सिर्फ पत्रकारों को ही क्यों? सिर्फ 67 को ही क्यों? सिर्फ पांच पांच लाख रुपये ही क्यों?

कोरोना से मृत सभी पत्रकारों के परिजनों को एक एक करोड़ दे मोदी सरकार!

मोदी सरकार ने कोरोना से जान गंवाने वाले 40 पत्रकारों के परिजनों को पांच पांच लाख रुपये देने का फैसला किया है. इसके पहले 27 पत्रकारों को के परिजनों को ये लाभ देने का निर्णय लिया जा चुका है. इस तरह अब तक 67 पत्रकारों के परिजनों को आर्थिक मदद दी गई है. सवाल है कि सिर्फ पत्रकारों को ही क्यों… मीडिया में गैर पत्रकार भी काम करते हैं. अखबारों में पेज बनाने वाला, प्रिंटिंग करने वाला, विज्ञापन वाला, मार्केटिंग वाला, सेल्स वाला, ब्रांड वाला… ये सब भी तो प्रेस कर्मी हैं… तो कोरोना से मरे पत्रकारों की बजाय कोराना के शिकार हर एक मीडियाकर्मी को मदद मिलनी ही चाहिए.

मोदी सरकार ने अभी तक कुल 67 पत्रकारों के परिजनों को ही लाभ देने का फैसला किया है. सवाल है कि कोरोना से जितने भी मीडियाकर्मी मारे गए हैं, सभी के परिजनों को क्यों नहीं पांच पांच लाख रुपये मिलने चाहिए.

और, ये पांच पांच लाख रुपये क्या होते हैं…. जब सफाई कर्मियों, डाक्टरों की मौत पर दिल्ली की केजरीवाल सरकार एक एक करोड़ रुपये दे सकती है तो मोदी सरकार कोविड से मरे देश भर के मीडियाकर्मियों के परिजनों को एक एक करोड़ रुपये क्यों नहीं दे सकती… आखिर मीडियाकर्मी भी तो कोरोना योद्धा हैं जो हर हाल में अपना काम कर रहे होते हैं और इसी प्रक्रिया में संक्रमित हो जान गंवा देते हैं…

उल्लेखनीय है कि सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने कोरोना वायरस से जान गंवाने वाले कुल 67 पत्रकारों के परिवारों को पत्रकार कल्याण योजना के तहत आर्थिक मदद देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इन पत्रकारों के परिवारों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में सचिव अमित खरे की अध्यक्षता में गुरुवार को पत्रकार कल्याण योजना समिति के इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है. समिति ने हर सप्ताह जेडब्ल्यूएस की बैठक आयोजित करने का भी निर्णय लिया, ताकि इस योजना के तहत वित्तीय सहायता वाले आवेदनों को त्वरित मंजूरी दी जा सके.


Sarjana Sharama-

कोविड के बहाने दिन रात केंद्र सरकार को कोसने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी… सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने आज कुल 40 पत्रकारों के लिए पांच पांच लाख रूपए की सहायता राशि स्वीकृत कर दी है । इनमें से 26 पत्रकारों की कोरोना से और 11 पत्रकारों की सडक दुर्घटना , और अन्य गंभीर बीमारियों से मृत्यु हो गयी थी । तीन पत्रकार ऐसे हैं जो लंबे समय से शारीरिक रूप से अक्षम हैं और बिस्तर पर हैं । सरकार पर हिंदुत्ववादी होने का आरोप लगाने वाले ये भी जान लें कि किसी भी आवेदन की राशि स्वीकृत करने का आधार धर्म या जाति बिल्कुल नहीं है । मैं जानबूझ कर यहां नहीं लिखना चाहती कितने मुस्लिम और ईसाई पत्रकारों के परिवारों को आर्थिक मदद दी गयी है । केवल सभी स्पोर्टिंग पेपर सही होने चाहिएं । सभी अपेक्षित प्रमाण पत्र होने चाहिएं । पत्रकार की विचारधारा क्या थी इससे भी कमेटी को कुछ लेना देना नहीं है । जैसा कि आजकल चलन हो गया है पत्रकारों को भी खांचे में बांटने का ।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत गठित पत्रकार कल्याण योजना कमेटी की बैठक मंत्रालय के सचिव अमित खरे की अध्यक्षता में आज हुई । खरे ने कहा कि कोरोना के हालात देखते हुए अब हर सप्ताह गुरूवार को कमेटी की बैठक होगी यदि एक केस भी हुआ तो उस पर भी विचार किया जाएगा । कमेटी में 6 पत्रकार हैं जिनमें से एक मैं भी हूं । कमेटी के अध्यक्ष मंत्रालय के वर्तमान सचिव अमित खरे हैं । दो अन्य अधिकारी भी सदस्य हैं । पिछले साल गठित कमेटी में मुझे सदस्य बनाया गया था । हर बैठक में मैं सचिव अमित खरे का एक अत्यंत मानवीय चेहरा देखती हूं । हम आज की बैठक में मंत्रालय से अनुरोध करने वाले थे कि बैठक महीने में एक बार की जाए । लेकिन इससे पहले की हम अपनी बात रखते सचिव अमित खरे ने स्वयं ही घोषणा कर दी कि अब हर गुरूवार को शाम को चार बजे पत्रकार कल्याण योजना कमेटी की बैठक हुआ करेगी यदि एक केस भी होगा तो उस पर विचार किया जाएगा । जाहिर सी बात है सरकार ने तय किया तो सचिव ने घोषणा की । इससे ज्यादा सरकार इन मामलों में क्या कर सकती है । आलोचना आप भले ही कितनी भी कर लिजिए लेकिन जब कोई अच्छा काम हो तो उसकी भी सराहना होनी चाहिए ।

इससे पहले मंत्रालय ने साल 2020-21 में कोविड़ से मरने वाले 39 पत्रकारों के परिवारों को मार्च में पांच पांच लाख रूपए की सहायता राशि दी थी । कमेटी के पत्रकार सदस्यों ने मंत्रालय से अनुरोध किया कि सहायता राशि बढ़ायी जाए और पत्रकारों को आजीवन सीजीएचएस कार्ड दिया जाए । मंत्रालय के संयुक्त सचिव विक्रम सहाय ने भरोसा दिलाया कि इस पर विचार किया जाएगा और राशि बढ़ाने के लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा ।

यदि मैं कमेटी की सदस्य न होती तो शायद इतने दावे के साथ ये सब न लिख सकती । मंत्रालय के पत्र सूचना कार्यालय का प्रैस रिलेशंस विभाग लॉक डॉऊन के समय में भी आर्थिक सहायता के लिए आने वाले आवेदनों पर दिन रात काम करता है । परिवारों को जल्द सहायता मिले इसलिए छुट्टी के दिन भी काम करके आवेदन फाइलें पूरी की गयीं । मंत्रालय और पीआईबी का मानवीय चेहरा आपदा के इस समय में देखने को मिल रहा है । प्रैस फेसिलिटी की अतिरिक्त महानिदेशक कंचन प्रसाद का विभाग आवेदनकर्ताओं से निरंतर संपर्क में रहता है । हर पत्रकार की पत्नी इतनी शिक्षित नहीं होती कि वो ऑन लाईन फॉर्म भर सकें । विभाग का स्टॉफ पत्रकारों के परिवारों को फोन पर एक एक बात समझाते हैं इतना ही नहीं उनसे सहानुभूति भी जताते है । जितनी बार फोन करना पड़े करते हैं । कोशिश यही रहती है कि कोई भी केस दस्तावेजों के कारण अटक न जाए । कोविड़ काल में जब आधे से ज्यादा पीआईबी के कर्मचारी स्वयं कोरोना ग्रस्त हैं या उनके परिवार के लोग कोरोना ग्रस्त हैं । चाार पीआईबी अफसरों की पिछले दिनों कोरोना से मौत हुई । ऐसे माहौल में पत्रकारों के परिवारों के लिए चिंता करना उन्हें जल्द सहायता राशि दिलाना । कंचन प्रसाद , शंभुनाथ चौधरी और अग्रवाल जी का मानवता के प्रति एक एक केस के पेपर मंगवाने के लिए दिन रात एक करना ये बहुत प्रशंसनीय हैं । सूचनाऔर प्रसारण मंत्रालय को साधुवाद ।

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One comment on “सिर्फ पत्रकारों को ही क्यों? सिर्फ 67 को ही क्यों? सिर्फ पांच पांच लाख रुपये ही क्यों?”

  • ram singh says:

    what will happen those whom media industry terminated from job during covie-19 from last year to till date like Rajasthan Patrika Pvt.Ltd. had done thousands of employ has been terminated by World wisest writer Dr. Gulab Kothari . will central govt. ask him why he is doing like this in spite of this he is earning lakh of rupees daily and show that he running under loss. and about the money he earned from previous year has gone. Govt must taken action against him he always showing that there is no wise person in this universe except of them. what every he published in his paper written by one big team who do this and this person publish in his paper. can any body asked him how and where did you got this knowledge.

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