कोरोना वायरस तो नब्बे डिग्री टेंपरेचर में भी नहीं मरता भाई!

Soumitra Roy : कोरोना अमर है। इंसान नश्वर है। फ्रांसीसी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने कोरोना को 60℃ पर भी जिंदा पाया है। इसे 92℃ पर 15 मिनट उबालें तो ही यह मरता है। दोज़ख में कड़ाही में खौलते तेल का इंतज़ाम इंसानों को Sanitise करने के लिए ही किया गया होगा। दुनिया को दोज़ख बनाने वाले चीन को कभी माफ नहीं किया जाएगा।

उधर, विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित अध्ययनों के अनुसार, लगभग 95 प्रतिशत लोगों में 0 से 14 दिनों (या पांच दिनों का मध्यकाल) के बीच कोरोना वायरस के लक्षण विकसित करते हैं. शेष पांच प्रतिशत मामलों में 24 दिनों के बाद और कई बार एक महीने में भी रोगसूचक लक्षण दिखते हैं. यह पांच प्रतिशत संख्‍या के तौर पर बेहद कम नजर आता है लेकिन इसके कारण भी संक्रामक विषाणु के प्रसार और कोरोना की तीव्रता बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.

सबसे महत्वपूर्ण सबक जो हमें सीखने की जरूरत है वह यह कि 14 दिन की अवधि में कोरोना के लक्षण नहीं दिखने वाले लोग भी वायरस को फैला सकते हैं.

भारत ने पहली ग़लती यह की कि 5 लाख प्रवासी भारतीयों को एयरपोर्ट पर तापमान देखकर घर जाने दिया। फिर टेस्ट के नाम पर गंभीर ढिलाई बरती गई। अभी भी प्रति 10 लाख पर 203 टेस्ट हो रहे हैं। इस पर स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने आज कहा कि देश में कोरोना के मामलों में 40% की गिरावट आई है। अब मैं हँसूँ या रोऊँ?

पत्रकार सौमित्र रॉय की एफबी वॉल से.



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