अमर उजाला भी अब दूसरे अखबारों जैसा होने लगा

संवाद न्यूज एजेंसी के नाम से छाप रहा खबरें, राजुल महेश्वरी फेर रहे अतुल जी के सपनों पर पानी, कई जगह अंतिम सांसें गिन रहा है अमर उजाला…

अमर उजाला ने पत्रकारिता के मेरे करियर को नया मोड़ देने का काम किया। मैंने दिल्ली और चंडीगढ़ संस्करण में आठ साल अमर उजाला में विभिन्न पदों पर काम किया। मेरी धारणा थी कि अमर उजाला के मालिक दैनिक जागरण और दैनिक भास्कर के मालिकों की तुलना में कम खराब हैं, लेकिन अब यह धारणा बदल गई है।

अमर उजाला का बेड़ा गर्क करने में शशि शेखर का बड़ा हाथ रहा है। अमर उजाला में 2005 तक बहुत अच्छी और काबिल टीम रही। कई दिग्गज नामी पत्रकार अमर उजाला में थे, लेकिन शशि शेखर ने एक-एक करके सभी अच्छे पत्रकारों को संस्थान छोड़ने पर विवश कर दिया। शशि शेखर हिन्दुस्तान अखबार का बेड़ा गर्क कर चुका है। हिन्दुस्तान में आज एक भी पत्रकार नहीं है, सब कर्मचारी हैं। सब गुलाम हैं।

अमर उजाला राजुल महेश्वरी के नेतृत्व में काम कर रहा है। अतुल जी की मौत के बाद राजुल इस ग्रुप को अच्छा प्रबंधन नहीं दे पाए हैं और विफल साबित हो रहे हैं। अमर उजाला के कई एडिशन घाटे में चल रहे हैं और कई प्रसार की होड़ में भी पिछड़ रहे हैं। ऐसे में अमर उजाला ने स्थायी कर्मचारियों पर अधिक दबाव देना शुरू कर दिया था। पहले काम ठेके पर दिया और अब आउटसोर्सिंग होने लगी है।

कई संस्करणों में बकायदा पत्रकारों की खबरों को संवाद न्यूज एजेंसी का नाम दिया जा रहा है। जो स्टाफर हैं जो कि अब बहुत कम रह गए हैं, उनके नाम के आगे ही अमर उजाला ब्यूरो दिया जा रहा है। तो भाई लोगों जो भी अमर उजाला में काम कर रहे हैं, अब ठिकाना तलाशना शुरू कर दो।

वरिष्‍ठ पत्रकार गुणानंद जखमोला की फेसबुक वॉल से.

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Comments on “अमर उजाला भी अब दूसरे अखबारों जैसा होने लगा

  • Raj Trivedi says:

    धन्यवाद दुष्यन्त जी , आप की बात से मैं भी शत प्रतिशत सहमत हूँ। अमरउजाला के साथ मैं भी 1996 से जुड़ा रहा पहले मेरठ और बाद में हिमाचल संस्करण के साथ। शशि के आने के बाद सारा माहौल बदल गया , राजन तोड़रिया जी की बात सही थी कहते थे भाई साहिब अब यहाँ काम करने का मन नहीं करता। अतुल भाई साहिब की बहुत याद आती है लेकिन शायद वे भी अन्तिम समय में विवश हो गये थे। मैंने भी मुख्य धारा से किनारा कर लिया। ईश्वर आप की कलम को ऐसी ताक़त बनाये रखें।

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  • bhakt M Pun says:

    Rajul Maheshwari is a incompetent businessman. he does not even know the basis of news paper business. Atul ji was a great leader. he knows the importance of human resources in traditional family owned business house. Rajul Maheshwari ji always needs support to even stand for any type of small business decision , resulted thereby some people make huge amount of money in there pocket. Rajul maheshwari shows the door to important and loyal team of Atul ji and today entire team of Amar Ujala consist of greedy and dishonest people. Sumeet sood, Raghvandra sharma, Lalit Chaturvedi and some other important media personalities who are core team of Amar Ujala management in the era of Atul ji, have shown door dishonestly. Now Amar Ujala is almost on ventilator. Management of Rajul Maheshwari is responsible for the loot of his own company. I was the witness of massive loot of financial and other resources in Amar Ujala during 2010 to 2017 era.

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