बिहार में यूरिया की कालाबाजारी की खबर लिखने पर पत्रकारों पर केस

बिहार के कटिहार जिले से खबर है कि यूरिया की किल्लत से किसानों को जूझना पड़ रहा है और खाद व्यवसायी मालामाल हो रहे हैं. पुलिस की मिलीभगत से खाद की कालाबाजारी में लिप्त व्यवसायी पत्रकारों पर रंगदारी का झूठा मुकदमा दर्ज करा रहे हैं. जिले के फलका में रविवार को कालाबाजारी की खबर लिखने वाले पत्रकारों पर रंगदारी का झूठा मुकदमा कर दिया गया.

कई दिनों से जिले में यूरिया की किल्लत से किसान जूझ रहे हैं. खाद दुकानदार से किसान 500 से 600 रुपये प्रति बोरा यूरिया खरीद रहे हैं. विभिन्न अखबारों में खाद की किल्लत व कालाबाजारी की खबरें आती रही हैं. कालाबाजारी के विरोध में दो दिन पूर्व फलका में किसानों ने रोषपूर्ण प्रदर्शन व रोड जाम भी किया था. तब प्रशासन ने स्थानीय कई खाद व्यवसायी के यहां छापामारी कर बड़ी तादाद में यूरिया खाद बरामद की थी. लेकिन स्थानीय पुलिस व खाद व्यवसायी की मिलीभगत से यूरिया की बरामदगी की बात को दबा दिया गया.

शनिवार को पोठिया बाजार में खाद व्यवसायी 550 रुपया यूरिया की कीमत किसानों से ले रहे थे. किसान इसका विरोध कर रहे थे. तभी मौके पर पहुंचे स्थानीय पत्रकारों को देख कर किसान अपनी पीड़ा बताने लगे. इसी बीच किसानों की साइकिल पर लदे यूरिया बोरे को खाद व्यवसायी ने न केवल उतार लिया, बल्कि किसान व स्थानीय पत्रकारों के साथ र्दुव्‍यवहार किया. मिलीभगत के कारण पुलिस ने बगैर जांच-पड़ताल के आपराधिक मुकदमा पत्रकारों के विरुद्ध दर्ज कर लिया. खाद व्यवसायी व पुलिस की हरकत से पत्रकार दहशत में हैं.

खाद की कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया है. अगर सच उजागर करने वाले पत्रकारों पर इस तरह दमनकारी नीति प्रशासन द्वारा अपनायी गयी, तो फिर मीडिया किस तरह सच को सामने लायेगा. फलका प्रकरण में जिला प्रशासन ने जांच का आदेश दिया है. इस मामले में सोमवार को पुलिस अधीक्षक छत्रनील सिंह ने बताया कि एसडीपीओ राकेश कुमार इस मामले की जांच करेंगे. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है. इधर डीएम प्रकाश कुमार ने एसडीओ को जांच करने के लिए कहा है.



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