनकी केंद्र से मूल कैडर में वापसी हो गई। इसके बाद उन्हें मुख्यमंत्री विष्णु देव साई के प्रमुख सचिव के रूप में नियुक्त किया गया। यह नियुक्ति राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के आदेश से हुई। जाहिर है, उन्हें इनाम ही मिला है पर खबरों के अनुसार, 2024 के लीक की जांच सीबीआई कर रही है।

सीबीआई ने झारखंड के हज़ारीबाग़ स्थित ओएसिस पबलिक स्कूल को पेपर लीक का मुख्य केंद्र बताया। आरोप है कि परीक्षा की सुबह यानी 5 मई 2024 को स्कूल के प्रिंसिपल, डॉ. अहसानुल हक़ और वाइस-प्रिंसिपल, मो. इम्तियाज़ आलम ने कथित तौर पर इस साज़िश के मास्टरमाइंड पंकज कुमार को बिना इजाज़त कंट्रोल रूम में घुसने दिया। कुमार ने एनटीए के ट्रंक खोलने के लिए खास तरह के औज़ारों का इस्तेमाल किया, प्रश्न पत्रों की तस्वीरें खींचीं, और फिर परीक्षा केंद्रों पर भेजे जाने से पहले उन ट्रंक को दोबारा सील कर दिया। ये तस्वीरें हज़ारीबाग़ और पटना में मौजूद “सॉल्वर गैंग” को भेजी गईं, जिन्होंने जवाबों की कुंजी तैयार की। यह कुंजी उन चुनिंदा छात्रों के समूह को दी गईं, जिन्होंने इसके लिए ₹30 से ₹50 लाख तक की रकम चुकाई थी। सीबीआई ने इस मामले में 45 से 50 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर कीं। एजेंसी ने 155 ऐसे छात्रों की पहचान की जिन्हें इस लीक से सीधे तौर पर फ़ायदा पहुँचा था। इन्हें परीक्षा से अयोग्य घोषित करने के लिए उनके नाम एनटीए के साथ साझा किए गए। भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने सीबीआई की जाँच के नतीजों की समीक्षा की। कोर्ट ने पूरे देश में दोबारा परीक्षा कराने का आदेश न देने का फ़ैसला किया। दरअसल ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि यह सब बड़े पैमाने पर हुई “व्यवस्थागत चूक” थी।

मुझे लगता है कि चुनाव चोरी-वोट चोरी नहीं रोकने वाला सिस्टम परीक्षा में चोरी तो क्या ही रोकता उसकी भी पवित्रता कायम रखने में अक्षम है। जिम्मेदार लोगों को इनाम मिल रहा है, सो अलग। परीक्षा या चुनाव या फैसले की पवित्रता बनाए रखने के लिए जो सख्ती दिखनी चाहिए वह नहीं दिख रही है और इसीलिए यह तय करना मुश्किल है कि जो परीक्षा पिछली बार इतना सब साबित होने पर भी रद्द नहीं हुई वह इस बार इतनी जल्दी कैसे और क्यों रद्द कर दी गई। अगर चोरी या लीक ज्यादा बड़ी थी तो पिछली बार से क्या सीख ली गई, ऐसा कैसे संभव हुआ और बड़ी नहीं थी फिर भी रद्द कर दी गई तो आखिर क्यों। पिछली बार के एनटीए प्रमुख को इनाम मिला और इस बार के एनटीए प्रमुख ने कहा है और अमर उजाला में छपा है, पूरी जिम्मेदारी मेरी। खबर के अनुसार, एनटीए के डीजी, अभिषेक सिंह ने कहा है, “मैं पूरे मामले की जिम्मेदारी लेता हूं। पेपर लीक का सिलसिला तत्काल खत्म हो जाना चाहिए। दुर्भाग्य है कि हमारे बच्चों व अभिभावकों के लिए यह बड़ी समस्या बनकर उभरी है। राष्ट्रीय परीक्षा की शुचिता के लिए दो लाख अधिकारी व कर्मी शामिल थे। बड़ी तैयारी के बाद भी पेपर लीक हो गया। यदि किसी परीक्षा में अनियमितता पाई जाती है तो फिर रद्द का फैसला ही होगा। जांच के नाम पर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं किया जाएगा।” मुझे नहीं पता इस व्यवस्था में इस आश्वासन का कितना मतलब है और दि एशियन एज ने इस खबर को पहले पन्ने पर क्यों नहीं छपा है।

आज की बड़ी खबरों में एक यह भी है कि तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक के दो हिस्से हो गये हैं। देशबन्धु में यह चार कॉलम में है तो अमर उजाला में इससे भी बड़ी और सेकेंड लीड है। आप जानते हैं कि बहुमत से 11 सीटें कम होने और समर्थन का आश्वासन होने के बावजूद राज्यपाल ने विजय को विधानसभा में बहुमत साबित करने का मौका देने से पहले लिखित सबूत लाने के लिए कहा और तभी शपथग्रहण हुआ जब संख्या पूरी हो गई। लिखित सबूत जांच लिए गए। अब अन्नाद्रमुक में दो फाड़ होने के बाद 30 बागी विधायक भी टीवीके सरकार को समर्थन देंगे। शपथग्रहण से पहले एक-एक विधायक के लिए परेशान होते विजय के पास अब 30 बागी विधायकों का समर्थन है तो यह खबर बड़ी है लेकिन नीट की परीक्षा दो साल में दूसरी बार रद्द होने का अपना महत्व है। नवोदय टाइम्स में जो खबरें नहीं हैं उससे महत्वपूर्ण यह है कि राहुल गांधी का आरोप पहले पन्ने पर है। इसके अलावा हरदीप पुरी की यह घोषणा भी है कि हमारे पास 2 महीने का ईंधन है। प्रधानमंत्री ने बचत और किफायत करने की सलाह दी, उसकी आलोचना हुई तो उसका बचाव किया गया और अब यह सफाई। हालांकि, कई दूसरे अखबारों की खबर का शीर्षक है, हरदीप पुरी ने कीमत बढ़ने के संकेत दिए। टाइम्स ऑफ इंडिया हो या द हिन्दू – शीर्षक ऐसे ही हैं। हालांकि टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर जो सेकेंड लीड भी है, बताती है कि प्रधानमंत्री ने अपना कारवां छोटा किया है। दिलचस्प है कि प्रधानमंत्री ने एसपीजी से कहा है कि वह उनके कारवां में गाड़ियों की संख्या आधी करने का प्रयास करें। एसपीजी को अगर अपनी ही गाड़ियां कम करनी हो तो यह सुरक्षा की दृष्टि से ठीक नहीं है, साथ चलने वालों की संख्या कम हो सकती है तो सवाल है कि ऐसे फालतू लोगों को लेकर चलते ही क्यों हैं। जहां तक सुरक्षा का सवाल है, जिस ढंग से एम्बुलेंस को जगह दी जाती रही है उससे यही लगता है कि सुरक्षा का कोई खास मतलब नहीं है। जो भी हो, प्रधानमंत्री ने यह भी कहा है कि इलेक्ट्रीक वाहनों की संख्या बढ़ाई जाए पर अतिरिक्त खर्चों से बचने के लिए नई गाड़ी न खरीदी जाए। जाहिर है, यह सब महान बनने-बनाने के प्रयास है और ऐसी खबरों की अपनी जगह होती है। 

आप समझ सकते हैं कि सरकार काम कम करती है हेडलाइन मैनेजमेंट के लिए ज्यादा परेशान होती है। काम करती होती तो एक बार पर्चा लीक होने के बाद दोबारा लीक होने का मतलब ही नहीं है और अमेरिका ने ट्विन टावर वाली घटना के बाद दूसरी घटना नहीं होने दी है। अमेरिका में जो घटनाएं हुई हैं वो ऐसी नहीं हैं कि दोषी का पता नहीं चले या आरोपी को इनाम मिला हो। यहां और भी गड़बड़ी है। सबसे बड़ी जांच एजेंसी से राजनीतिक मामलों की जांच करवाई जाती है और उसके मुखिया के चयन में सरकार मनमानी करती रहती है। आप जानते हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से संबंधित नियम का मामला जमाने से सीबीआई में फंसा था, अब उसपर सुनवाई चल रही है जबकि सीबीआई प्रमुख की नियुक्ति में मनमानी आधी रात की कार्रवाई के समय से ही चल रही है। दि एशियन एज की खबर के अनुसार नई नियुक्ति के लिए पैनल की बैठक हुई लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, सीबीआई प्रमुख के चुनाव का राहुल गांधी ने मजबूती से विरोध किया है। आप जानते हैं कि इसी सीबीआई को 2024 के नीट प्रश्नपत्र लीक मामले की जांच करनी है और अरविन्द केजरीवाल के खिलाफ अदालत द्वारा रद्द किए जा चुके मामले को कायम रखना है। सीबीआई के प्रयास और उसका तरीका तो सार्वजनिक हो ही चुका है। आप जानते हैं कि महान प्रधानमंत्री ने 12 साल विकास करने, बिना सोए, बिना छुट्टी लिए काम करने के बाद देशवासियों से बचत की अपील की है। यह प्रचारित किया गया है कि प्रधानमंत्री विदेश यात्रा का कार्यक्रम ऐसे बनाते हैं जिससे रात में विमान में रहते हैं और होटल का खर्च बचता है। ऐसे प्रधानमंत्री ने बचत की अपील की तो एतराज करने वालों को समझाने के लिए कल सोशल मीडिया पर द हिन्दू अखबार का एक पुराना फर्जी पन्ना घूम रहा था जिसमें बताया गया था कि इंदिरा गांधी ने 1967 में भी ऐसी अपील की थी।

प्रचारकों का कहना था कि युद्ध के कारण हालत ऐसे हो गए हैं कि अब प्रधानमंत्री ने देशहित में बचत की अपील की है। लेकिन लोग पूछ रहे हैं कि युद्ध रुकवा देने वाले प्रधानमंत्री खुद के प्रभावित करने पर कुछ करते क्यों नहीं हैं। प्रधानमंत्री की अपील के बाद ऐसे बहुत सारे मामले चल रहे हैं और उनके विरोधी भी सक्रिय हैं। प्रधानमंत्री के तमाम पुराने भाषण सोशल मीडिया पर घूम रहे हैं उनकी चर्चा अखबारों में नहीं के बराबर होती है लेकिन अपील का मतलब यही है कि आर्थिक स्थिति खराब होना स्वीकार लिया गया है। इसका पता इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर से लगता है। इसके अनुसार एक डॉलर 95.63 रुपए का हो गया है। अब सरकार और सरकार के समर्थक इसपर नहीं बोलते हैं लेकिन सोशल मीडिया पर पुराने वीडियो आराम से दिखाई देते हैं जब प्रधानमंत्री 60-65 रुपए का डॉलर होने पर परेशानी और चिन्ता जताते थे। केंद्र सरकार पर तरह-तरह के आरोप लगाते थे। 

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन