तीन माह के वेतन बकाया को लेकर दर्ज शिकायत के मामले में श्रम विभाग ने APN News प्रबंधन के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। उप श्रम आयुक्त, गौतमबुद्धनगर कार्यालय की ओर से कंपनी को जांच के दौरान आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने और निर्धारित तिथि पर उपस्थित होने का निर्देश जारी किया गया है।
कार्यालय उप श्रम आयुक्त, उत्तर प्रदेश, सेक्टर-3, नोएडा (गौतमबुद्धनगर) की ओर से जारी पत्र में APN News (एफएमसीजी ग्रुप), सेक्टर-68, नोएडा के सेवायोजक/प्रबंधक को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया गया है कि संस्थान के विरुद्ध शिकायत प्राप्त हुई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कर्मचारी को अवैध रूप से कार्य से पृथक किया गया तथा उसका अंतिम भुगतान और वेतन बकाया नहीं दिया गया।
पत्र में उल्लेख है कि प्रकरण की जांच श्रम प्रवर्तन अधिकारी द्वारा की गई। जांच के दौरान कंपनी द्वारा वेतन भुगतान से संबंधित अभिलेख और रजिस्टर प्रस्तुत नहीं किए गए, जबकि इसकी मांग की गई थी। श्रम विभाग ने इसे औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 11(3) के तहत अधिकारों की अवहेलना माना है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सिविल न्यायालय के समकक्ष प्रदत्त शक्तियों की अवहेलना दंडनीय है।
इसके साथ ही वेतन भुगतान अधिनियम, 1936 की धारा 14 के अंतर्गत निरीक्षक द्वारा मांगे गए अभिलेख प्रस्तुत न करना भी दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। यदि मामला न्यूनतम वेतन से संबंधित पाया जाता है तो न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 के प्रावधान भी लागू हो सकते हैं।
उप श्रम आयुक्त कार्यालय ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह संबंधित अभिलेखों सहित सहायक श्रम आयुक्त के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हो। विभाग ने चेतावनी दी है कि अनुपस्थिति अथवा अभिलेख प्रस्तुत न किए जाने की स्थिति में विधिक कार्यवाही प्रारंभ की जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित पक्ष की होगी।
यह मामला एक महिला कर्मचारी के तीन माह के बकाया वेतन से जुड़ा है, जो पिछले लगभग दो वर्षों से भुगतान के लिए प्रयासरत है। श्रम विभाग की इस कार्रवाई से संस्थान की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
अब देखना होगा कि निर्धारित तिथि पर कंपनी प्रबंधन श्रम विभाग के समक्ष क्या जवाब पेश करता है और बकाया वेतन के मामले में क्या समाधान निकलता है।


