जब डॉक्टर ही नहीं रहेंगे तो कोरोना महामारी से हमें बचायेगा कौन?

दीये जले न जलें मोमबत्तियां बुझने से पहले डॉक्टरों को सुरक्षा मिले… कुछ ऐसा ही संदेश दे रही टेलीग्राफ की लीड खबर…

कोरोना महामारी से उबरने के लिए डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ दिन रात अपनी जिंदगी दाव पर लगाते हुए काम कर रहे हैं। जनता को कोरोना वायरस से आजादी दिलाने वाले ये डॉक्टर खुद इस संक्रामक बीमारी की चपेट में आते जा रहे हैं। बावजूद इसके उनकी सुरक्षा के लिए सरकार अभी तक पर्याप्त व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) का प्रबंध कर पाने में नाकाम दिख रही है। द टेलीग्राफ की लीड खबर हमें यही संदेश दे रही है कि दीये जले न जलें मोमबत्तियां बुझने से पहले डॉक्टरों को सुरक्षा मिलनी चाहिए।

फिरोज एल.विनसेंट की रिपोर्ट को टेलीग्राफ ने आज लीड में छापा है। टेलीग्राफ में छपी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस वक्त पीएम जनता से दीये जलाने की अपील कर रहे हैं ठीक उसी वक्त ट्वीटर पर डॉक्टरों की जान बचाने के लिए उन्हें सुरक्षा उपकरण मुहैया कराये जाने का अभियान चलाया जा रहा है। सरकार के सुझावों पर बदस्तूर अमल करने की जगह टेलीग्राफ यह आगाह करने में पीछे नहीं रहता कि डॉक्टरों की सुरक्षा ज्यादा मायने रखती है न कि देशवासियों का दीये जलाकर एकजुटता का प्रदर्शन करना।

इस खबर में बताया गया है कि कोरोना संक्रमित मरीजों की सेवा में लगे डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ की जिंदगी बचाने के लिए उन्हें सुरक्षित संसाधन मुहैया करने की जरूरत है। हालांकि ऐसा कर पाने में सरकार की नाकामी छिपी हुई नहीं है। कोरोना संक्रमित डॉक्टरों की तादाद भी लगातार बढ़ती ही जा रही है। ताज्जुब इस बात की है कि संकट की इस घड़ी में भी पीएम एक अजीबोगरीब पेशकश करने से नहीं चूकते जबकि उन्हें डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम करने में पूरी ताकत झोंक देनी चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी जनता को संबोधित करते हुए जो संदेश देते हैं, उसमें 130 करोड़ की आबादी से बत्तियां जलाकर दीये, मोमबत्ती या मोबाइल का फ्लैश लाइट जला कर कोरोना के संकट से फैले अंधकार को प्रकाश की ताकत दिखाने की अपील की गयी है। अपने इस संबोधन में वे उन डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ का नाम तक नहीं लेते जबकि जनता कर्फ्यू के दौरान तालियां बजाने, थालियां पीटने और घंटियां बजाने का जिक्र करना नहीं भूलते हैं।

ट्वीटर पर # डॉक्स नीड गियर के जरिये लोगों ने डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के लिए सुरक्षा इंतजाम की कमियों से जुड़ी खबरों और जानकारियों को शेयर करते हुए मुहिम चलायी। इस मुहिम में सरकार से स्वास्थ्य सेवा से जुड़े लोगों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करने की अपील की।

टेलीग्राफ की खबर में प्रोग्रेसिव मेडिकोस एंड साइंटिस्ट फोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरजीत भट्टी के हवाले से बताया गया है कि देश भर में कोरोना वायरस से संक्रमित होने के खौफ में जी रहे डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के पत्रों और वीडियों के आधार पर ही ट्वीटर पर यह मुहिम चलायी जा रही है। डॉ. भट्टी ने बताया कि अब तक पचास से भी ज्यादा डॉक्टरों के संक्रमित होने की खबर है। डॉक्टर भट्टी ने फ्रांस का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां पर्फ्यूम बनाने वाली कंपनियां अब स्टेरीलाइजर्स का निर्माण करने लगी हैं और कार बनाने वाली फैक्ट्रियां अब वेंटीलेटर्स बना रही हैं। मगर हमारे यहां कंपनियां सामाजिक दायित्व के अंतर्गत बाध्यता मूलक कर दी गयी राहत की रकम देकर अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाती है। उन्होंने कहा कि हमें ऐसी सरकार, कंपनियों और जनता की जरूरत है जो स्वास्थ्य सेवाओं को सबके लिए उपलब्ध कराने की मुहिम में हमारा पूरा साथ दें।

सफदरजंग अस्पताल के रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने भी ट्वीटर पर पीपीई किट, एन95 मास्क, ट्रिपल लेयर मास्क और सेनीटाइजर्स मुहैया करने की अपील की है। इस अपील में कहा गया है कि दिल्ली में कोविड 19 के इलाज में लगे डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के पास पर्याप्त मात्रा में सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं हैं। यह भी सवाल उठाये जा रहे हैं कि आखिर पीएम फंड का इस्तेमाल इसके लिए क्यों नहीं किया जा रहा है। प्रधानमंत्री देश की जंनता को संबोधित करते हुए कहते हैं कि कोरोना के अंधकार को चुनौती देने के लिए देश की 130 करोड़ जनता को दीया, मोमबत्ती या मोबाइल की लाइटें जलानी चाहिए। ऐसा कर हम कोरोना की महामारी से उपजे अंधकार को प्रकाश की ताकत का परिचय देंगे।

सवाल ये उठता है कि क्या ऐसा कर देने से हम कोरोना की जंग में जीत हासिल कर लेंगे ? इसका क्या मतलब समझा जाए, हम सब देशवासी भारत माता को याद कर दीये जला लें तो क्या उसकी रोशनी से कोरोना की महामारी से बच जायेंगे ? नहीं न, फिर अपनी जान जोखिम में डाल रहे दिन रात कोरोना से संक्रमित मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों की सुरक्षा का प्रबंध क्यों नहीं किया जा रहा है ? कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की तादाद बढ़ती जा रही है जिसमें डॉक्टर भी शामिल हैं। संकट की इस घड़ी मे जरूरी है कि सरकार इलाज कर रहे डॉक्टरों और तमाम मेडिकल स्टाफ को सुरक्षा इंतजाम मुहैया कराये। मगर ऐसा नहीं हो रहा।

इधर टेलीग्राफ की लीड खबर के साथ जो तस्वीर छपी है उसमें भी दिल्ली के एक अस्पताल में मुआयना करने गये स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन खुद एन95 मास्क पहने नजर आ रहे हैं जबकि उनके आस पास खड़े कुछ डॉक्टर साधारण सर्जिकल मास्क पहने नजर आ रहे हैं। जाहिर सी बात है, हम समझ सकते हैं कि डॉक्टरों के बजाय सरकार मंत्रियों और वीवीआईपी की सुरक्षा में कोई कोताही नहीं बरत रही। मगर सरकार को समझने की जरूरत है कि जब डॉक्टर ही नहीं रहेंगे तो कोरोना महामारी से हमें बचायेगा कौन। क्या सरकार को अब कर्तव्य निभा रहे इन डॉक्टरों की जान बचाने की कवायद शुरू नहीं करनी चाहिए। जनता को टोने-टोटके सुझाने की जगह सरकार अपने दिमाग की बत्ती जला ले तो हम सबको ज्यादा फायदा होगा।

पत्रकार एसएस प्रिया का विश्लेषण.

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One comment on “जब डॉक्टर ही नहीं रहेंगे तो कोरोना महामारी से हमें बचायेगा कौन?”

  • राम says:

    मोदी जी को जनता ने नहीं ईवीएम के खास सोफ्टवेयर ने चुना है उनका मशीन तो अगले कार्यकाल तक सुरक्षित है ।

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