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सुख-दुख

संस्मरण : जब चंद्रशेखर ने जेठमलानी को पिटवा कर अपने घर के सामने से भगाया था…

Rajiv Nayan Bahuguna : आज समाजवादी नेता चंद्रशेखर की जयंती बताई जा रही है। मुझे जीवन मे उनका एक ही काम सर्वाधिक पसन्द आया, जब उन्होंने लबार, बड़बोले, ढीठ और दुराग्रही वकील राम जेठमलानी को अपने घर के गेट पर पिटवाया था। 1989 में जब विश्वनाथ प्रताप सिंह प्रधानमंत्री बनने लगे, तो चन्द्र शेखर जल भुन गए । वह वर्षों से pm इन वेटिंग चल रहे थे। अपने घर को कोप भवन बना कर उसमें बैठ गए। इसी बीच लालची वकील जेठमलानी ने मंत्री बनने की प्रत्याशा में vp सिंह के समर्थन का स्वांग भरते हुए दिल्ली में चन्द्र शेखर के गेट पर धरना शुरू कर दिया। यह सर्वथा चिढ़ाने वाली हरकत थी। एक व्यक्ति , जिससे pm पद छिना हो , उसके दरवाज़े पर ड्रामा क्यों?

जेठमलानी ने सोचा कि चन्द्रशेखर बाहर आकर उनसे बहस करेंगे, और फिर वह ज़बान लड़ा कर चंद्रशेखर को हरा देंगे। एक झूठे और थेथर वकील से भला कौन जीत सकता है? इसके लिए वह प्रायोजित कैमरा मैन खुद ही लाये, क्योंकि उस समय निजी चैनलों का प्रकोप न था।

जेठ मलानी को सिर्फ बातें पेलनी आती थीं, जबकि चंद्रशेखर घाघ राजनेता थे। ऐसे कई जेठमलानियों और देवर मलानियों को झेल चुके होंगे। यकायक चंद्रशेखर की कोठी से लगभग 40 या 50 पुरबिये जवान दौड़ते निकले। वह बलिया छपरा की भाषा में एक दूसरे का आव्हान कर रहे थे- “मार ससुर के। चहेट दे बुड़बक के। घुसा देब सब वकिलयी”। उन्होंने आते ही जेठमलानी के गंजे सर पर चटाचट चांटे बरसाने शुरू किए। एक मिनट से पहले जेठ मलानी का कुर्ता, पजामा, तम्बू सब गायब हो गया। वह रोते हुए नङ्गे भागे। फिर तीन मूर्ति या साउथ एवेन्यू लेन से हमेशा 4 किलोमीटर दूर रहे, जो चंद्रशेखर का आवास था। जेठमलानी के प्रायोजित कैमरामैन उन्हीं की दुर्गति को शूट कर जब चन्द्र शेखर के पास गए और घटना की बाबत टिप्पणी चाही, तो उनका जवाब था – मुझे कोई जानकारी नहीं।

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एक बार पूर्व प्रधानमंत्री रह चुके चंद्रशेखर तब वे महज़ पार्टी कार्यकर्ता ही थे, आचार्य नरेंद्र देव को आमंत्रित करने इलाहाबाद गए. आचार्य बीमार थे. वहीं लोहिया मौजूद थे. उन्होंने कहा : आप डॉक्टर लोहिया को ले जाइए. लोहिया बोले, मुझे तो कलकत्ता जाना है. चंद्रशेखर ने कहा. बलिया से चले जाइएगा. बक्सर से ट्रेन है. वहां तक आपको जीप से भिजवा दूंगा. लोहिया बलिया पहुंचे. स्टेशन पर ही पूछने लगे. जीप कहां हैं. चंद्रशेखर ने कहा, इंतजाम हो चुका है. गेस्ट हाउस पहुंचे तो लोहिया ने फिर सवाल दोहराया. चंद्रशेखर ने कहा, शाम तक आ जाएगी. आपको तो वैसे भी कल सुबह निकलना है. लोहिया भड़क गए. अनाप-शनाप बकने लगे. चंद्रशेखर भड़क गए. बोले. ऐसा है डाक्टर साहब. आपकी इज्जत है, तो हमारी भी है. आपको नहीं बोलना तो मत बोलिए. हमें झूठा मत ठहराइए. वो रही जीप और वो रहा रास्ता. आप चले जाएं. लोहिया अवाक रह गए. फिर तीन सभाओं में बोले. आज जबकि राजनीति में चरणों पर लोटने की होड़ मची है, कोई चन्द्रशेखर नहीं हो सकता।

वरिष्ठ पत्रकार राजीव नयन बहुगुणा की एफबी वॉल से. कुछ चुनिंदा प्रतिक्रियाएं पढ़ें…


Ritesh Joshi सही कहा सर ..मुझे अच्छी तरह याद है ..रामजेठमलानी रोते हुए कह रहे थे कि ये उनकी जान लेने की साजिश थी ….उधर चन्द्रशेखर से जब पूछा गया तो उन्होने अपनी चमकती हुई बत्तीसी दिखाते हुए और कुटिलता से मुस्कुराते हुए जबाब दिया …ये बहुत गलत हुआ ..लोगो को अपने जज्बात काबू रखने चाहिये. .

Kulbhushan Mishra हा हा हा मुझे भी याद है। दूध हरदी लेकर घर मिलने भी गये थे।

Jaiprakash Uttrakhandi पूर्व प्रधानमंञी चन्द्रशेखर जी से मैं 1980 दशक की शुरूआत में मिला,जब वे देदून प्रवास पर बिन्दाल फोरेस्ट डाक बंगले में ठहरे थे।हम कुछ साथियों ने उनके लिए मच्छी बाजार से मक्के का आटा व ताजे छाछ की व्यवस्था की थी।तब से वे मुझे ठीक से जानने लगे।1994 में मुजफ्फरनगर काण्ड के बाद पहाड पर क्रफ्यू था और मैं दिल्ली में फरारी काट रहा था,हम कुछ साथी चन्द्रशेखर के घर गये।उन्होने तत्कालिन केन्द्रीय गृहमंञी एसबी चव्हाण को ऐसा हडकाया कि तत्काल पहाड में क्रफ्यू में ढील और समाप्ति हुई।मुझे याद है देश की वर्तमान विदेश मंञी सुषमा स्वराज जी कभी चन्द्रेशेखर जी के अंधसमर्थकों में हुआ करती थी। वे महान और जमीनी नेता थे और अपने अदना समर्थक या आम आदमी से उसके नाम के आगे जी लगाकर बात करते थे।

Gautam Bhatt जी हां..उन दिनों जेठमलानी दशा बहुत उतावली थी.. फटेहाल उठाकर पटकी दशा में जेठमलानी राम राम न जप सके. जबकि तत्कालीन पूरे कांग्रेस जन ने राम राम जपा था जेठमलानी दशा पर..

Chakradhar Kukreti Thrashing of Jethmalani was talk of the town in those days. Chandrasekhar Govt. had to mortgage Indian Gold Reserve in foreign banks to maintain foreign currency reserve. The mortgaged gold was brought back by successive Government.

Vijay Shukla मुझे वो याद है दूरदर्शन पर देखा था बचपन मे। अभी तक जेठमलानी का वो चेहरा याद है ,अपने चांद पर हाथ फेरते हुए कहा रहे थे ,” It was all planned.” ये अभी तक मेरी स्मृति में है

Ashish Uniyal आपकी इस पोस्ट से मेरे आंखों के सामने वह तस्वीर आ गई जब जेठमलानी की पिटाई पर पत्रकार प्रतिक्रिया जानने के लिए चंद्रशेखर जी के पास गए और वह व्यंगात्मक रूप से खुल कर हंस पड़े थे।

Shiv Charan Mundepi रामजेठमलानी जब भी किसी चैनल पर दिखते हैं उस घटना के वही सीन तरोताजा हो जाते हैं जो टीवी के माध्यम से मैन भी देखे थे।

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