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सुख-दुख

‘ग्रोक’ को मालूम है चित्रा-अतुल तलाक की असली वजह!

चित्रा त्रिपाठी और अतुल अग्रवाल के अलग होने की वजह क्या हो सकती है..? इसे लेकर लोग अलग-अलग तरह के कयास लगा रहे हैं। हालांकि असल वजह इन दोनों को ही पता होगी। लेकिन एक सोशल मीडिया यूजर ने एलन मस्क वाले ग्रोक से इस टीवी पत्रकार की जोड़ी के अलग होने की वजह पूछी तो ग्रोक ने क्या जवाब दिया पढ़ें…


सत्येंद्र पीएस-

मनुष्य का जीवन तरह तरह की जटिलताओं से भरा हुआ है। अभी अतुल अग्रवाल और चित्रा त्रिपाठी का मसला सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। लोग तरह तरह सेअपनी भड़ास निकाल रहे हैं।

अतुल अग्रवाल को तो बहुत नहीं जानता। चित्रा ने एक सिटी केबल से करियर शुरू किया और टॉप पर पहुचीं।और जब उनका जीवन आर्थिक अभावों से मुक्त, सुखद, शांतिपूर्ण होना चाहिए था, तब तलाक की खबर आ गई।

इन दोनों के खराब होते सम्बन्ध की खबरें 2015 के आसपास से ही सार्वजनिक होने लगी थीं। मुझे जहां तक याद है कि 2008 के आसपास चित्रा दिल्ली की मीडिया में शिफ्ट हुई और 2015 तक उनका करियर पीक पर पहुँच गया। मोटी सेलरी के जोन में चली गई और हिंदी की कुछ टॉप एंकर्स।में शामिल हो गईं। और उसी समय से दोनों के बीच कटु सम्बन्ध भी सार्वजनिक होने लगे थे।

एक और खबर चल रही है जिसमें एक महिला ने अपने पति की हत्या करके उसे ड्रम में सीमेंट से पैक कर दिया। वह भी एक ऐसे पागल जैसे प्रेमी के लिए, जो निहायत मनोरोगी सा है।

तरह तरह की अशांतियाँ हैं जीवन में। कब किसका क्या हो जाए, कुछ पता नहीं। हमारे जैसे घलुआ में मिली जिंदगी जीने वाले लोग हैं, जो जिंदगी में कई बार मौत को करीब से देखकर निकल आए। तमाम ऐसे लोग हैं जो खड़े खड़े चलते फिरते पटाक से गिर रहे हैं और खत्म हो जा रहे हैं।

तो जहां तक पार लगे, प्रेम से रहें, प्रेम में रहें। उसके बावजूद भी अगर जिंदगी की कड़वाहट में फंस जाते हैं, तब भी जिंदगी को जीने की कोशिश करनी ही चाहिए। धन कोई विशेष रोल अदा नहीं करता कि आप सुख से जी पाएंगे या नहीं। चित्रा और अतुल का जीवन भी शांत और सुखमय हो, यही कामना है।

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2 Comments

2 Comments

  1. भानप्रकाश

    March 21, 2025 at 5:22 pm

    यशवंत‌ जी मीडिया के लिए एक क्रांतिकारी हैं । जिन्होंने मीडिया के लोगों के लिए एक ऐसा प्लेट फ्राम दिया जिनकी कोई नहीं सुनता मालिक उनका शोषण करते थे और उनको युज इन र्थो करके रखा हुआ था । उससे उन लोगों को अपनी भाडाष निकाने के लिए स्थान दिया जिससे ऐसे पत्रकारों दुबारा से अपने जीवन को सकुन से जिने के लिए अच्छा लगता है और उन मालिक और संपादकों की मडो को ठीक करने के लिए भी मौका दिया जो अपनी निजी सुख के लिए पत्रकारों परेशान और शोषण करने का काम करते हैं। यशवंत जी उन पत्रकारों के एक परिवार एक अभिभावक की भूमिका निभा रहे हैं जो बच्चा बाहर पिटने के बाद घर पर आकर अपने पिता से सहानुभूति की अपेक्षा करता है यशवंत जी उसी की तरह हैं इनके बारे जितना कहा जाये उतना काम है।

  2. shyam aneja

    March 23, 2025 at 11:39 am

    Jab aurut aadmi se jyada paise kamane lug jaaye .tab oss ko jarurat mehsoos nhi hoti. Jab aadmi ka affair ho.ya aadmi apne se kamjor lage.

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