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आज के अखबार : भाजपा ने बिहार चुनाव को मुश्किल बना दिया है और देश की कई समस्याएं जस के तस हैं

संजय कुमार सिंह

बिहार चुनाव से संबंधित भाजपाई कोशिशों और खबरों का जवाब आज के अखबारों में है। आप जानते हैं कि टिकट वितरण के बाद बहुत सारे लोगों को यह चिन्ता हो गई थी कि विपक्ष के उम्मीदवारों में मुस्लिम कम हैं, नहीं हैं या कितने प्रतिशत हैं। वैसे तो यह बहुत ही सामान्य जिज्ञासा है लेकिन चुनावों में खुलकर हिन्दू-मुस्लिम करने वाली भारतीय जनता पार्टी जो करती रही है उसमें दूसरी पार्टियों के लिए चिन्ता यूं ही नहीं थी। मकसद यह रहा होगा कि दबाव में विपक्ष कुछ मुसलमानों को टिकट दे दे फिर उस पार्टी को मुसलमानों का हित चिन्तक घोषित करके उसके हिन्दू वोट कटवाए जा सकें। छोटे-मोटे नेताओं को तो छोड़िए, खुद प्रधानमंत्री विपक्ष पर ऐसे आरोप लगा चुके हैं। ऐसे में आज तेजस्वी यादव का यह कथन प्रमुखता से है, वक्फ बिल को कूड़ेदान में फेंक देंगे। यही नहीं, देशबन्धु में यह खबर लीड है और उपशीर्षक के अनुसार, यह भी कहा है कि नीतिश कुमार ने सांप्रदायिक ताकतों का समर्थन किया है, उन्हीं की वजह से आरएसएस और उसके सहयोगी संगठन राज्य और देश में सांप्रदायिक नफरत फैला रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा को भारत जलाओ पार्टी कहा जाना चाहिए। मैं नहीं कह रहा है कि यह सब कहना ठीक है लेकिन भाजपा ने चुनावों का जो हाल कर दिया है उसमें यह तेजस्वी की मजबूरी हो सकती है। कहने की जरूरत नहीं है कि टिकट बंटवारे में नहीं, व्यवहार में सामाजिक न्याय दिखना चाहिए और यह दिख भी रहा है। इसलिए इससे परेशानी स्वाभाविक है और मुझे लगता है राहुल-तेजस्वी भाजपा प्रचारकों के झांसे में नहीं आए। अब अपने ढंग से भाजपा की चाल का जवाब दिया है। इसलिए यह गलत भी हो तो प्रशंसनीय है और इसीलिए मेरा मानना है कि भाजपा ने बिहार चुनाव को मुश्किल बना दिया है।

इसका पता ऑपरेशन सिन्दूर से लेकर, सिन्दूर भेजने की योजना ही नहीं, फौजी की वर्दी में प्रधानमंत्री के पोस्टर-होर्डिंग से भी चलता है। आदर्श आचार संहिता का कोई पता नहीं है और एसआईआर के लाभ भी अनजाने हैं। मतदाता सूची में जो शिकायतें पहले थीं, वही अब भी हैं। शिकायतकर्ता भले बदल गये हों। लाभ का तो पता नहीं, मतदाताओं को इसकी आड़ में खूब परेशान किया गया। आज शाम को जब छठ जैसी पूजा है, प्रधानमंत्री के छठ घाट जाने की तैयारी है और उसके लिए यमुना के पानी को साफ करने की कोशिशों का प्रचार और यमुना किनारे साफ पानी का अलग घाट बनाकर उसमें साफ पानी भरकर छठ के लिए यमुना को साफ करने का दावा और प्रचार है तब ऐन छठ के समय प्रेस कांफ्रेंस के मायने समझना मुश्किल है। खासकर तब जब पिछली प्रेस कांफ्रेंस इतवार को हुई थी। इस बार सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस रखने का कारण जो भी हो, बिहार चुनाव में आयोग की भूमिका निष्पक्ष की तो नहीं ही है, भागीदार की लग रही है। प्रेस कांफ्रेंस के बाद शायद और स्पष्ट हो सके पर वह अलग मुद्दा है। लेकिन भाजपा की धार्मिक राजनीति के कारण बिहार में जाति की राजनीति चरम पर है। इतनी कि हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार, चुनावी नब्ज पढ़ने के लिए बिहार के विधायकों की जाति का नया डेटाबेस पेश करने जा रहा है। जाहिर है, भाजपा की हिन्दू-मुसलमान की राजनीति बिहार की जातिवादी व्यवस्था में या तो बहुत मुश्किल में है। जो स्थितियां हैं उसमें आसान नहीं हो सकती हैं तो मुश्किल ही मानिए। हिन्दू-मुसलिम राजनीति को हवा देने के लिए भाजपा ने दिल्ली में अपनी सरकार बनने के बाद सुप्रीम कोर्ट से पटाखे चलाने की इजाजत देने-दिलवाने का दावा किया है। इसके परिणामस्वरूप दिल्ली की हवा प्रदूषित हो गई है। इसके आरोप से बचने तथा इसे नजरअंदाज करने के लिए सरकार समर्थक तरह-तरह की दलीलें दे रहें हैं। इसमें, ‘मुझे तो कुछ खराब नहीं लगता’ जैसी दलील भी है लेकिन प्रदूषण कम बताने-दिखाने की कोशिशें भी जगजाहिर हैं। इतनी कि आज टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक है, डेटा गायब नहीं होता तो दीवाली पर एक्यूआई ‘गंभीर’ (सीवियर) के करीब होता। मोटे तौर पर खबर यह है कि दीवाली की रात जब प्रदूषण सबसे ज्यादा था तब इसकी निगरानी करने वाले 39 स्टेशन में से सिर्फ 12 काम कर रहे थे।   

खबर के अनुसार, 29 स्टेशन ने जब डेटा देना बंद किया तो अधिकतम एक्यूआई 500 था और जब दोबारा शुरू हुआ तो भी एक्यूआई 500 ही दर्ज किया गया। तथ्य यह है कि दीवाली के अगले दिन एक्यूआई 351 दर्ज किया गया जो पिछले दिन यानी दीवाली पर सिर्फ 345 था। इस आंकड़े से यह साबित करने की कोशिश की गई कि दीवाली के दिन प्रदूषण ज्यादा नहीं था। सच्चाई यह है कि 500 एक्यूआई रिकार्ड करने वाले 29 सेंटर बंद थे इसलिए औसत कम हो गया होगा। इसके साथ खबर यह भी है कि आम आदमी पार्टी के नेता ने सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर दावा किया है कि ऐसे ही एक केंद्र के बाहर चार ट्रक लगातार चक्कर लगा रहे हैं और पानी छिड़क रहे हैं। मकसद यह है कि एक्यूआई कम रिकार्ड हो। अगर सभी या ज्यादातर केंद्रों के बाहर ऐसा कर दिया जाए तो रिकार्ड होने वाला एक्यूआई वास्तविकता से दूर होगा। आप समझ सकते हैं कि हिन्दुओं को खुश करने के लिए सुप्रीम कोर्ट पर दबाव डालकर आदेश बदलवाने वाली भाजपा सरकार आतिशबाजी चलाने से प्रदूषण नहीं बढ़ा साबित करने के लिए क्या कुछ कर रही है या कर रही हो सकती है। एक निर्वाचित (या वोट चोरी से सत्ता पाई) सरकार के लिए नागरिकों और सुप्रीम कोर्ट को इस तरह धोखा देना कितना अनुचित या अनैतिक है – यह मीडिया की चर्चा में आ जाए तो आज ही ऐसे सारे काम बंद हो जाएंगे पर मीडिया को नियंत्रण में रखकर ही मन की बात करने का मतलब है और वही हो रहा है।

नतीजतन हिन्दुओं की समर्थक होने का दावा करने वाली सरकार लोगों के स्वास्थ्य को खतरे में डालकर धर्म की रक्षा करने का दावा कर रही है। इसी क्रम में आज प्रधानमंत्री उत्तरी दिल्ली के वासुदेव घाट पर छठ जा में भाग लेने वाले हैं। यह खबर (सिर्फ) द हिन्दू में पहले पन्ने पर संक्षिप्त खबरों में है। आम आदमी पार्टी का आरोप है कि इसके लिए विशेष घाट बनाया गया है जो यमुना से अलग है और इसमें बाहर से लाकर साफ पानी डाला गया है। सरकार के सबसे बड़े प्रचारकों में एक, जागरण डॉट कॉम ने लिखा है, दिल्ली में पहली बार कोई प्रधानमंत्री छठ पर्व में होगा शामिल। खबर है, दिल्ली में छठ महापर्व की तैयारी ज़ोरों पर है। यमुना किनारे घाटों पर श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए हैं। इस बार घाटों की संख्या और चौड़ाई बढ़ाई गई है, ताकि सुगमता और सुरक्षा बनी रहे। प्रधानमंत्री मोदी वासुदेव घाट पर पूजा करेंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को निर्देश दिए। सरकार स्वच्छ और सुरक्षित पर्व सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। दिल्ली में इस बार भाजपा की सरकार है और बिहार में चुनाव भी। ऐसे में छठ के लिए सहूलियत देकर भाजपा चुनावी लाभ की उम्मीद में होगी। इसीलिए खबर है, दिल्ली में इस बार छठ महापर्व का आयोजन पहले से कहीं अधिक भव्य और सुव्यवस्थित होने जा रहा है। राजधानी के यमुना किनारे स्थित घाटों पर दिल्ली सरकार ने श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए हैं। पिछले वर्षों में भीड़ और अव्यवस्था के कारण भक्तों को पूजा-अर्चना में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, वहीं इस बार सरकार ने घाटों की संख्या के साथ-साथ उनकी चौड़ाई भी बढ़ा दी है, ताकि श्रद्धालुओं को सुगमता और सुरक्षा दोनों मिल सके। पिछले साल तक जहां सुरक्षा व प्रतिबंध के चलते यमुना नदी के पास बांस-बल्ली लगाकर श्रद्धालुओं की पहुंच सीमित कर दी जाती थी, वहीं इस बार दिल्ली सरकार ने नदी के दोनों किनारों पर अलग-अलग घाट बनवाए हैं।

इसके अलावा, सरकार के प्रचार की खबर दि एशियन एज में लीड है। शीर्षक है, प्रधानमंत्री ने नक्सल विरोधी अभियान की प्रशंसा की, लाल आतंक खत्म करने का प्रण किया। कहने की जरूरत नहीं है कि देश में भगवा आतंक भी एक मुद्दा है और उससे संबंधित मामले में पुलिस जांच का जो हाल रहा है उसमें आरोपी बच गए हैं। ऐसी पुलिस लाल आतंक के मामले में क्या करेगी और कितनी कामयाबी दिलाएगी से अलग,खबरें आती रही हैं कि नक्सलियों को गोली से उड़ाया, मुठभेड़ में मारा और हाल में पड़ी संख्या में नक्सलियों के हथियार और समर्पण की भी खबर थी। इससे पहले सरकार आतंकवाद खत्म करने का दावा करती रही है और तमाम संदिग्ध मामलों से संबंधित कई सवालों के जवाब नहीं है। आतंकी वारदात तो पहलगाम में भी हुई, उसका राजनीतिक उपयोग करने के लिए ऑपरेशन सिन्दूर शुरू हुआ वह अचानक बंद हो गया और ट्रम युद्ध विराम कराने का दावा करते रहे, प्रधानमंत्री ने उसपर कुछ नहीं कहा है। अब लाल आतंक खत्म करने का दावा कर रहे हैं जबकि जम्मू में आतंकियों के साथ पकड़े गए पुलिस अफसर की कहानी का खुलासा अभी तक सरकार या मीडिया ने नहीं किया है। खबरों के अनुसार जनवरी 2020 में श्रीनगर हवाई अड्डे पर रणनीतिक अपहरण विरोधी टीम में तैनात एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को दो आतंकवादियों के साथ गिरफ्तार किया गया थ। कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) विजय कुमार ने कहा था कि यह एक “जघन्य अपराध” है और दविंदर सिंह के साथ आतंकवादियों जैसा ही व्यवहार किया जा रहा है तथा सभी सुरक्षा एजेंसियां ​​उससे संयुक्त रूप से पूछताछ कर रही हैं। इसके बाद से इस मामले में कोई सूचना नहीं है। सरकार आतंकवाद खत्म कर देने का दावा करती है। इसके बावजूद पहलगाम हुआ। 

ऐसी सरकार के मुखिया अपने प्रचार में कह रहे हैं, 21वीं सदी भारत और आसियान की, हमारे ऐतिहासिक- सांस्कृतिक रिश्ते। यह अमर उजाला की लीड है। लगभग यही लीड आज द हिन्दू में, हिन्दुस्तान टाइम्स, इंडियन एक्सप्रेस और नवोदय टाइम्स में है। द टेलीग्राफ और पश्चिम बंगाल की चिन्ता अब पश्चिम बंगाल में होने वाला एसआईआर है। खबर के अनुसार, बंगाल में मतदातओं की बूथवार आधिकारिक तुलना के अनुसार, 2002 की मतदाता सूची का मिलान मौजूदा मतदाता सूची से किया जाए तो पाया गया है कि बमुश्किल 55 प्रतिशत ही मेल खाते हैं। इससे यह डर फैल गया है कि आगामी एसआईआर के दौरान यहां भी बड़े पैमाने पर नाम कटेंगे। बंगाल में भाजपा की कोशिश पुरानी है। अभी तक मुंह की खाती रही है। इस बार कुछ नया होना है। एसआईआर नया हथियार है देखना है इसका इस बार कितना उपयोग होता है। इस बीच आज सरकार की कार्यकुशलता, प्रभाव, प्रशासन और विकास की खबरों पर भी नजर डाल लें जिन्हें पर्याप्त महत्व नहीं मलता है।

लीड की आज की खबरें इस प्रकार हैं 1. दिल्ली में एसिड अटैक का मामला – एसिड की बिक्री बंद करने के आदेश के बावजूद हुआ है। स्थिति यह है कि पूरे एनसीआर में एसिड लगभग आराम से मिलता रहा है।

2. निलंबित डीआईजी भुल्लर के दो फ्लैट दुबई में और कनाडा में तीन फ्लैट मिले। यह ना खाऊंगा ना खाने दूंगा की घोषणा के बावजूद है। कहने की जरूरत नहीं है कि भुल्लर न तो एक दिन में सोनम वांगचुक हुए होंगे ना एक दिन में कमा लिया होगा। (नवोदय टाइम्स से)

3. एक्सप्रेसवे पर चलती एसी बस में आग, यात्री सुरक्षित – यह हाल फिलहाल में तीसरा मामला है। हालांकि इस पर कोई हताहत नहीं हुआ है। पर सरकार का कोई आश्वासन नहीं है। भारत में सड़क यातायात शुरू से खतरनाक रहा है। एकसप्रेसवे के बाद इसमें सुरक्षा जरूरी है। लेकिन बसों में आग लगने नए मामले में सरकाक की चुप्पी कानफाड़ू है। (अमर उजाला

4. अमेरिकी सेक्रेट्री ऑफ स्टेट ने कहा है कि अमेरिका पाकिस्तान से संबंध बढ़ा रहा है लेकिन यह भारत की कीमत पर नहीं है। (टाइम्स ऑफ इंडिया)

5. महाराष्ट्र में डॉक्टर की आत्महत्या का मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। शक तो पहले दिन ही था। अब जो कार्रवाई हुई है उसे छोड़िए, राहुल गांधी ने कहा है, यह आत्महत्या नहीं, संस्थागत हत्या है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में जब तक न्याया नहीं होगा, चैन से नहीं बैठेंगे। (द हिन्दू, देशबन्धु)

6. नीतिश कुमार एक बड़ी चुनावी चाल के तहत छठ के खरना के दिन चिराग पासवान के घर गए। हिन्दुस्तान टाइम्स ने फोटो पहले पन्ने पर प्रमुखता से छापी है।

7. बिहार चुनाव पर इंडियन एक्सप्रेस का एक शीर्षक सरकारी प्रचार वाला है। पटना में बदलाव की आवाज लेकिन नीतिश को इसके एजेंट के रूप में देखा जा रहा है। इसका मतलब तो यही हुआ कि पलटू मार इस पलट सकते हैं। देखा जाए।

8. अमेरिका से हरियाणा के 50 लोग वापस भेजे गए। इनलोगों ने कहा है कि एजेंट ने ठग इसलिए गैर कानूनी तरीके से गए। यह भी पुराना मामला है। जमाने से चल रहा है। विकास की आंधी के बावजूद इसे रोका नहीं जा सकता है। (एजेंट ने ठग लिए – शीर्षक सिर्फ इंडियन एक्सप्रेस में) 

छठ पर बिहार जाना, दिल्ली आना – जमाने से चली आ रही समस्या है। अब तो ट्रैफिक दोनों तरफ से है और ट्रेन चलाई जा सकती है। फिर भी कुछ नहीं हुआ है। अपने समय में मैं समझता था कि एक-तरफा ट्रैफिक होने के कारण सरकार कोई व्यवस्था नहीं कर सकती है। लेकिन अब तो बहुत सारे लोग दिल्ली आते हैं क्यों बचचे दिल्ली में छठ करने लगे हैं। बहुत सारे बच्चे वापस गांव जाते हैं क्योंकि गांव जैसा छठ दिल्ली में नहीं हो सकता है। ऐसे में विशष ट्रेन चलाना संभव है लेकिन इच्छा शक्ति हो तब ना? और वही होता तो वरिष्ठ नागरिकों की छूट काटी जाती। और वही होता तो फर्जी जीएसटी माफ कीजिएगा – फर्जी बचत उत्सव मनाने की सलाह दी जाती। छट पर बिहार जाने के मामले में न के बराबर कार्रवाई हुई है। चुनावी साल होने के नाते राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश में 12 हजार ट्रेन चलाने की घोषणा और फिर तीन लोगों का ट्रेन से गिर जाना – रील मंत्री की योजनाओं पर भारी पड़ा। बहुत सारी गैर जरूरी बातें भी चर्चा में आ गईं। यह भी कि भाजपा सरकार स्वास्थ्य खराब करके आतिशबाजी चलाने की इजाजत दिला रही है और छठ पर घर जाने की व्यवस्था नहीं करती है। आज खबर है, यात्रियों के लिए 30 स्टेशनों पर बनाए होल्डिंग एरिया। फ्लैग शीर्षक है, रेलवे ने छठ के बाद वापस लौटने के लिए किया व्यापक इंतजाम। (देशबन्धु)     

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। चैट जीपीटी का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूलचूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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