सत्येंद्र पीएस-
ध्यान, विपश्यना, योग आदि की इस समय खूब मार्केटिंग है। इसका बड़ा बाज़ार है। तमाम लोग इसके बिजनेस में उतरे हैं। विपश्यना को लेकर भी तमाम तरह का चिंतन है। मुझे बाज़ार के बारे में नहीं पता, जिसको पार्कों से लेकर हर मोहल्ले में खुले बाबाओं के कार्यालयों में सिखाया जाता है।
बुद्धिज्म में समता या समथा और विपश्यना क्या है? उसके बारे में थोड़ा बहुत पढ़ा है और थोड़ा प्रैक्टिस किया है। इसकी तरफ आकर्षित करने वाले मेरे गुरु राजेश मित्तल हैं। उनके लिखे ने मुझे सत्यनारायण गोयनका गुरु के इगतपुरी केंद्र की तरफ आकर्षित किया। मित्तल जी के लिखे से इतना समझ मे आया था कि इगतपुरी सेंटर में रहना खाना फ्री है, कोई पैसा नहीं लगता। आप केवल ऑनलाइन बुकिंग कराकर समय से वहां पहुंच जाइये। ट्रेन का आने जाने का भाड़ा चुकाना होता है।
मैं इगतपुरी गया। यह देखकर कि वेस्टर्न घाट बारिश में बहुत खूबसूरत होता हैं। फ्री में तमाशा देखना है तो देख लेते हैं! 3 दिन बेचैनी में गुजरे। चौथे दिन से नॉर्मल हो गया और मैंने विपश्यना पूरा कर लिया।
मुझे उसका कोई लाभ हुआ, न मेरे चाल चरित्र में कोई बदलाव आया। बुद्धिज्म के प्रति मेरा आकर्षण जितना पहले था, उतना ही बना रहा।
उसके बाद मैं अमित कुमार निरंजन के साथ लुम्बिनी गया। लेकिन वहां भी मामला लॉन्ग ड्राइव और टूरिज्म तक सिमटा रहा। फिर काठमांडू गया। वहां श्रीधर राणा रिनपोछे जी से असल समस्याओं पर बात हुई। उस समय तो ज्यादा कुछ समझ में नहीं आया लेकिन उनकी कुछ बातें अंदर तक बैठ गईं। पहाड़ों और निर्जन स्थानों पर शांति पाना विपश्यना नहीं है, आप बीवी से न लड़ें, ऑफिस में समथा बनाए रखें, चौराहों की भीड़ पर आपको इरिटेशन न हो, यह विपश्यना है। यह मामला कुछ अपने मन माफिक लगा और थोड़ा थोड़ा समझ में आया।
खैर… शॉर्ट में विपश्यना पर बात करते हैं। यह पाली में विपस्सना है, संस्कृत में विपश्यना। इसका मतलब होता है विविधेन, विशेषेण, पश्यना।
यानी किसी चीज को विविध तरीके से या आंग्ल भाषा में कहें तो Multi dimensional approach से Holistically देखना है। किसी चीज को विशेषेण यानी आंग्ल भाषा में कहें तो Special way of thinking से देखना है। पश्यना का मतलब देखना यानी too see ही होता है।
यानी जब हम किसी चीज को संपूर्णता से और विशेष नजरिये से देखते है तो उसे विपश्यना कहा जाता है।
अब आगे सवाल है कि देखना क्या है? फिर वही बात कि अन्य विधाओं का मुझे नहीं पता। बुद्धिज्म में 4 चीजें देखनी होती हैं। अनित्यता यानी Impermanence, दुःख यानी Suffering, अनात्म यानी No Self और शून्यता यानी Emptiness। पाली में उसे अनित्ततो, दुःखतो, अनत्ततो और सुय्यतो कहा गया है। इन्हीं 4 चीजों को अगर आपने समग्रता के साथ विशेष तरीके से देख लिया तो आपको आपके दुःख की समझ हो जाएगी और उससे निपटने का मार्ग भी मिल जाएगा।
अब यह बहुत विस्तार की बात है कि अनित्यता, दुःखता, अनात्मता और शून्यता क्या है, इस पर फिलहाल बात नहीं करूंगा।
मुझे उम्मीद है कि विपश्यना का कुछ कुछ मतलब स्पष्ट करने में मैं सफल हुआ हूँ। हमारे यशवंत सिंह भैया विपश्यना करने जा रहे हैं तो सोचा कि थोड़ा इस पर ज्ञान दे दिया जाए। साथ ही उनको अपना अनुभव भी बताया कि तीन दिन तक वहां आपकी खूब सुलगेगी, सारा ज्ञान फटकर बाहर आ जाने को बेताब होगा। चौथे दिन के बीतने के साथ थोड़ी शांति मिलेगी और आपको यह मन नहीं करेगा कि गरियाकर निकल लें यहां से। तो उम्मीद है कि यशवंत भैया वहां से गरियाकर निकलेंगे नहीं।


