विश्व दीपक-
लड़ाई भारत और पाकिस्तान के बीच थी ही नहीं. यह लड़ाई थी भारत और चीन के बीच. थियेटर पाकिस्तान था. फिलहाल भले ही युद्ध विराम हो चुका है लेकिन इस विराम की उम्र इतनी भी नहीं होगी कि चीन अपने साम्राज्यवादी मंसूबों को किनारे रख दे. चीन कुछ न कुछ ऐसा करता रहेगा कि भारत अस्थिर रहे. अंतत: एक न एक दिन भारत को चीन का सीधा सामना करना ही पड़ेगा. इसलिए तैयारी चीन के हिसाब से होनी चाहिए.

युद्ध विराम की घोषणा के तुरंत बाद पाकिस्तान के समर्थन में चीन ने जैसा बयान दिया उससे यही साबित होता है कि चीन का पालतू कुत्ता जो पहले अमरीका का था, फिर काटेगा. इलाज भारत को खुद ढूंढ़ना होगा.
रही बात अमरीका की तो आज अगर पाकिस्तान खंडित होने से बचा हुआ है तो उसके पीछे अल्लाह और आर्मी के बाद अमरीकी डॉलर की ताकत है. युद्ध के बीच आईएमएफ का पाकिस्तान को एक बिलियन डॉलर का लोन देना क्या साबित करता है? यही कि अमरीका पाकिस्तान को हर हाल में बचाना चाहता है.
वर्ना पाकिस्तान इतने तरह के आंतरिक संघर्षों से जूझ रहा है कि एकाध टुकड़ा अब तक और हो जाता. भारत को नियंत्रित करने के लिए एक पागल पाकिस्तान, अमरीका की भी जरूरत है. इसलिए पाकिस्तान जैसा है वैसा ही बना रहेगा. बल्कि इसकी संभावना ज्यादा है कि वह भारत के खिलाफ आतंकवादी अभियान और तेज़ करेगा.
इसका एक ही समाधान है ताकत. दुनिया ताकत से ही चलती है नैतिकता से नहीं. भारत को अपनी आर्थिक, सामरिक, रणनातिक ताकत तीव्र गति बढ़ानी होगी तभी इसका मुकाबला किया जा सकता है.
मुकुल सरल-
ट्रंप अंकल बहुत जल्दबाज़ नेता हैं। उन्होंने सबसे पहले सीज़फायर का ऐलान करके मोदी जी का क्रेडिट छीन लिया। वरना होता यह कि मोदी जी यह ऐलान करते कि पाकिस्तान सीज़फायर के लिए तैयार हो गया है। और इसे अपनी जीत और उपलब्धि के तौर पर बताते।
ट्रंप जी ने सब गुड़गोबर कर दिया। और उनके उपराष्ट्रपति और विदेश मंत्री-विदेश सचिव ने भी घोषणा कर दी कि उनकी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़, पाकिस्तान के जनरल मुनीर, भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्री आदि से बातचीत की और समझौते को राज़ी किया।


ट्रंप अंकल ने तो पता नहीं हमारी तारीफ़ में कहा या बेइज़्ज़ती में कि दोनों देशों ने कॉमन सेंस का इस्तेमाल किया।
ट्रंप, भारत की घोषणा से पहले ही 5.25 बजे अपने सोशल एकाउंट पर लिख चुके थे–“संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा मध्यस्थता में की गई बातचीत की एक लंबी रात के बाद, मुझे यह घोषणा करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि भारत और पाकिस्तान ने पूर्ण और तत्काल संघर्षविराम पर सहमति जताई है। Common Sense and Great Intelligence का उपयोग करने के लिए दोनों देशों को बधाई। इस विषय पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद।”
यह पहली बार है कि भारत-पाक के बीच इस तरह अमेरिका आया है। और अब वह आगे की वार्ता की भी जगह तय करेगा। अब तक हमारी घोषित नीति रही है कि भारत-पाक का कोई भी मसला द्विपक्षीय बातचीत के ज़रिये हल किया जाएगा, इसमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्ता स्वीकार नहीं की जाएगी। लेकिन यह हो गया और अब मोदी जी जवाब नहीं देंगे कि ऐसा क्यों हुआ।
मोदी जी का रजत शर्मा की आपकी अदालत का एक पुराना वीडियो भी अब ख़ूब वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने कहा था कि ये लव लेटर लिखना बंद कीजिए और पाकिस्तान के हमले के बाद अमेरिका क्यों जाना, पाकिस्तान जाना चाहिए। यह सब बातें उन्होंने गुजरात का मुख्यमंत्री रहते कहीं थीं। और ख़ूब तालियां बटोरी थीं। वे प्रधानमंत्री बनने से पहले और बाद में भी ऐसी ही जुमलेबाज़ियों के लिए ख़ूब तालियां और वोट बटोरने के माहिर हैं। जैसे काला धन वापस लाना, जनता में बांट देना, दो करोड़ नौकरियां आदि-आदि।
मोदी जी और उनकी पार्टी के नेता भी आज से पहले दहाड़ते रहे कि PoK वापस लेंगे। लाहौर में घुस जाएंगे। ख़ैर यह काम तीन दिन उनके गोदी मीडिया ने बख़ूबी किया जिसमें इस्लामाबाद तक पर कब्ज़ा करा दिया। अब मन मारके टीवी वालों को उसे ‘वापस’ करना पड़ेगा!
अब भी वे इस सीज़फायर के मामले में कुछ ऐसा ही प्रयास करेंगे और करेंगे क्या, उनका गोदी मीडिया और भक्त इसी प्रयास में जुट गए हैं कि इस सीज़फायर को मोदी जी की बड़ी उपलब्धि की तरह प्रस्तुत किया जाए। दिलचस्प है कि अब यही लोग शांति को एक बड़ी जीत बता रहे हैं, यही लोग कल हम जैसे लोगों को युद्ध नहीं चाहिए की अपील करने पर गरिया रहे थे। कायर और देशद्रोही तक कह रहे थे। और याचना नहीं अब रण होगा..जैसी लाइनें पोस्ट करके ललकार रहे थे।
यह भी विडंबना है कि दूसरों को संकटकाल में राजनीति न करने की सलाह देनी वाली बीजेपी पूरे विपक्ष के एकजुट समर्थन के बावजूद उसे नीचा दिखाने के लिए पुरानी कांग्रेस सरकार और मोदी सरकार के भारत के फ़र्क़ को दिखाकर उन्हें नीचा दिखाने का प्रयास कर रही थी। यह सब किसलिए, सिर्फ़ वोट के लिए। बिहार में तो ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना की वर्दी में मोदी जी के पोस्टर भी लग गए थे।
ख़ैर अंत भला तो सब भला। न तू जीता-न मैं हारा। जैसे भी हो युद्ध की आशंका टली। इसके लिए सबका शुक्रिया। मोदी जी का भी। अब मोदी जी को देश की जनता और प्रतिपक्ष का सामना करना चाहिए और इस संघर्ष में क्या खोया-क्या पाया का हिसाब देना चाहिए। लेकिन मुझे नहीं लगता कि ऐसा होगा। संसद आदि के लिए अभी उनके पास वक्त नहीं है। तमाम जगह जाने के बावजूद उनके पास तो दो-दो बार हुई सर्वदलीय बैठक में भी जाने का वक़्त नहीं था।
अभी होगा यह कि किसी रैली में मोदी जी फिर पाकिस्तान को मिट्टी में मिला देने की घोषणा करेंगे। या ऐसे ही किसी दिन ख़बर आएगी कि किसी अज्ञात स्थान पर या फिर घुसपैठ करते पहलगाम हमले के दोषी आतंकी मार गिराए गए हैं। फिर तालियां बजेंगी, जोश जगाया जाएगा। विजय उत्सव होगा। वे कौन हैं, हमारी सीमा में कैसे घुस आए थे, हमारी चूक क्या और कैसे हुई, आप यह सवाल फिर नहीं पूछ पाएंगे क्योंकि ऐसा पूछते ही आपसे कहा जाएगा कि आपको अपने सुरक्षा बलों पर भरोसा नहीं, सेना पर भरोसा नहीं, आप देशद्रोही हैं।


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