औरैया | यूपी के औरैया में सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी सुधेश तिवारी (ARTO) ने पत्रकारों के खिलाफ अपने ऑफिस में न घुसने की जंग छेड़ रखी है। वैसे तो ऑफिस के बाहर दलालों का प्रवेश वर्जित लिखना चाहिए था लेकिन सुधेश तिवारी ने एक बोर्ड लगाया जिसमें मान्यता प्राप्त पत्रकारों की सूची को दर्शाते हुए लिखा कि उपयुक्त महानुभावों से इतर किसी अन्य व्यक्ति का कार्यालय में पत्रकार के रूप में प्रवेश पूर्णता अस्वीकार्य एवं प्रतिबंधित है।
आज्ञा से- सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी सुधेश तिवारी औरैया
आमतौर पर आपने सुना होगा कि पत्रकार अधिकारियों के पीछे पड़ जाते हैं लेकिन आजकल औरैया में एआरटीओ सुधेश तिवारी पत्रकारों के पीछे पड़ गए है। इस फरमान के बाद मान्यता प्राप्त पत्रकारों के अलावा अन्य संस्थाओं के पत्रकारों को संशय में डाल दिया है कि आखिर क्या वह एआरटीओ के मानक में पत्रकार नहीं हैं तो क्या वह पत्रकारों की श्रेणी में नहीं आते हैं..?
ARTO औरैया कार्यालय के बाहर बोर्ड पर लिखाई गई सूची का मुख्य कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। जानकारी के मुताबिक विगत कुछ दिनों पहले एआरटीओ साहब ने किसानों के ट्रैक्टर का चालान काटा था जिससे परेशान होकर किसान लामबंद हो गए थे जिसकी खबर पत्रकारों ने चलाई थी। जिसको लेकर साहब बौखला गए और उन्होंने ऑफिस के बाहर बोर्ड लगवाकर पत्रकारों को सचेत कर दिया कि उनके खिलाफ जाने पर उनकी ताकत को पहचान लें।

औरैया जिले के ARTO के इस बोर्ड प्रकरण के बाद सोशल मीडिया पर टिप्पणियों का दौर जारी है, जिसमें एक पत्रकार ने उन्हें सलाह दी है कि वह अपने ऑफिस के कर्मचारी की भी बोर्ड पर सूची जारी करें, जिससे उनके कर्मचारियों की पहचान हो सके।
ARTO औरैया सुधेश तिवारी का पिछला कार्यकाल रहा विवादों में
एआरटीओ सुधेश तिवारी को 2011 में विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण बरेली द्वारा 5 वर्ष के कारावास और आठ हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी. हालांकि, एआरटीओ सुधेश तिवारी जमानत पर हैं. वहीं गृह विभाग के माध्यम से उच्च न्यायालय में चल रही इस कार्यवाही की प्रभावी पैरवी करने के निर्देश परिवहन मंत्री ने दिए थे।


