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सुख-दुख

कंडक्ट रूल्स में अनुशासन का मतलब गुलामी नहीं, मैं तो चरण वंदना करने से रहा

आज मीडिया के कई दोस्तों के फ़ोन आये और पूछ रहे थे क्या आपका जवाब तलब किया गया है? किसी प्रेस वार्ता में उन्हें ज्ञात हुआ कि जो अधिकारी फेस बुक पर या अन्यत्र जन समस्याओं से अपने को सम्बद्ध कर रहे हैं, यह ऊपर पसंद नहीं किया जा रहा है। मैं इस पर क्या कमेंट करू ? हम जैसे अधिकारियों को सबक सिखाने या कुचलने से क्या मिलेगा ? ये अन्याय होगा, घोर अन्याय परन्तु इससे यदि किसी को तरक्की या सुख मिलता है तो वो भी सही ! मैं चरण वंदना करने से तो रहा।

आज मीडिया के कई दोस्तों के फ़ोन आये और पूछ रहे थे क्या आपका जवाब तलब किया गया है? किसी प्रेस वार्ता में उन्हें ज्ञात हुआ कि जो अधिकारी फेस बुक पर या अन्यत्र जन समस्याओं से अपने को सम्बद्ध कर रहे हैं, यह ऊपर पसंद नहीं किया जा रहा है। मैं इस पर क्या कमेंट करू ? हम जैसे अधिकारियों को सबक सिखाने या कुचलने से क्या मिलेगा ? ये अन्याय होगा, घोर अन्याय परन्तु इससे यदि किसी को तरक्की या सुख मिलता है तो वो भी सही ! मैं चरण वंदना करने से तो रहा।

बस इतना ही याद दिलाना चाहूँगा कि 1947 में आजादी के बाद आईएएस (I.A.S.) सेवा का गठन हुआ था, जो आईसीएस (I.C.S.) का आजादी के बाद का बदला हुआ नाम था। आईसीएस में अधिकांश अधिकारी अंग्रेज थे; इस सेवा का इस्तेमाल अंग्रेजों द्वारा अपने निजीहितार्थ हिंदुस्तान की जनता को लूटने व टैक्स संग्रह आदि के लिए किया गया। इस सेवा के अधिकारियों की ब्रिटिश राज के साथ पूर्ण वफादारी थी।

आजादी के बाद इस सेवा का उदेश्य भारत के आर्थिक विकास – जनसामान्य की सेवा व किसान मजदूर के हितों की रक्षा करना माना गया (नेहरु व पटेल के शब्दों में )। शायद हममे से अभी भी काफी नौकरशाह इस परिवर्तित स्वरुप को स्वीकार नहीं कर पाए हैं और अपने राजनैतिक आकाओं को ब्रिटिश राज के स्थान पर देखते हैं और उसी प्रकार निजी स्वार्थार्थ उनकी सेवा श्रुषा में लगे रहते हैं, चमचागिरी करते हैं, चरण वंदना करते हैं।

आजादी के बाद के नौकरशाह को समझना चाहिए कि लोकतंत्र में सब कुछ जनता के लिए है, उनकी जबाबदेही जनता के प्रति सर्वोपरि है, किसी राजनैतिक व्यक्ति या संगठन के लिए नहीं। पीड़ित वर्ग जैसे किसान आदि की समस्या के प्रति संवेदना दिखाना अपराध नहीं। अपराध है, अपने कार्यों के दौरान गरीब के प्रति उदारता, निष्पक्षता, तटस्थता व जन सामान्य के प्रति सेवा भाव न रखना। उनके खिलाफ कार्रवाई करो, जो निष्पक्ष-मन, तटस्थ व जनसामान्य के प्रति संवेदनशील नहीं है। कंडक्ट रूल्स में अनुशासन का मतलब ब्रिटिश काल के नौकरशाह जैसी गुलामी नहीं।

किसानो को वितरित मुआवजे में घोर अनिमितायें – 87, 100, 186, 200 रुपए के चेक बांटना और वो भी बाउंस हो जाए तथा विलंब से मिले, कितने जिलाधिकारियों या अन्य उच्च अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गयी? छोटा कर्मचारी लेखपाल तो जरूर मरेगा, बड़े कब पकड़े जाएंगे? बिजली बोर्ड में एक हजार करोड़ रुपए का घोटाला हो गया, क्या कोई बड़ा कभी पकड़ा जायेगा? छोटे-छोटे कंप्यूटर ऑपरेटर्स को जरूर जेल भेज दिया जायेगा। और बहुत सारे घोटाले हैं, क्या लाभ है बताने से- यादव सिंह क्या जेल गया? इलाहाबाद में छात्रों के दोषी कब दण्डित होंगें, क्या नक़ल माफिया दण्डित होंगे आदि आदि ? 

सूर्यप्रताप सिंह के एफबी वॉल से

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2 Comments

2 Comments

  1. Kaushalendra

    April 22, 2015 at 4:23 pm

    उक्त तस्वीर के बारे में बताने का कष्ट करें।

  2. uk

    April 23, 2015 at 8:55 am

    किसी फिल्म का सीन है. चिंता न करें .. अभी नौकरशाही इतना नहीं गिरी.. पर गिरने के रास्ते पर ज़रूर है.. अगर नहीं संभली तो

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