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अंकिता को न्याय दिलाने की बजाय एक इन्फ्लुएंसर की “खूबसूरती” में डूबा है न्यूज़18

देहरादून/हल्द्वानी। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर पूरा उत्तराखंड सर्दियों में भी आंदोलन की ताप से गुजर रहा है। सड़कों पर इंसाफ की मांग है, सरकार कटघरे में है और न्यायिक प्रक्रिया पर जनता की निगाहें टिकी हैं। लेकिन इसी बीच डिजिटल मीडिया के एक हिस्से का फोकस धीरे-धीरे मूल सवाल से खिसकता दिख रहा है।

न्यूज18 डिजिटल की वायरल हेडिंग इसका ताजा उदाहरण है, जहां अंकिता भंडारी केस की गंभीरता की बजाय एक इन्फ्लुएंसर की “खूबसूरती”, गिरफ्तारी और 14 दिन की जेल को केंद्र में रखकर कहानी गढ़ी गई। यह हेडिंग बताती है कि डिजिटल स्पेस में क्लिक और ट्रैफिक की दौड़ किस तरह खबर के नैतिक केंद्र को पीछे धकेल देती है।

यहां यह समझना भी जरूरी है कि इसे केवल रिपोर्टर या कॉपी डेस्क की संवेदनहीनता कहकर खारिज नहीं किया जा सकता। डिजिटल न्यूजरूम पर “नंबर लाने”, ट्रेंड पकड़ने और एल्गोरिदम साधने का जबरदस्त दबाव है। उसी दबाव में कई बार न्याय, जवाबदेही और सत्ता से सवाल जैसे मूल मुद्दे, सेलेब्रिटी टच, सनसनी और विजुअल अपील के नीचे दब जाते हैं।

सवाल यह नहीं है कि एक इन्फ्लुएंसर की गिरफ्तारी खबर है या नहीं—सवाल यह है कि क्या अंकिता भंडारी की हत्या, सत्ता-संरक्षण के आरोप और सिस्टम की जवाबदेही से बड़ी खबर कोई और हो सकती है?

डिजिटल मीडिया की यह प्राथमिकता ही आज की सबसे बड़ी बहस है।

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