आर. अनुराधा का निधन

नई दिल्ली । भारतीय सूचना सेवा की वरिष्ठ अधिकारी और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग में संपादक आर. अनुराधा नहीं रहीं। वे लम्बे समय से कैंसर से जूझ रही थी। 2005 में अनुराधा ने कैंसर से अपनी पहली लड़ाई पर आत्मकथात्मक पुस्तक लिखा था, “इंद्रधनुष के पीछे-पीछे : एक कैंसर विजेता की डायरी”। यह किताब राधाकृष्ण प्रकाशन से 2005 में प्रकाशित हुई थी। उनकी एक और महत्वपूर्ण कृति है- “पत्रकारिता का महानायकः सुरेंद्र प्रताप सिंह संचयन” जो राजकमल से जून 2011 में प्रकाशित हुआ था।  वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल की पत्नी होने के वावजूद आर. अनुराधा की अपनी अलग लेखकीय पहचान थी।

केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाह ने आर. अनुराधा के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा- भारतीय सूचना सेवा की अधिकारी, सामाजिक मुद्दों पर प्रखर-बेबाक आर.अनुराधा नहीं रहीं। उनके निधन की खबर से काफी मर्माहत महसूस कर रहा हूँ। अनुराधा जी की लेखनी के कारण एक अपनी खास पहचान है पर उनको वरिष्ठ पत्रकार और मेरे अनन्यतम छोटे भाई के समान दिलीप मंडल जी की पत्नी होने की वजह से भी जानता हूँ ।  दिलीप मंडल ने हाल ही में इंडिया टुडे में मैनेजिंग एडिटर के तौर पर अपना काम इसीलिये छोड़ दिया था ताकि आर. अनुराधा की सेवा कर सकें और उनके साथ ज्यादा वक्त गुजार सकें। मै इस दुख की घड़ी में अनुराधा और दिलीप के परिवार के साथ खड़ा हूँ। यह मेरे लिये पारिवारिक क्षति की तरह है। उनके तमाम सहयोगियों, शुभचिंतकों से भी मैं अनुराधा जी के असामयिक निधन पर अपना दुख और हार्दिक संवेदना प्रकट करता हूँ ।

एच एल दुसाद ने आर. अनुराधा के निधन पर फेसबुक पर लिखा, मंडल साहब ने जब इंडिया टुडे से इस्तीफा दिया तभी से हम इस दुखद घटना का सामना करने की मानसिक प्रस्तुति लेने लगे थे। इस बीच अनुराधा जी से मिलने के लिए मंडल साहब के समक्ष एकाधिक बार अनुरोध किया, पर वह मिलने की स्थिति में नहीं रहीं। बहरहाल, इस दुखद स्थित के लिए लम्बे समय से मेंटल प्रिपरेशन लेने के बावजूद आज जब उनके नहीं रहने की खबर सुना, स्तब्ध रह गया। अनुराधा जी विदुषी ही नहीं, बेहद सौम्य महिला थीं। उनके नहीं रहने पर एक बड़ी शून्यता का अहसास हो रहा है। बहुजन डाइवर्सिटी मिशन की ओर से उन्हें अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि।

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Comments on “आर. अनुराधा का निधन

  • pushpranjan says:

    अनुराधा 1990 में दैनिक जागरण नोएडा के न्यूज़ डेस्क पर थीं. निहायत सौम्य और काम के प्रति समर्पित पत्रकार.

    दिलीप मंडल, हम सब, कुछ समय साथ काम कर पाये.
    अनुराधा जी की अपनी पहचान थी.

    उनके निधन की खबर अचानक, और स्तब्ध कर देने वाली है.

    पुष्‍परंजन

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  • DR Subodh Agnihotri says:

    Dilip ji Aaap Log Uttarakhand open University Aaye the Mere Jehan me sari Smaratiya Maujood hain…Anuradha ji ne kafi babaki se apne vichar rakhe the…is news se mai kafi aahat hoon.. uperwala aapko takat de..pure pariwar ko takat de…cancer ka dard mai janta hoon..meri mother bhi isi rog se chali gayee..Anuradhaji ki atma ko shanti….
    Dr Subodh, Associate Professor and Head
    Deptt of Journalism. Vardman Mahaveer open University Kota (Raj)

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