चित्रा त्रिपाठी की थ्री डॉट पत्रकारिता चर्चा में!

गिरीश मालवीय-

कल कुख्यात न्यूज़ एंकर चित्रा त्रिपाठी जी ने वाक्य के अंत में लिखे जाने वाले तीन डॉट का (…) का महत्व हम अनपढ़ लोगो को समझाया है इस पर मित्र Pankaj K. Choudhary जी एक छोटा सा पीस लिखा है-

बरसों पहले की बात है। मैं एक सरकारी स्कूल में पढ़ रहा था। एक बार मैंने ब्लैकबोर्ड पर लिख दिया यह टीचर साला है…

अगले दिन क्लास टीचर आये। पूछ कि ये किसने लिखा है। मैंने कहा कि मैंने लिखा है। मेरे क्लास टीचर ने जूतों से, लात से घूसों से मुझे खूब मारा।

मैं चुपचाप मार खाता रहा।

लात खाने के बाद मैंने कहा मुझे लात मारने से पहले तीन डॉट आप लोगों को देखना चाहिए था।

क्लास टीचर ने पूछा कि इस तीन डॉट का क्या मतलब होता है?

मैंने कहा कि इसका मतलब होता है मेरी बात अभी खत्म नहीं हुई है।

टीचर ने पूछा कि पूरी बात क्या है?

मैंने जवाब दिया कि जैसे गाय के रहने की जगह को गौशाला कहते हैं, जहां धर्म है वो जगह धर्मशाला हुआ, वैसे ही यह टीचर साला है। यहां टीचर रहते हैं।

फिर टीचर ने मुझे श और स का अंतर समझाया। मुझसे माफी भी मांगी।

मेरे क्लास टीचर की बेटी का नाम चित्रा था।

मैंने अगले दिन ब्लैकबोर्ड पर लिख दिया चित्रा, आई लव यू… और उसके बाद तीन डॉट दे दिया।

टीचर आये। ब्लैकबोर्ड पर लिखा देखा। हैंडराइटिंग पहचान कर मुझे लतियाना शुरू किया। लात खाने के बाद मैंने कहा कि मैंने तीन डॉट दिया है।

टीचर ने फिर पूछा कि पूरी बात क्या है. मैन कहा चित्रा, आई लव यू गंदे बच्चे बोलते हैं। चित्रा टीचर की बेटी है। टीचर की बेटी हमारी बहन समान होती है। टीचर खुश हुए। मुझे चॉकलेट दिया खाने को।

अगले दिन ब्लैकबोर्ड पर मैंने फिर लिख दिया कि हमारे करेंसी में नैनो चिप लगा है…

फिर तीन डॉट दिया। टीचर अगले दिन आए। ब्लैकबोर्ड पर लिखा देखा। मुझे बुलाया। और लतियाया।

मैंने लात खाने के बाद कहा कि मैंने तो तीन डॉट दिया है जिसका मतलब है कि मेरी बात खत्म नहीं हुई है। पूरी बात ये है कि करेंसी में नैनो चिप होते हैं, ऐसा आपको गोदी मीडिया की श्वेता बताएगी। मगर आपको न्यूज़ चैनल नहीं देखना है। दुनिया के किसी भी देश की करेंसी में नैनो चिप नहीं लगा है। टीचर खुश हुए और मुझे चॉकलेट दिया खाने को।

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