ऐप्पल ने केंद्र सरकार के उस निर्देश पर सहमति देने से इनकार कर दिया है, जिसमें सभी नए मोबाइल फोनों में ‘संचार साथी’ ऐप प्रीलोड करना अनिवार्य करने को कहा गया था। कंपनी का कहना है कि यह कदम उसके कड़े प्राइवेसी और सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के अनुरूप नहीं है, इसलिए वह अपने डिवाइस में इस सरकारी ऐप को इंस्टॉल नहीं करेगी। नीचे कुछ प्रतिक्रियाएं पढ़ें….
वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश ने लिखा है-
एप्पल ने सरकार के ‘संचार साथी’ ऐप को अपने फोन सेटों में इन्स्टाल करने के आदेश को मानने से इंकार किया है. भारत सरकार ने सभी सम्बद्ध कंपनियों से कहा है कि मार्च, 2026 तक सभी नये फोन सेट में यह ऐप प्री-इंस्टाल होना चाहिए. इस आदेश को मानने से इंकार की शुरुआत एप्पल ने की है.
भारत में विपक्ष ने सरकार के इस आदेश को एक नये जासूसी-तंत्र के जुगाड़ की संज्ञा दी है.
सरकार ने संचार साथी ऐप बनाया है। दावा किया जा रहा है कि साइबर सुरक्षा के लिए ज़रूरी है लेकिन सभी फोन निर्माता कंपनी को आदेश क्यों दिए गए कि भारत में जो भी फोन बिकेगा उसमें सरकार का ऐप डाउनलोड करना ही होगा। उसे डिलिट नहीं किया जा सकेगा और डिसेबल भी। जब हंगामा उठा कि भारत सरकार इस तरह के ख़तरनाक कदम उठा सकती है तब जाकर सरकार के टेलिकॉम मंत्री ने कहा कि ऐप डिलिट किया जा सकेगा लेकिन वह आदेश जस का तस है। इसका मतलब है कि जितने भी सवाल उठे हैं, उसका जवाब मिलना बाकी है। देखिए हमारा यह बेहद ज़रूरी वीडियो। – रवीश कुमार
अंग्रेजी अखबार टेलीग्राफ लिखता है-
भारतीय सरकार ने गोपनीय रूप से Apple, Samsung और Xiaomi जैसी मोबाइल कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे आगामी 90 दिनों के भीतर अपने सभी नए स्मार्टफोनों में ‘संचार साथी’ (Sanchar Saathi) नामक ऐप को प्रीलोड करें।
यह ऐप चोरी हुए मोबाइल फोनों को ट्रैक करने, उन्हें ब्लॉक करने और उनके दुरुपयोग को रोकने के लिए बनाया गया है। सरकार का मानना है कि इस ऐप के अनिवार्य होने से मोबाइल चोरी और उससे जुड़ी धोखाधड़ी पर प्रभावी लगाम लगेगी।

एनडीटीवी का ट्वीट-
हाल ही में भारत सरकार ने स्मार्टफोन कंपनियों को आदेश दिया था कि वे अपने सभी नए स्मार्टफोन में संचार साथी एप को प्री-इंस्टॉल करके बेचें.
स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी एपल ने भारत सरकार ने इन निर्देशों में मानने से मना कर दिया है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि एपल इस फैसले का विरोध करेगी और अपनी चिंताएं सरकार के सामने रखेगी.
एपल का मानना है कि इस तरह की अनिवार्यता उसके डिवाइसों की प्राइवेसी और सुरक्षा संरचना पर असर डाल सकती है.
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