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चैनल के दफ्तर को ही बना लिया अय्याशी का अड्डा, रिपोर्टर से कहा बीवी लाओ, उसने पेश कर दी कामवाली

भोपाल पत्रकारिता के लिये आदर्श रहा है लेकिन अब यहां के पत्रकारों में शुमार होने वाले नामों के कारण पत्रकारिता कलंकित होती नजर आ रही है। अगर किसी चैनल के कर्ताधर्ता ही सिर्फ अपनी हवस के लिये अपने कार्यालयों को अय्याशी का अड्डा बनाने लगें तो पत्रकारिता की पवित्रता कैसे बची रह सकती है। पिछले कई दिनों से भोपाल के गलियारों में ये चर्चा आम है कि कुछ ही समय पहले शुरू हुये एक रीजनल चैनल के तथाकथित संचालकों ने अपने एक रिपोर्टर को फरमान सुना डाला कि वह अपनी पत्नी को उनके सामने पेश करे। रिपोर्टर क्या करता?

भोपाल पत्रकारिता के लिये आदर्श रहा है लेकिन अब यहां के पत्रकारों में शुमार होने वाले नामों के कारण पत्रकारिता कलंकित होती नजर आ रही है। अगर किसी चैनल के कर्ताधर्ता ही सिर्फ अपनी हवस के लिये अपने कार्यालयों को अय्याशी का अड्डा बनाने लगें तो पत्रकारिता की पवित्रता कैसे बची रह सकती है। पिछले कई दिनों से भोपाल के गलियारों में ये चर्चा आम है कि कुछ ही समय पहले शुरू हुये एक रीजनल चैनल के तथाकथित संचालकों ने अपने एक रिपोर्टर को फरमान सुना डाला कि वह अपनी पत्नी को उनके सामने पेश करे। रिपोर्टर क्या करता?

नौकरी भी बचानी थी और बीवी की इज्जत और सम्मान भी सो उसने एक युक्ति भिड़ाई। एक कामवाली बार्इ् से बात की। वह थी भी इसी तरह की। उसने सीधे सौदे की बात की। 1000—1500 बात शुरू होकर आखिर में सौदा पटा 500 रूपये पर हैड में। बताया जा रहा है उस महिला को भोगने वालों में 7 लोग शामिल थे। बताया जा रहा है कि रिपोर्टर पर यह काम करने के लिये चैनल के प्रमुख ब्यूरो हैड ने दबाव बनाया था। उसने यह भी कहा था यहां तो यह सब करना ही पड़ता है। हालांकि सुबह होने पर यह कह दिया गया था कि वो सब तो रात को दारू के नशे में बोला गया था। सवाल यह है कि खुद रिपोर्टर ने नौकरी को लात क्यों नहीं मारी ऐसा काम करने से पहले? ऐसी भी क्या मजबूरी थी? तो जवाब एक ही हो सकता है कि कभी न कभी ये साहब भी इस खेल का हिस्सा रहे हों। रिपोर्टर पर प्रेशर का आलम ये कि उसकी तनख्वाह तक दो महीने से नहीं दी गई थी और वह उस महिला को 3000 रूपये देकर अपने बॉसेस के लिये लाया।

कामवाली बाई का मेकओवर करके मालिकान के सामने पेश कर दिया गया। सूत्रों की मानें तो उस महिला को आधी रात के बाद बकायदा कार से लाया जाता और घर छुड़वाया जाता। इस चैनल के प्रमुख कर्ताधताओं में से संस्कृति विभाग के पूर्व अधिकारी इस चैनल में पार्टनर हैं लेकिन इस घटनाक्रम के बाद वे चैनल से पांव खींचने का मन बना चुके हैं। कारण इससे उनकी प्रतिष्ठा धूमिल हो सकती है।

बता दें यह वही चैनल है जिसे वर्तमान कर्ताधर्ताओं ने अपने पूर्व मालिक के साथ धोखाधड़ी करके अपने नाम कर लिया था। जहां तक इन कर्ताधर्ताओं के इतिहास का सवाल है तो वह बहुत अनुकरणीय नहीं रहा है। एक मालिक तो पहले ही लड़की को हमबिस्तर होने की पेशकश कर अभी तक कोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं और बकायदा मध्यप्रदेश सरकार से राज्यस्तरीय अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। बताया तो यह भी जाता है कि रीवा में जब ये अपनी बारात लेकर गये थे तो इनकी होने वाली पत्नी की बहन ने ही इनकी और अन्य पत्रकारों की पिटाई कर दी थी क्योंकि उसे गलत तरीके से ​छेड़ा गया था। आखिरकार इन्हें बारात बैरंग ही लेकर जानी पड़ी थी। ये अलग बात है कि दूसरी बार शादी भी हो गई और पत्नी को नौकरी दिलाने के लिये तत्कालीन हुक्मरानों को कई तरह से संतुष्ट किया गया।

इस चैनल से जुड़े एक और पत्रकार देश की प्रतिष्ठित समाचार एजेंसी के मध्यप्रदेश के विशेष संवाददाता हैं। इनका चैनल संचालक महोदय से गठबंधन सात फेरों जैसा है। जहां जहां एक ने नौकरी की वहां—वहां दूसरे को पिछले दरवाजे से फायदा दिलवाया जाता रहा। इनका भी इतिहास इनकी पहली पत्नी को दिये गये दुखों से भरा पड़ा है। कभी तत्कालीन विधायकों नेताओं के साथ 1250 स्थित एक सरकारी मकान में अय्याशी की कहानियों को चरितार्थ करने वाले ये वरिष्ठ और प्रतिष्ठित पत्रकार आज चमकते चेहरे के साथ राजधानी में मान प्रतिष्ठा के साथ घूमते हैं। एक समय वह था जब इन्होंने पहली पत्नि को न सिर्फ प्रताड़ित किया बल्कि इनकी अय्याशियों से परेशान होकर रातोंरात मोहल्ले वालों को पुलिस बुलानी पड़ी थी।

अभी इनकी एक घोषित पत्नी और कम से कम दो अघोषित पत्नियां अलग—अलग जगहों पर रह रही हैं। पैसा कमाने के लिए ये पत्रकार महोदय बहुत परेशान रहते हैं। देश की प्रतीष्ठित समाचार एजेंसी में होने के बावजूद इनकी वर्तमान घोषित पत्नी के नाम से एक वेबसाईट जनसंपर्क की सूची में शामिल है। अघोषित पत्नियों के एनजीओ को ये फायदा दिलाने के चक्कर में है। इस चैनल के मुख्य कर्ताधर्ता भी चैनल के माध्यम से इन्हें मोटी रकम दिलवा रहे हैं और भविष्य का भी वायदा है। अब इन वायदों में क्या—क्या फायदा पहुंचाने की बात हुई है यह तो यही लोग जानें। आश्चर्यजनक बात यह है कि इस सबमें भागीदार मुख्यमंत्री के एक प्रमुख सलाहकार और वरिष्ठ पत्रकार के भाई भी शामिल रहे हैं। जो कि वर्तमान में इस चैनल में नौकरी भी कर रहे हैं, खुद की एक पत्रिका तो निकालते ही हैं आजकल एक के बाद एक इनकी किताबें भी प्रकाशित हो रही हैं। सवाल यह है कि इनके पास इतनी किताबें प्रकाशित कराने का जुगाड़ हो कहां से रहा है? आखिर में सवाल यही है कि दूसरों को पत्रकारिता में शुचिता और पवित्रता का पाठ पढ़ाने वाले खुद इसे किस दिशा में इसे लेकर जा रहे हैं।

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